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कटान पीड़ितों को अब बसाने की कवायद
ब्यूरो/अमर उजाला,बलिया
Updated Wed, 01 Jun 2016 09:32 PM IST
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गंगा की कटान से बेघर होकर सैकड़ों लोग एनएच-31 पर झुग्गी, झोपडिय़ा डालकर रह रहे है। उनमें से सदर और बैरिया तहसील के 377 कटान पीड़ितों को बसाने की कवायद चल रही है। लेकिन हालात यह है कि सीएम के गत दिनों जनपद में आगमन के दौरान उस समय इन पीड़ितों को आशियाना बसाने के लिए तेजी तो लाई गई।
लेकिन सीएम का उडनखटोला उड़ने के बाद ही विभाग शिथिल पड़ गया। आज भी वे छप्पर नसीब होने के इंतजार में अपने रहनुमा की तलाश कर रहे है। सदर तहसील के धर्मपुरा, मझौंवा, पचरू खिया, नारायनपुर, गंगापुर के 327 कटान पीड़ित और बैरिया तहसील के 50 कटान पीड़ितों के बसाने की योजना चल रही है।
जिला प्रशासन ने गत दो मई को जनपद में आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के द्वारा कटान पीड़ितों को आनन-फानन में आवासीय पट्टा भी उपलब्ध कराया गया। तो लगा कि जल्द ही इन पीड़ितों को बसाने की योजना धरातल पर मूर्त रूप ले लेगी।
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लेकिन सीएम के उडन खटोला उडने के बाद विभाग शिथिल पड़ गया और आज तक सभी पीड़ितों को आवासीय पट्टा उपलब्ध कराया गया। यहीं नहीं क्षेत्रीय लेखपाल और बिचौलियों के माध्यम से भी कुछ पीड़ितों के नाम काटने और बढ़ाने का मामला लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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लेकिन सीएम का उडनखटोला उड़ने के बाद ही विभाग शिथिल पड़ गया। आज भी वे छप्पर नसीब होने के इंतजार में अपने रहनुमा की तलाश कर रहे है। सदर तहसील के धर्मपुरा, मझौंवा, पचरू खिया, नारायनपुर, गंगापुर के 327 कटान पीड़ित और बैरिया तहसील के 50 कटान पीड़ितों के बसाने की योजना चल रही है।
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जिला प्रशासन ने गत दो मई को जनपद में आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के द्वारा कटान पीड़ितों को आनन-फानन में आवासीय पट्टा भी उपलब्ध कराया गया। तो लगा कि जल्द ही इन पीड़ितों को बसाने की योजना धरातल पर मूर्त रूप ले लेगी।
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लेकिन सीएम के उडन खटोला उडने के बाद विभाग शिथिल पड़ गया और आज तक सभी पीड़ितों को आवासीय पट्टा उपलब्ध कराया गया। यहीं नहीं क्षेत्रीय लेखपाल और बिचौलियों के माध्यम से भी कुछ पीड़ितों के नाम काटने और बढ़ाने का मामला लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है।