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एक माह में नदी में समा चुकी 120 बीघा भूमि
बलिया ब्यूरो
Updated Wed, 30 Aug 2017 10:44 PM IST
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बाढ़ की वजह कट रही मिट्टी, निरीक्षण करते अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
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विकास खण्ड मुरली छपरा क्षेत्र के चांददीयर पंचायत से लगायत इब्राहिमाबाद नौबरार अठगावां तक करीब पांच किलोमीटर की दूरी में महीनों से घाघरा नदी द्वारा कटान किया जा रहा है। एक तरफ बंधे को बचाने के नाम पर बाढ़ विभाग द्वारा कटानरोधी कार्य करीब एक महीने से कराया जा रहा है तो वहीं किसानों की कृषि योग्य भूमि को बचाने के नाम पर कुछ भी नहीं किया जा रहा है।
इस वर्ष मात्र एक पंचायत चाददीयर के किसानों की करीब तीस हेक्टेयर (करीब 120 बीघा) कृषि योग्य भूमि को घाघरा ने अपने आगोश में ले लिया, लेकिन शासन प्रशासन का कोई नुमाइंदा आज तक इन किसानों का सुधि लेना मुनासिब नहीं समझा। इसमें ऐसे बहुत किसान हैं जिनकी पूरी गृहस्थी खेती पर ही निर्भर है।
चांददीयर पंचायत किसान प्रभुनाथ, राजकुमार, रामकुमार, बहोरन, फौजदार,जगत,रामजी, लालपरिखा, श्यामबिहारी, गौरीशंकर, राशबिहारी, बब्बन, इंद्रदेव, धर्मदेव, रामचन्द्र, केदारनाथ, सच्चिदानंद, परशुराम, राजेन्द्र, राजकुमार, रमाकान्त, श्रीकांत, ओमप्रकाश, जयप्रकाश, आनन्द कुमार, उमाशंकर शिवबचन, देवनसागर, श्रीराम ,श्रीनिवास ,जमीदार ,सरल ,असलोक, भगेलू का काफी खेत घाघरा में विलीन हो चुका है। किसानों का कहना है कि घाघरा द्वारा किए गए कटान में समाहित हुई भूमि के लिए सरकार द्वारा आज तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया।
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इस संबंध में क्षेत्रीय लेखपाल मोती लाल ने बताया कि शासन द्वारा आज तक कटान के जद में विलीन हुई भूमि के लिए कोई मुआवजा नहीं आया, बल्कि जिस भूमि में कोई फसल बोई गई होती है उस दौरान यदि कटान के जद में वह भूमि जाती है तो उन किसानों के लिए शासन द्वारा लघु व सीमांत के अनुसार फसल क्षति का मानक तैयार कर उन्हें फसल क्षति पूर्ति की धनराशि दी जाती है।
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इस वर्ष मात्र एक पंचायत चाददीयर के किसानों की करीब तीस हेक्टेयर (करीब 120 बीघा) कृषि योग्य भूमि को घाघरा ने अपने आगोश में ले लिया, लेकिन शासन प्रशासन का कोई नुमाइंदा आज तक इन किसानों का सुधि लेना मुनासिब नहीं समझा। इसमें ऐसे बहुत किसान हैं जिनकी पूरी गृहस्थी खेती पर ही निर्भर है।
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चांददीयर पंचायत किसान प्रभुनाथ, राजकुमार, रामकुमार, बहोरन, फौजदार,जगत,रामजी, लालपरिखा, श्यामबिहारी, गौरीशंकर, राशबिहारी, बब्बन, इंद्रदेव, धर्मदेव, रामचन्द्र, केदारनाथ, सच्चिदानंद, परशुराम, राजेन्द्र, राजकुमार, रमाकान्त, श्रीकांत, ओमप्रकाश, जयप्रकाश, आनन्द कुमार, उमाशंकर शिवबचन, देवनसागर, श्रीराम ,श्रीनिवास ,जमीदार ,सरल ,असलोक, भगेलू का काफी खेत घाघरा में विलीन हो चुका है। किसानों का कहना है कि घाघरा द्वारा किए गए कटान में समाहित हुई भूमि के लिए सरकार द्वारा आज तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया।
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इस संबंध में क्षेत्रीय लेखपाल मोती लाल ने बताया कि शासन द्वारा आज तक कटान के जद में विलीन हुई भूमि के लिए कोई मुआवजा नहीं आया, बल्कि जिस भूमि में कोई फसल बोई गई होती है उस दौरान यदि कटान के जद में वह भूमि जाती है तो उन किसानों के लिए शासन द्वारा लघु व सीमांत के अनुसार फसल क्षति का मानक तैयार कर उन्हें फसल क्षति पूर्ति की धनराशि दी जाती है।