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सामान्य ट्रेनों का परिचालन नहीं होने से किसान परेशान
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बैरिया। कोरोना संक्रमण के चलते पिछले एक वर्ष से सामान्य यात्री ट्रेनों का परिचालन रोकने व कुछ महीनों से उनके स्थान पर स्पेशल ट्रेनों के चलाने से यहां के किसान परेशान हैं। क्योंकि वह अपना उत्पादन स्पेशल ट्रेनों में लादकर दूसरे शहरों में नहीं भेज पा रहे हैं। कोरोना काल में संचालित सभी ट्रेनें स्पेशल के नाम पर चल रही है। इसमें बिना आरक्षण कोई सफर नहीं कर सकता है। ऐसे में किसान अपना उत्पादन यहीं की मंडियों में औने पौने दाम में बेचने को मजबूर हैं।
क्षेत्र में मटर, लाल मिर्च, हरी मिर्च व अन्य सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर होती है। यहां से किसान खासकर बलिया-सियालदह ट्रेन में लादकर बंगाल व झारखंड ले जाते थे। अब स्पेशल ट्रेनों के चलते वह अपना उत्पादन लेकर इन ट्रेनों से नहीं जा पा रहे हैं। इसी तरह से दूध, दही उत्पादक पशुपालक भी अपना दूध दही ट्रेनों में लादकर दूसरे शहर में नहीं ले जा पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें अपने उत्पादों का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसानों का कहना है कि कोरोना का संक्रमण लगभग थम गया है। ऐसे में सरकार को सामान्य ट्रेनों का परिचालन शुरू कराना चाहिए जिससे अपना उत्पाद इन ट्रेनों में लादकर किसान एक शहर से दूसरे शहर ले जाकर बेच सकें। त्रिलोकी वर्मा ने बताया कि पैसेंजर ट्रेनों के न चलने से हम किसानों का नुकसान हो रहा है। ट्रेनों के चलने से खासकर सब्जियों को जिला मुख्यालय व छपरा पहुंचाना आसान था। अमरजीत प्रसाद ने बताया कि दलछपरा हाल्ट रेलवे स्टेशन से ही अधिकांश किसान हरी सब्जियों को लेकर जिला मुख्यालय जाते थे और थोक भाव में बेचकर वापस आते थे। लेकिन अब औने पौने दामों में बेचना पड़ रहा है। वहीं, किसान अजय सिंह ने बताया कि जब पैसेंजर ट्रेनों का संचालन होता था तब सब्जी व्यापारी बिहार के छपरा से सुरेमनपुर आते थे और किसानों का उत्पाद खरीदकर ले जाते थे। ट्रेनों के नहीं चलने अब वह व्यापारी नहीं आ रहे हैं। किसान धनंजय सिंह ने बताया कि पैसेंजर ट्रेनों के न चलने से इस क्षेत्र के किसानों का काफी नुकसान हो रहा है। किसानों का उत्पाद बाहर नहीं जाने के कारण अच्छा मूल्य नहीं मिल रहा है।
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क्षेत्र में मटर, लाल मिर्च, हरी मिर्च व अन्य सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर होती है। यहां से किसान खासकर बलिया-सियालदह ट्रेन में लादकर बंगाल व झारखंड ले जाते थे। अब स्पेशल ट्रेनों के चलते वह अपना उत्पादन लेकर इन ट्रेनों से नहीं जा पा रहे हैं। इसी तरह से दूध, दही उत्पादक पशुपालक भी अपना दूध दही ट्रेनों में लादकर दूसरे शहर में नहीं ले जा पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें अपने उत्पादों का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसानों का कहना है कि कोरोना का संक्रमण लगभग थम गया है। ऐसे में सरकार को सामान्य ट्रेनों का परिचालन शुरू कराना चाहिए जिससे अपना उत्पाद इन ट्रेनों में लादकर किसान एक शहर से दूसरे शहर ले जाकर बेच सकें। त्रिलोकी वर्मा ने बताया कि पैसेंजर ट्रेनों के न चलने से हम किसानों का नुकसान हो रहा है। ट्रेनों के चलने से खासकर सब्जियों को जिला मुख्यालय व छपरा पहुंचाना आसान था। अमरजीत प्रसाद ने बताया कि दलछपरा हाल्ट रेलवे स्टेशन से ही अधिकांश किसान हरी सब्जियों को लेकर जिला मुख्यालय जाते थे और थोक भाव में बेचकर वापस आते थे। लेकिन अब औने पौने दामों में बेचना पड़ रहा है। वहीं, किसान अजय सिंह ने बताया कि जब पैसेंजर ट्रेनों का संचालन होता था तब सब्जी व्यापारी बिहार के छपरा से सुरेमनपुर आते थे और किसानों का उत्पाद खरीदकर ले जाते थे। ट्रेनों के नहीं चलने अब वह व्यापारी नहीं आ रहे हैं। किसान धनंजय सिंह ने बताया कि पैसेंजर ट्रेनों के न चलने से इस क्षेत्र के किसानों का काफी नुकसान हो रहा है। किसानों का उत्पाद बाहर नहीं जाने के कारण अच्छा मूल्य नहीं मिल रहा है।
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