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एक माह में चार बार बारिश से किसानों की बढ़ी मुश्किलें

Sat, 02 May 2020 04:21 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 02 May 2020 04:21 PM IST
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Four times a month, farmers have increased difficulties due to rain
बलिया। चैत-वैशाख का महीना खेती किसानी के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। इन महीनों में एक ओर जहां रबी के फसलों की कटाई होती है वहीं, दूसरी ओर काटी गई फसलों की मड़ाई भी होती है। इन महीनों में खासकर पछुवा हवा चलने और मौसम साफ होने से किसानों को राहत रहती है और किसान कटाई व मड़ाई का काम तेजी से करते हैं। लेकिन बीते एक माह में चार बार हुई बारिश ने किसानों के सामने संकट खड़ा कर दिया है। आलम यह है कि एक बारिश का पानी जब तक सूखता है तब तक दूूसरी बारिश हो जा रही है। शुक्रवार को हुई बारिश के बाद से ही खेतों में कटाई व खलिहानों में मड़ाई का काम ठप हो गया है। इसके अलावा गेहूं, सरसो, अरहर, चना, मसूर आदि के दाने भी खराब होने की संभावना है। दया छपरा। वैशाख माह में रुक रुक कर लगभग हर सप्ताह हुई बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। हालांकि बहुतेरे किसान मौसम की नजाकत को देखते हुए पुरानी परंपरा अपनाते हुए वैशाखी संक्रांति के पहले मड़ाई का कार्य कर लिए। लेकिन करीब 40 फीसदी किसानों के मड़ाई का काम नहीं हो सका है। आलम यह है कि बारिश के बाद किसान मड़ाई के लिए गेहूं के बोझ को खोलकर सूखाते हैं तब तक बारिश एक बार फिर भींगो देता है। दया छपरा के किसान दीनानाथ वर्मा का कहना है कि अब तो बोझ के नीचे दीमक लगने शुरू हो गए हैं। गेहूं को बचाने के लिए रोज बोझ को इधर उधर पलटना पड़ रहा है। पांडेयपुर के किसान ओमप्रकाश मिश्र ने कहा कि आए दिन हो रही बारिश से काफी नुकसान हुआ है। रोज बोझ पलटना पड़ रहा है। अगर फिर बारिश हुई तो गेहूं के दाने पूरी तरह चौपट हो सकते हैं। बांसडीहरोड। पिछले एक सप्ताह से आसमान में बादल मंडरा रहे हैं। आए दिन कभी हल्की कभी तेज बारिश होने से खेतों में खड़ी गेहूं फसल की कटाई के साथ ही खलिहानों में मड़ाई का काम प्रभावित है। शेर गांव निवासी किसान भरत सिंह ने बताया कि खेतों में मड़ाई के लिए रखे बोझ व भूसे भींग जाने के कारण पड़े हुए हैं। मौसम के रंग को देखते हुए तमाम किसान फसलों की कटाई के लिए कंबाइन खोज रहे हैं लेकनि नहीं मिल रही हैं। किसान मिथिलेश सिंह ने बताया कि बोहा ताल के करीब 10 फीसदी किसानों के गेंहू की मड़ाई नहीं हो पाई है। बताया कि गेहूं के बोझ बारिश से भींग गए हैं। बारिश के कारण प्याज की खेती भी चौपट हो गई है। बैरिया। एक माह में चौथी बार आंधी व बारिश ने मक्के की फसल को तहस नहस कर दिया है। इसके अलावा गेंहू के बोझ खेतों में भींग गए हैं। दुर्जनपुर निवासी सुधांशु तिवारी ने कहा कि एक तरफ लॉकडाउन तो दूसरी तरफ प्रकृति ने हमें कहीं का नहीं छोड़ा। श्रीकांतपुर निवासी अमरजीत गुप्ता ने कहा कि गेंहू का बोझ चार बार भीगने से गेहूं के दाने भी खराब होने लगे हैं। इसके चलते मड़ाई के बाद इस गेहूूं को जल्दी क्रय केंद्र वाले भी नहीं खरीदेंगे। खराब हो गया है,अब गेंहू के दाने काला हो गया है जिससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है।
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