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निशुल्क बोरिंग में खेल, सीडीओ ने सत्यापन का दिया निर्देश

Sun, 03 Apr 2022 11:30 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 03 Apr 2022 11:30 PM IST
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Games in boring free, CDO instructed for verification
बलिया। दो वर्ष पहले शासन की ओर से अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के 185 किसानों के खेतों में निशुल्क बोरिंग कराने का लक्ष्य तय किया। इसके लिए समाज कल्याण विभाग को 20 लाख की धनराशि मुहैया कराया। लेकिन दो बर्ष बाद भी यह कार्य पूरा नहीं है। बताया जाता है कि इस योजना में खेल किया गया है। मामला संज्ञान में आने पर सीडीओ ने संबंधित एसडीएम को सत्यापन करने का निर्देश दिया है। इसको लेकर विभाग में खलबली मची है।
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जिले में निशुल्क बोरिंग में भी खूब खेल किया गया है। बताया जाता है कि वर्ष 2020-21 में शासन की ओर से जिले के अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए उनके खेतों में निशुल्क बोरिंग करने का प्रावधान किया। शासन की ओर से जिले को कुल 185 अनुसूचित जाति और जनजाति किसानों के निशुल्क बोरिंग का लक्ष्य निर्धारित करते हुए नोडल विभाग समाज कल्याण को जिम्मेदारी दी। शासन की ओर से इस कार्य के लिए कुल 18.50 लाख की धनराशि भी मुहैया कराई गई। लेकिन दो वर्ष बाद भी यह योजना परवान नहीं चढ़ सका है। बताया जाता है कि कुल निर्धारित लक्ष्य 185 के सापेक्ष समाज कल्याण विभाग की ओर से बतौर कार्यदायी संस्था लघु सिंचाई विभाग को 85 और एकीकृत जनजाति सहकारी विकास लिमिटेड को 100 निशुल्क बोरिंग कराने की जिम्मेदारी दी। विभाग की ओर से इसके लिए प्रति निशुल्क बोरिंग 10 हजार की धनराशि भी कार्यदायी संस्थाओं को उपलब्ध करा दी। लघु सिंचाई विभाग की ओर से लक्ष्य को पूरा कर कार्यपूर्ति प्रमाण दिया गया लेकिन एकीकृत जनजाति सहकारी विकास लिमिटेड की ओर से अब तक महज 48 निशुल्क बोरिंग ही कराया गया और 52 निशुल्क बोरिंग की 5.20 लाख की धनराशि दबाए रहा। मामला संज्ञान में आने के बाद जहां नोडल विभाग अब कराए गए नि:शुल्क बोरिंग के सत्यापन में जुटा है। वहीं, सीडीओ ने संबंधित तहसीलों के एसडीएम को सूची भेजते हुए सत्यापन कर रिपोर्ट मांगी है।
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नि:शुल्क बोरिंग की जिम्मेदारी कार्यदायी एजेंसियों को दी गई थी। अब तक कार्य पूरा नहीं कराया गया है। इस बाबत सत्यापन कराया जा रहा है। - प्रवीण वर्मा, सीडीओ, बलिया
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