बलियाः विद्यालय में छात्राओं से रोटी बनवाने का वीडियो वायरल, स्कूल में तैनात रसोइये हैं बुजुर्ग
वायरल वीडियो में विद्यालय में करीब चार छात्राओं से रोटियां बनवाई जा रही हैं। रोटी बनाने वाली चारों छात्राएं स्कूली ड्रेस में नजर आ रही हैं।
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बलिया जिले के सीयर विकास खंड के समसुद्दीनपुर गांव स्थित कंपोजिट विद्यालय में छात्राओं से रोटियां बनवाई जा रहीं हैं। रोटी बनवाने का वीडियो मंगलवार को वायरल हुआ, तो शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। यह मामला सोमवार का बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में विद्यालय में करीब चार छात्राओं से रोटियां बनवाई जा रही हैं।
रोटी बनाने वाली चारों छात्राएं स्कूली ड्रेस में नजर आ रही हैं। स्कूल में सोमवार को लंच के समय चावल खत्म हो गया था और मिड-डे मील के तहत बच्चों को भोजन करवाना था। स्कूल में तैनात छह रसोइयों में पांच बुजुर्ग हैं। इसके कारण छात्राओं को ही रोटियां बनाने में लगा दिया गया। इसी बीच गांव के युवकों ने इसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया।
गांव के प्रधान प्रतिनिधि अशोक यादव ने बताया कि स्कूल पर कहने के लिए छह रसोइया हैं। इसमें एक का निधन हो चुका है, जबकि अन्य सभी 60 वर्ष से अधिक उम्र की हैं। यहां अक्सर छात्र-छात्राओं से ही खाना बनवाया जाता है। वायरल वीडियो के संबंध में पूछे जाने पर बीएसए (बलिया) शिव नारायन सिंह ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं है। जैसे ही मामला संज्ञान में आएगा, जांच कराकर संबधितों के खिलाफ कड़ी कारवाई की जाएगी।
खेल की विरासत नहीं संभाल पा रहे बलिया के माध्यमिक विद्यालय
माध्यमिक स्कूलों के खेल मैदान उबड़-खाबड़ जमीन में तब्दील हो गए हैं। हालात यह हैं कि इन मैदानों पर छात्रों को खेलना तो दूर की बात, वे पैदल भी नहीं चल सकते हैं। प्रश्न यह है कि ऐसे में खेल प्रतिभाएं कैसे निखरेंगी, संसाधन होने का दावा स्कूलों के जिम्मेदार तो करते हैं, लेकिन धरातल पर ऐसा नहीं दिखता है।
हाल ही में राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया गया। खेल संगठनों एवं इससे जुड़े लोगों ने बड़ी-बड़ी बातें की गईं। लेकिन स्कूलों के माध्यम से खेलों के विकास की पहल की आस आज भी आधी अधूरी है। गौर करें तो हाईस्कूल व इंटर स्तर पर प्रति वर्ष हर छात्र से 60-60 रुपये क्रीड़ा शुल्क के नाम पर लिया जाता है।
इसमें से तीन माह का क्रीड़ा शुल्क डीआईओएस कार्यालय में खेल के विकास के नाम पर जमा करा लिया जाता है। जबकि हकीकत यह है कि माध्यमिक स्तर पर खेलों की दशा और दिशा बेहद खराब हैं।