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बलिया: जलशक्ति मंत्री ने हेलीकाप्टर से किया बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों सर्वेक्षण

Sun, 08 Aug 2021 10:35 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, बलिया
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 08 Aug 2021 10:35 PM IST
सार

जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने अधिकारियों के साथ बाढ़ से बचाव और राहत कार्यों की समीक्षा की। जब उनसे अधूरी परियोजनाओं पर सवाल तो सवालों को गोल कर गए। लेकिन स्वीकृत परियोजनाओं पर मुग्ध दिखे।

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Jalshakti Minister surveyed flood affected areas by helicopter in Ballia
बलिया के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का रविवार को हवाई सर्वेक्षण करते जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने रविवार को बलिया जिले के बाढ़ग्रस्त इलाकों का हेलीकॉप्टर से हवाई सर्वेक्षण किया। जायजा लेने के बाद कलेक्ट्रेट सभागार में प्रशासनिक और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ बचाव और राहत कार्यों की समीक्षा की। बाढ़ प्रभावित इलाकों में समय से राहत सामग्री, पका-पकाया भोजन, स्वच्छता, जरूरी दवाओं की उपलब्धता आदि के निर्देश दिए। तैयारियों पर संतोष जताया। जलशक्ति मंत्री से कई सवाल पूछे गए लेकिन वो इसे गोल पर शासन की ओर से स्वीकृत की गई परियोजनाओं को गिनाते रहे। अधूरी परियोजनाओं पर जवाब देने से बचते नजर आए।

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समीक्षा के बाद जलशक्ति मंत्री ने कहा कि बाढ़ से बचाने के लिए सरकार ने कोई कमी नहीं छोड़ी। दो तरफ से नदियों से घिरा होने की वजह से बलिया संवेदनशील जनपद है। बैरिया तहसील के 10 गांव और सदर तहसील के पांच गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। यहां 34 बाढ़ चौकी स्थापित हैं। एनडीआरएफ व एसडीआरएफ के 25-25 व पीएसी के 15 जवान तैनात हैं। उनके पास नावें व स्टीमर भी हैं।
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190 बड़ी नावें उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि यहां के जनप्रतिनिधियों व जिला प्रशासन ने जो प्रस्ताव दिया, सभी पर विचार करते हुए 114 करोड़ की 12 बड़ी परियोजनाएं स्वीकृत हुई। परियोजनाएं पूरी हो गई हैं। जबकि सच्चाई ये है कि एनएच-31 को बचाने के लिए घोषित 34 करोड़ की परियोजनाएं अधूरी पड़ी हुई हैं।

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सुरक्षा दीवार भी 10 मीटर बह चुकी है। इन सवालों का उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया। अधिकारियों से कहा कि तैयारी में अब भी कोई कमी रह गई है तो उसे तत्काल पूरा कर लें। राहत सामग्री का वितरण युद्धस्तर पर हो। पर्याप्त मात्रा में स्टॉक तैयार कर लें। पके पकाए खाने के पैकेट दिए जाएं। जरूरतमंदों को साड़ी व अन्य जरूरी कपड़े भी दे सकते हैं। सामाजिक सहयोग भी लें।

शुद्ध पेयजल बड़े गैलेन के माध्यम से उपलब्ध कराने का प्रयास करें। प्रकाश व्यवस्था के लिए टार्च, मोमबत्ती, लालटेन, मिट्टी तेल, इमरजेंसी लाइट की व्यवस्था जरूर करें। हर गांव में एकाध बैट्री की व्यवस्था कर दें, ताकि लोग मोबाइल चार्ज कर सकें। सीडीओ को निर्देश दिया कि पंचायत सचिव, रोजगार सेवक, निगरानी समिति व स्वच्छता समिति को आपस में समन्वय बनाकर गांव में बैठकर ग्रामीणों की समस्या का समाधान कराने का प्रयास करें।

बाढ़ प्रभावित हर गांव में एक-एक नोडल तैनात कर उनकी जवाबदेही तय करें। स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें, ताकि संक्रामक बीमारियों को फैलने से रोका जा सके। इसके लिए युद्धस्तर पर फॉगिंग, छिड़काव, ब्लीचिंग कराते रहें। एडीएम से कहा कि कंट्रोल रूम 24 घंटे संचालित रहे।

30 हजार की आबादी प्रभावित
बलिया। बैरिया विधायक सुरेंद्र सिंह ने कहा कि बैरिया क्षेत्र के आठ गांवों की करीब 25 से 30 आबादी प्रभावित है। भुवालछपरा व नौरंगा के लोगों को कस्बों में आने के लिए दो घंटे लगते हैं। चिकित्सा व्यवस्था सबसे जरूरी है। क्षेत्र में सचल मेडिकल टीम रहे। बीएसटी बंधे के डेंजर जोन एनएच-31 पर रामगढ़ के पास रिस्की प्वाइंट को बताया कहा कि अगर एनएच टूटा तो बड़ी तबाही होगी। इस पर जलशक्ति मंत्री ने बाढ़ खंड के एक्सईसन को पूरी ताकत लगाकर वहां अलर्ट रहने का निर्देश दिया। बेल्थरारोड विधायक धनन्जय कन्नौजिया ने कोईरी मुहान ताल को जल संरक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग की। बैठक में डीएम अदिति सिंह, एसपी डॉ. विपिन ताडा, सीडीओ प्रवीण वर्मा, एडीएम रामआसरे सहित सिंचाई व बाढ़ खंड के अभियंता मौजूद थे।

तटबंधों पर कैंप करें इंजीनियर
जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने कहा कि पानी के बढ़ने की अभी भी संभावना है। इसलिए बाढ़ खंड के सभी इंजीनियर तटबंधों पर कैंप करें। आपदा में मानव जाति संग पशुओं की भी उतनी ही चिंता करनी है। पशुओं के लिए भी चारा, दवाई, टीकाकरण की व्यवस्था अत्यंत जरूरी है। पुलिस अधीक्षक डॉ. विपिन ताडा से कहा कि बाढ़ के समय गांवों से सम्पर्क टूटने की आशंका रहती है। ऐसे में हर प्रभावित गांव में वायरलेस सेट के साथ सिपाही हर समय रहे। बचाव कार्य के लिए जिले में आए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, गोताखोर, नाव चालक आदि की सुविधाओं का भी ख्याल रखा जाए।

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