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गंगा का जलस्तर लगातार कम, सरयू में बढ़ाव जारी
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बलिया। करीब एक सप्ताह में तबाही मचाने के बाद गंगा के जलस्तर में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। वहीं, सरयू के जलस्तर में हल्का बढ़ाव जारी है। सरयू का जलस्तर अभी खतरा बिंदु 39 सेमी अधिक है। गंगा के जलस्तर में कमी से तटवर्ती ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। लेकिन कटान तेज होने की आशंका तेज हो गई है। उधर, कई इलाकों के निचले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति है। बताया जाता है कि जलस्तर कम होने के बावजूद यह पानी नहीं निकलता। जलभराव के चलते पानी से दुर्गंध उठनी शुरू हो गई है। हैरानी की बात है कि अब तक किसी भी बाढ़ प्रभावित इलाके में छिड़काव आदि का कार्य शुरू नहीं कराया जा सका है। इसको लेकर लोगों में आक्रोश है। खतरा बिंदु से 39 सेमी ऊपर बह रही है। नदी का जलस्तर 64.40 मीटर दर्ज किया गया है। डीएसपी हेड पर खतरा बिंदु 64.01 मीटर है। जबकि अभी भी धीमी गति से बढ़ाव जारी है।
रिवेटमेंट को दुरुस्त करने में जुटा विभाग, ग्रामीणों ने लगाए आरोप
रामगढ़। गंगा किनारे सोनार टोला व बनिया टोला के पास 3.5 करोड़ की लागत से बना रिवेटमेंट का कार्य मंगलवार की शाम सोहरा कटान की भेंट चढ़ गया। इसके बाद बाढ़ विभाग इस आपदा को अवसर में बदलने के लिए जुट गया। इसे दुरुस्त करने के लिए दर्जनों मजदूर लगाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ विभाग कटान रोधी परियोजनाओं के कार्यों को गंभीरता से लिया होता और मानक के अनुरूप कार्य कराया होता तो शायद आज यह नौबत नहीं आती। बुधवार को बाढ़ विभाग व ठेकेदार कटे हुए सुरक्षा दीवार के बाद बंबू क्रेट विधि का प्रयोग कर बाढ़ कटान रोकने का असफल प्रयास करते नजर आए। गंगा की उतरती लहरों में जो भी मिट्टी से भरी बोरी बंबू क्रेट में डाली जा रही थी उसका कहीं अता पता नहीं चल पा रहा था। लेकिन विभाग इसे ही सही मान कार्य कराने में जुटा है।
गंगा का जलस्तर कम होने के बावजूद दुश्वारियां, सड़ांध से लोग परेशान
लालगंज। गंगा का पानी तो नदी के पेटे में वापस चला गया है पर डूब क्षेत्रों के लोगों के लिए मुसीबतें भी छोड़ गया है। फसल सड़न से जहां डूब क्षेत्र के गांवों में दुर्गंध शुरू हो गई है वहीं सड़क व रास्ते को गंगा के पानी के बहाव ने काटकर बेजान कर दिया है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के द्वारा कहीं ब्लीचिंग पाउडर आदि का छिड़काव नहीं कराया जा रहा जिससे संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ गया है। क्षेत्र के सेमरिया ढाले से शिवपुर घाट, हृदयपुर ढाले से सती घाट, नरदरा गांव से जगदीशपुर, कोडरहा ढाला से कोडरहा गांव जाने वाले रास्ते को नदी की धारा ने क्षतिग्रस्त कर दिया है जिससे लोगो को आने जाने में परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। क्षेत्र के छह पंचायते बाढ़ विभीषिका से जूझ रही थी और इन पंचायतो के बाढ़ पीड़ितों को केवल नाव की व्यवस्था को छोड़ दिया जाय तो कहीं भी कोई सहायता नहीं नहीं पहुचाई गई है। ग्राम प्रधानों ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों की सूची तहसील प्रशासन को उपलब्ध करा दी गई है पर अभी तक कोई सामग्री पीड़ितों को नहीं बांटी गई है। इस बाबत चिकित्सा प्रभारी देवनीति सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सम्बन्धी क्लोरीन आदि दवाओं का वितरण जारी है, छिड़काव का जिम्मा ग्राम स्वच्छता समिति का है।
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रिवेटमेंट को दुरुस्त करने में जुटा विभाग, ग्रामीणों ने लगाए आरोप
रामगढ़। गंगा किनारे सोनार टोला व बनिया टोला के पास 3.5 करोड़ की लागत से बना रिवेटमेंट का कार्य मंगलवार की शाम सोहरा कटान की भेंट चढ़ गया। इसके बाद बाढ़ विभाग इस आपदा को अवसर में बदलने के लिए जुट गया। इसे दुरुस्त करने के लिए दर्जनों मजदूर लगाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ विभाग कटान रोधी परियोजनाओं के कार्यों को गंभीरता से लिया होता और मानक के अनुरूप कार्य कराया होता तो शायद आज यह नौबत नहीं आती। बुधवार को बाढ़ विभाग व ठेकेदार कटे हुए सुरक्षा दीवार के बाद बंबू क्रेट विधि का प्रयोग कर बाढ़ कटान रोकने का असफल प्रयास करते नजर आए। गंगा की उतरती लहरों में जो भी मिट्टी से भरी बोरी बंबू क्रेट में डाली जा रही थी उसका कहीं अता पता नहीं चल पा रहा था। लेकिन विभाग इसे ही सही मान कार्य कराने में जुटा है।
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गंगा का जलस्तर कम होने के बावजूद दुश्वारियां, सड़ांध से लोग परेशान
लालगंज। गंगा का पानी तो नदी के पेटे में वापस चला गया है पर डूब क्षेत्रों के लोगों के लिए मुसीबतें भी छोड़ गया है। फसल सड़न से जहां डूब क्षेत्र के गांवों में दुर्गंध शुरू हो गई है वहीं सड़क व रास्ते को गंगा के पानी के बहाव ने काटकर बेजान कर दिया है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के द्वारा कहीं ब्लीचिंग पाउडर आदि का छिड़काव नहीं कराया जा रहा जिससे संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ गया है। क्षेत्र के सेमरिया ढाले से शिवपुर घाट, हृदयपुर ढाले से सती घाट, नरदरा गांव से जगदीशपुर, कोडरहा ढाला से कोडरहा गांव जाने वाले रास्ते को नदी की धारा ने क्षतिग्रस्त कर दिया है जिससे लोगो को आने जाने में परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। क्षेत्र के छह पंचायते बाढ़ विभीषिका से जूझ रही थी और इन पंचायतो के बाढ़ पीड़ितों को केवल नाव की व्यवस्था को छोड़ दिया जाय तो कहीं भी कोई सहायता नहीं नहीं पहुचाई गई है। ग्राम प्रधानों ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों की सूची तहसील प्रशासन को उपलब्ध करा दी गई है पर अभी तक कोई सामग्री पीड़ितों को नहीं बांटी गई है। इस बाबत चिकित्सा प्रभारी देवनीति सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सम्बन्धी क्लोरीन आदि दवाओं का वितरण जारी है, छिड़काव का जिम्मा ग्राम स्वच्छता समिति का है।
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