राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने किया वेबसाइट का उद्घाटन, बोलीं-नई शिक्षा नीति से आत्मनिर्भर बनेगा भारत
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राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि नई शिक्षा नीति से भारतीय ज्ञान-शक्ति के सहारे आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार होगा। ‘लिविंग लिजेंड्स ऑफ बलिया’ फोरम के माध्यम से जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय ने देश-विदेश में रहकर विभिन्न क्षेत्रों में अपना विशिष्ट योगदान दे रहे बलिया की उन विभूतियों को फिर से मिट्टी से जोड़ने की अनूठी पहल की है।
वे विश्वविद्यालय द्वारा मंगलवार को आयोजित ‘वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य एवं जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय की भूमिका: चुनौतियां एवं संभावनाएं’ विषयक वर्चुअल संगोष्ठी में बोल रही थीं। इस मौके पर उन्होंने वेबसाइट का उद्घाटन राजभवन से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से किया।
राज्यपाल ने कहा कि इस फोरम के माध्यम से विश्वविद्यालय बलिया की विभूतियों को अपनी मिट्टी से जुड़ने तथा मधुर स्मृतियों को संजोने का न सिर्फ अवसर प्रदान करेगा, बल्कि मातृभूमि के ऋण से उत्तीर्ण होने का अवसर भी देगा।
यह विश्वविद्यालय बलिया के जिस महान विभूति चंद्रशेखर के नाम पर स्थापित है, उनके पद चिह्नों पर चलकर हम कार्य करें और शीर्ष पर पहुंचे। बलिया की धरती अत्यंत उर्वर है, जिसने तमाम ऋषि-मुनियों से लेकर स्वाधीनता सेनानियों, साहित्यकारों, विद्वानों, बुद्धिजीवियों और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं तक को जन्म दिया है।
स्वास्थ्य एवं शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को स्वास्थ्य एवं शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके लिए विवि समय-समय पर ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं का सर्वेक्षण करें और स्वास्थ्य शिविर लगाएं और जागरूकता अभियान चलाएं। नई शिक्षा नीति स्वदेशी ज्ञान और तकनीक के आधार पर नए भारत को शक्तिशाली बनाने में सहायक होगी।
शिक्षा को भारतीय जनजीवन और सामाजिक व सांस्कृतिक चेतना से जोड़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति से भारतीय ज्ञान-शक्ति के सहारे आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार होगा। इस मौके पर जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कल्पलता पांडेय एवं विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारीगण आनलाइन जुड़े थे।
बलिया में मत्स्य उत्पादन की व्यापक संभावनाएं
राज्यपाल ने कहा कि बलिया जनपद प्राकृतिक जल स्रोतों से अत्यंत समृद्ध है और यहां मत्स्य उत्पादन की व्यापक संभावनाएं भी हैं। इसके लिए सम्यक प्रशिक्षण और वैज्ञानिक तरीकों का प्रयोग करते हुए मत्स्य उत्पादन में भारी वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अध्ययन एवं शोध को बढ़ावा दिया जाए तो यहां के किसानों की समृद्धि के दरवाजे खुल सकते हैं। परंपरागत कृषि की जगह नवाचारी कृषि का प्रयोग यहां के किसानों का जीवन स्तर बदल सकता है।
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय ने अपने छोटे से काल में ही कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं, जो प्रशंसनीय हैं। सीमित संसाधनों और कोरोना से उत्पन्न कठिन परिस्थितियों के बावजूद विश्वविद्यालय ने निर्धारित समय सीमा के अंदर नकलविहीन परीक्षा कराई। समय से परीक्षाफल घोषित किया। कुछ पाठ्यक्रमों में सबसे पहले परीक्षाफल घोषित करके इस विश्वविद्यालय ने प्रदेशभर के विश्वविद्यालय के समक्ष एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।