{"_id":"61c0c1d64ce02b55c42c2010","slug":"had-already-given-a-signal-against-his-own-government-ballia-news-vns6290430113","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल पहले दे दिया था संदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल पहले दे दिया था संदेश
विज्ञापन
पूर्व विधायक रामइकबाल सिंह।
- फोटो : BALLIA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलिया। भाजपा छोड़ सोमवार को सपा का दामन थामने वाले पूर्व विधायक रामइकबाल सिंह पिछले कुछ समय से अपनी ही सरकार के खिलाफ बयान देकर इसका संदेश दे रहेथे। कई बार तो उन्होंने अपनी पार्टी को काफी असहज स्थिति में ला दिया था। पिछले दिनों उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ही निशाना बना लिया था।
वर्ष 2002 में रामइकबाल सिंह चिलकहर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। बाद में यह सीट परिसीमन में खत्म हो गई। इसका कुछ हिस्सा रसड़ा और कुछ हिस्सा बेल्थरारोड विधानसभा में चला गया। इसके बाद पार्टी में हाशिए पर आए पूर्व विधायक काफी दिनों से अपने लिए राजनीतिक जमीन तलाश रहे थे। इसी कारण वह अक्सर भाजपा सरकार पर निशाना साधते रहे। उनके बयानों से यह अटकलें लगाई जाने लगी थीं कि वह जल्द ही सपा में शामिल हो सकते हैं। साथ ही वह विधानसभा चुनाव लड़ने की भी तैयारी कर रहे हैं। सोमवार को उनके सपा में शामिल होने की जानकारी सपा ने ट्वीट कर दी।
बीएचयू से शुरू की थी छात्र राजनीति
रामइकबाल सिंह ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से छात्र राजनीति शुरू की थी। 1993 में वे भाजपा से जुड़ गए। रसड़ा थाना क्षेत्र के मुड़ेरा निवासी रामइकबाल सिंह वर्ष 2002 में विधायक रहे। 2007 में चिलकहर क्षेत्र से सपा प्रत्याशी सनातन पांडेय से चुनाव हार गए थे। वर्ष 2009 में घोसी से लोकसभा का चुनाव लड़ें और पराजय का सामना करना पड़ा। नए परिसीमन के बाद 2012 में उन्होंने रसड़ा से चुनाव लड़ा, पर बसपा प्रत्याशी के हाथों उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2014 में सलेमपुर लोस से भाजपा के टिकट के दावेदार थे, लेकिन टिकट नहीं मिला। 2017 के विस चुनाव में राम इकबाल सदर विधानसभा क्षेत्र से टिकट मांग रहे थे लेकिन पार्टी ने उन्हें पुन: रसड़ा से लड़ने के लिए भेज दिया। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद राम इकबाल सिंह खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे थे।
विज्ञापन
--
विज्ञापन
वर्ष 2002 में रामइकबाल सिंह चिलकहर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। बाद में यह सीट परिसीमन में खत्म हो गई। इसका कुछ हिस्सा रसड़ा और कुछ हिस्सा बेल्थरारोड विधानसभा में चला गया। इसके बाद पार्टी में हाशिए पर आए पूर्व विधायक काफी दिनों से अपने लिए राजनीतिक जमीन तलाश रहे थे। इसी कारण वह अक्सर भाजपा सरकार पर निशाना साधते रहे। उनके बयानों से यह अटकलें लगाई जाने लगी थीं कि वह जल्द ही सपा में शामिल हो सकते हैं। साथ ही वह विधानसभा चुनाव लड़ने की भी तैयारी कर रहे हैं। सोमवार को उनके सपा में शामिल होने की जानकारी सपा ने ट्वीट कर दी।
विज्ञापन
बीएचयू से शुरू की थी छात्र राजनीति
रामइकबाल सिंह ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से छात्र राजनीति शुरू की थी। 1993 में वे भाजपा से जुड़ गए। रसड़ा थाना क्षेत्र के मुड़ेरा निवासी रामइकबाल सिंह वर्ष 2002 में विधायक रहे। 2007 में चिलकहर क्षेत्र से सपा प्रत्याशी सनातन पांडेय से चुनाव हार गए थे। वर्ष 2009 में घोसी से लोकसभा का चुनाव लड़ें और पराजय का सामना करना पड़ा। नए परिसीमन के बाद 2012 में उन्होंने रसड़ा से चुनाव लड़ा, पर बसपा प्रत्याशी के हाथों उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2014 में सलेमपुर लोस से भाजपा के टिकट के दावेदार थे, लेकिन टिकट नहीं मिला। 2017 के विस चुनाव में राम इकबाल सदर विधानसभा क्षेत्र से टिकट मांग रहे थे लेकिन पार्टी ने उन्हें पुन: रसड़ा से लड़ने के लिए भेज दिया। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद राम इकबाल सिंह खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे थे।
विज्ञापन
--