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एकात्म मानव दर्शन को हमें करना होगा आम्तसात:प्रो.इंदुमती काटदरे

Tue, 04 Aug 2020 10:48 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2020 10:48 PM IST
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Integral human philosophy we have to do, usually Prof. Indumati Katadare
बलिया। जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय के दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के तत्वावधान में मंगलवार को एकात्म मानव दर्शन और भारतीय शिक्षा की पुनर्प्रतिष्ठा पर ऑनलाइन संगोष्ठी हुई। मुख्य वक्ता पुनरुत्थान विद्यापीठ, अहमदाबाद की कुलपति प्रो. इंदुमती काटदरे ने कहा कि भारत की जीवन और जगत को देखने की जो शाश्वत दृष्टि है, उसे ही बीसवीं शताब्दी में युगानुरूप परिवर्तित करके एकात्म मानव दर्शन बना। हमें इस दर्शन को अपने जीवन में उतारना होगा।इसके लिये सामाजिक शास्त्रों के पाठ्यक्रमों को फिर से बनाने की आवश्यकता है।
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दीनदयाल अनुसंधान केन्द्र, दिल्ली के अध्यक्ष प्रो. महेश चंद्र शर्म ा ने कहा कि एकात्म मानव दर्शन व्यष्टि- समष्टि, सृष्टि और परमेष्टि की एकात्मकता की बात करता है। अध्ययक्षीय उद्बोधन देते हुए जेएनसीयू की कुलपति प्रो. कल्पलता पाण्डेय नेह कहा कि प्रेम, आनंद, त्याग, सेवा जैसे मूल्यों के आधार पर कुटुंब केंद्रित समाज व्यवस्था का निर्माण करना होगा और इसका उत्तरदायित्व दीनदयाल शोधपीठों को लेना होगा। आन लाइन गोष्ठी में प्रो. एमएल छिप्पा, प्रो. जसबीर सिंह, प्रो. विवेक वसंतराव काटदरे, प्रो. संजीव, प्रो. एसके मिश्र, प्रो. श्यामबाबू, प्रो. मानस पाण्डेय आदि ने प्रतिभाग किया। अतिथियों का स्वागत शोधपीठ के संयोजक डॉ. रामकृष्ण उपाध्याय ने और संचालन शोधपीठ के उप संपादक डॉ. प्रमोद शंकर पाण्डेय ने किया। प्रश्नोत्तर सत्र का संचालन डॉ. दयालानंद राय ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अनिल कुमार ने किया।
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