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प्रबंधन के लिए धन उपलब्ध फिर भी जला रहे कचरा
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गर के महावीर घाट गंगाजी मार्ग पर नगर का फेंका जाता है कूड़ा।
- फोटो : BALLIA
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बलिया। नगर पालिका को शासन ने कचरे से ढेर से शहर को मुक्ति दिलाने के लिए 15 करोड़ रुपये दिए हैं। कार्यदायी संस्था भी नामित कर दी गई है लेकिन कूड़े के निस्तारण की व्यवस्था नहीं हो पाई है। नगर पालिका इसके लिए जमीन ही नहीं तलाश पा रही है। इसके लिए पहले भी लगभग सात करोड़ रुपये मिले थे, जिसका कोई हिसाब देेने वाला नहीं है।
नगर से निकलने वाले कूड़े को नगर पालिका के कर्मचारी गंगा के महावीर घाट जाने वाली सड़कों के किनारे फेंक देते हैं। कचरे का जब ढेर जमा हो जाता हो तो चुपके से उसमें आग लगा दी जाती है। इससे शहर की आबोहवा खराब होती है लेकिन नगर पालिका के अफसरों को इसकी फिक्र नहीं है। नगर पालिका को कूडा निस्तारण की व्यवस्था करने के लिए 22 करोड़ रुपये सरकार ने आवंटित किए हैं। इसमें हाल के महीनों में आवंटित 15 करोड़ रुपये भी शामिल हैं। इससे कूड़ा निस्तारण केंद्र बनाया जाना है। इसके लिए शासन ने ही मध्य प्रदेश के इंदौर की एक कंपनी से अनुबंध किया है। मगर कूड़ा निस्तारण केंद्र बनाने के लिए जमीन नहीं मिलने के कारण काम आगे नहीं बढ़ पाया है। नगर के 25 वार्डों से हर दिन करीब 40 टन से अधिक कूड़ा निकलता है, जिसे विभिन्न वाहनों से एकत्र कर शहर से बाहर महावीर घाट में सड़कों के किनारे गिरा दिया जाता है।
वर्ष 2006 में नगर से बसंतपुर गांव कचरा निस्तारण केंद्र की अधारशिला रखी गई। इसके निर्माण का जिम्मा सीएनडीएस को सौंपा गया था, जिसने ए टू जेड कंपनी को ठेका दिया था। ए टू जेड ने एकार्ड कंपनी को पार्टनर बनाया लेकिन दोनों कंपनियों में विवाद के बाद मामला ट्रिब्यूनल में चला गया और काम ठप हो गया।
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कूड़ा कुप्रबंधन दूषित हो रही हवा
25 वार्डों की सफाई के लिए करीब 438 सफाईकर्मियों की तैनाती है। इनमें संविदा, नियमित व आउटसोर्सिंग सफाईकर्मी शामिल हैं। इन पर प्रति महीने करीब 50 से 55 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके बावजूद कूड़ा कुप्रबंधन के चलते नगर की हवा प्रदूषित होने का अंदेशा बना हुआ है। इसमें गीला, सूखा के साथ पॉलिथीन समेत अन्य सामान के पैकेटों के रैपर आदि होते हैं। इसके लिए नगर पालिका प्रशासन ने 15 छोटे वाहन व आठ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की व्यवस्था है।
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नगर से निकलने वाले कूड़े को नगर पालिका के कर्मचारी गंगा के महावीर घाट जाने वाली सड़कों के किनारे फेंक देते हैं। कचरे का जब ढेर जमा हो जाता हो तो चुपके से उसमें आग लगा दी जाती है। इससे शहर की आबोहवा खराब होती है लेकिन नगर पालिका के अफसरों को इसकी फिक्र नहीं है। नगर पालिका को कूडा निस्तारण की व्यवस्था करने के लिए 22 करोड़ रुपये सरकार ने आवंटित किए हैं। इसमें हाल के महीनों में आवंटित 15 करोड़ रुपये भी शामिल हैं। इससे कूड़ा निस्तारण केंद्र बनाया जाना है। इसके लिए शासन ने ही मध्य प्रदेश के इंदौर की एक कंपनी से अनुबंध किया है। मगर कूड़ा निस्तारण केंद्र बनाने के लिए जमीन नहीं मिलने के कारण काम आगे नहीं बढ़ पाया है। नगर के 25 वार्डों से हर दिन करीब 40 टन से अधिक कूड़ा निकलता है, जिसे विभिन्न वाहनों से एकत्र कर शहर से बाहर महावीर घाट में सड़कों के किनारे गिरा दिया जाता है।
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वर्ष 2006 में नगर से बसंतपुर गांव कचरा निस्तारण केंद्र की अधारशिला रखी गई। इसके निर्माण का जिम्मा सीएनडीएस को सौंपा गया था, जिसने ए टू जेड कंपनी को ठेका दिया था। ए टू जेड ने एकार्ड कंपनी को पार्टनर बनाया लेकिन दोनों कंपनियों में विवाद के बाद मामला ट्रिब्यूनल में चला गया और काम ठप हो गया।
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कूड़ा कुप्रबंधन दूषित हो रही हवा
25 वार्डों की सफाई के लिए करीब 438 सफाईकर्मियों की तैनाती है। इनमें संविदा, नियमित व आउटसोर्सिंग सफाईकर्मी शामिल हैं। इन पर प्रति महीने करीब 50 से 55 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके बावजूद कूड़ा कुप्रबंधन के चलते नगर की हवा प्रदूषित होने का अंदेशा बना हुआ है। इसमें गीला, सूखा के साथ पॉलिथीन समेत अन्य सामान के पैकेटों के रैपर आदि होते हैं। इसके लिए नगर पालिका प्रशासन ने 15 छोटे वाहन व आठ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की व्यवस्था है।