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Ballia News: कटान रोकने के लिए पैसा पहुंचा खाते में पर काम अब भी रास्ते में

Tue, 14 Apr 2026 10:49 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 14 Apr 2026 10:49 PM IST
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Funds to prevent erosion have been credited to accounts, but the work remains stalled
दूबेछपरा गांव के समीप कटान करते हुए पहुंची गंगा नदी।संवाद
मझौवां। गंगा व सरयू किनारे बसे तटवर्ती इलाकों को कटान से सुरक्षित करने के लिए शासन की तरफ से जिले में 72.17 करोड़ रुपये की 8 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर इन परियोजनाओं की रफ्तार सुस्त है। पहली किस्त के रूप में 10.60 करोड़ रुपये जारी होने के बावजूद अब तक कार्य शुरू न होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
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दूबे छपरा परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है जबकि कि चक्की नौरंगा का प्रोजेक्ट पर री-टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। बाढ़ खंड के एई मोहित गुप्ता का दावा है कि गंगा किनारे बचाव कार्य प्रारंभ कर दिया गया है, लेकिन हकीकत यह है कि कार्य स्थल पर न तो संसाधन दिखाई दे रहे हैं न ही मजदूर। सबसे चिंताजनक स्थिति चक्की नौरंगा की है, जहां 9.98 करोड़ रुपये की परियोजना अभी तक शुरू ही नहीं हो सकी है।
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वहीं नौरंगा व भगवानपुर को सुरक्षित करने के लिए 24.97 करोड़ रुपये की योजना प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त दूबे छपरा में 9.85 करोड़ रुपये से कटानरोधी कार्य करना है। इन परियोजनाओं से लगभग 36 गांवों की 21 हजार से अधिक आबादी को राहत मिलने की उम्मीद है। चक्की नौरंगा में बीते वर्ष गंगा की बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 126 पक्के और 8 कच्चे मकान नदी में समा गए थे।
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नियमानुसार 15 मार्च तक कार्य शुरू होकर 15 जून तक पूरा हो जाना चाहिए, लेकिन तय समय सीमा बीतने के बाद भी काम शुरू नहीं हो पाया है। पिछले वर्ष भी रामगढ़ व हुकुम छपरा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को बचाने के लिए करीब 15 करोड़ रुपये से कार्य मई में शुरू किया गया था, जो गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण अधूरा रह गया। परिणामस्वरूप जुलाई की बाढ़ में चार डैम्पनर और पार्कोपाइप गंगा में बह गए, जिन्हें बाद में कागजों में पूर्ण दिखा दिया गया।
दूबे छपरा प्रोजेक्ट संसाधन व बोल्डर इकट्ठा किया जा रहा है, कार्य तेजी प्रारंभ करते हुए समय से पहले पूर्ण कर ली जाएगी। चक्की नौरंगा परियोजना के लिए री-टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही यह प्रक्रिया पूर्ण होगी, प्रोजेक्ट पर कार्य बिना विलंब के प्रारंभ कर दिया जाएगा। - संजय कुमार मिश्र, एक्सईएन, बाढ़ खंड।

हर साल यही स्थिति रहती है। समय पर काम शुरू नहीं होता। बाढ़ आने पर हम लोग भगवान भरोसे छोड़ दिए जाते हैं। विभाग जानबूझकर देरी करता है। ताकि सरकारी धन का वारा न्यारा किया जा सके। - दीनानाथ तिवारी

अब सिर्फ 60 दिन बचे हैं, उसके बाद गंगा का जलस्तर बढ़ने लगेगा। तब फ्लड फाइटिंग के नाम पर करोड़ों खर्च होंगे, लेकिन तब तक गांव खतरे में आ जाएगा।यहीं कारण है कि आज तक गंगा के कटान से एक भी गांव को नहीं बचाया जा सका। - वीरेंद्र तिवारी


सरकार हर साल पैसा देती है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ। विभाग की लापरवाही से हम लोग हर साल नुकसान झेलते हैं। यहीं वजह है कि गांव के सैकड़ों लोगों का आशियाना नदी में समा जा रहा। - सुमित उपाध्याय
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