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Ballia News: पीकू वार्ड पर लटक रहा ताला, रेफर हो रहे नौनिहाल

Thu, 04 Apr 2024 12:25 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 04 Apr 2024 12:25 AM IST
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Lock hanging on Piku ward, minors are being referred.
कोरोना काल की तीसरी लहर में संक्रमित गंभीर बच्चों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में बनाया गया पीडियाट्रिक्स इंटेसिव केयर यूनिट (पीकू) वार्ड पर ताला लटका हुआ है। वार्ड में करोड़ों खर्च कर लगाए गए वेंटीलेटर, बाई पैप मशीन सहित अन्य उपकरण सिर्फ शो पीस बनकर रह गए हैं।
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इसके सभी बेड ऑक्सीजन सुविधा से लैस है। उसके बावजूद तीन वर्ष बाद भी गंभीर बच्चे उपचार के लिए गैर जनपदों के लिए रेफर होने के साथ ही दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर हैं। जनपद के अलग-अलग क्षेत्रों से जिला अस्पताल के बाल रोग ओपीडी में रोज 250 के ऊपर विभिन्न्न बीमारियों वाले मरीज आते हैं।
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मौसम के बदलाव होने पर रोज 10 से 15 सीने की जकड़न सहित अन्य गंभीर बच्चे इलाज की आस में अस्पताल पहुंचते हैं। बच्चों को इलाज के लिए वेंटिलेटर सहित अन्य जीवन रक्षक उपकरण की जरूरत होती है। जिले के किसी भी अस्पताल में उक्त सुविधा न होने व पीकू वार्ड में ताला बंद होने के कारण चिकित्सक बच्चे को मऊ, वाराणसी या लखनऊ रेफर कर अपनी जिम्मेदारियों से छुटकारा पाते हैं।
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वहां निजी अस्पताल वाले इलाज के नाम पर परिजनों का आर्थिक शोषण करते हैं। जिला अस्पताल के पीकू वार्ड में उक्त सभी सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद गंभीर बीमार बच्चे को भर्ती नहीं किया जाता है। चिकित्सक दबी जुबान शासन द्वारा निर्देश न मिलने के कारण ताला बंद होने की बात कहते हैं। अस्पताल में तीन बाल रोग विशेषज्ञ व अन्य संसाधन होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन पीकू वार्ड का ताला नहीं खोल रहा है।

पीकू वार्ड में यह होती है सुविधा

कोरोना काल की तीसरी लहर की चपेट में बच्चों के आने का ज्यादा का अंदेशा बना था। बचाव के लिए लिए हड्डी वार्ड में पीडियाट्रिक्स इंटेसिव केयर यूनिट (पीकू वार्ड) का निर्माण हुआ। इसमें पांच बेड वेंटिलेटर व अन्य 25 बेड पर रेडिएंट वार्मर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, इनफ्यूजन पंप, पल्स ऑक्सीमीटर, लेरिंगोस्कोप सहित एक दर्जन से ज्यादा जीवन रक्षक उपकरण उपलब्ध हैं, प्रत्येक बेड पर मल्टी पेरामीटर मॉनिटर सहित अन्य अत्याधुनिक संसाधन लगाए गए है। सभी बेड पाईप लाइन ऑक्सीजन से जुड़े हैं। पीकू वार्ड एक तरह से आईसीयू वार्ड की तर्ज पर बना था। जिसमें 18 वर्ष के नीचे के गंभीर बच्चों और किशोरों के इलाज की सभी सुविधा मौजूद है।
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