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पार्थिव शरीर देख नम हुई आंखें
ballia
Updated Sun, 18 Mar 2018 11:01 PM IST
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जवान की आखिरी विदाई
- फोटो : अमर उजाला
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सेना की पुणे की बटालियन में तैनात अंजोरपुर निवासी जय प्रकाश यादव का पार्थिव शरीर रविवार की दोपहर जैसे ही पैतृक गांव पहुंचा, हजारों की भीड़ उसके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़ी। रस्म अदायगी के लिए फौज और पुलिस को भीड़ हटाने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।
थाना क्षेत्र के अंजोरपुर निवासी बब्बन यादव के छोटे पुत्र जय प्रकाश यादव 2014 में सेना में भर्ती हुए थे। वह वर्तमान में वह पुणे में सप्लाई कोर में तैनात थे। शुक्रवार की देर शाम खबर मिली कि ड्यूटी के दौरान छत से गिरकर घायल हो गए हैं। शनिवार को बटालियन से फोन आया कि उनका निधन हो गया है। यह सुन परिवार में कोहराम मच गया। रविवार को उनके बटालियन के सूबेदार मेजर चंद्रशेखर पांडेय तिरंगा में लिपटा हुआ पार्थिव शरीर लेकर उनके पैतृतक गांव में आए, जहां बनारसी रेजिमेंट के जवानों ने अंतिम विदाई दी।
अंजोरपुर के गंगा घाट पर जब बब्बन यादव ने अपने जवान और अविवाहित पुत्र को मुखाग्नि दी तो बंधे पर खड़ी हजारों की भीड़ की आंखें नम हो गई। वहीं छोटी बहन तराना व मां विमला देवी का रोते-रोते बुराहाल था। अंतिम विदाई देने के लिए पूरा दियरांचल उमड़ पड़ा था। हर कोई उसकी एक झलक पाने के लिए बेताब था। तीन दिन से तीन ग्राम पंचायतों ( कोट, अंजोरपुर व मझरिया) के लोग सिर्फ उसके आने की इंतजार कर रहे थे। जैैसे ही उसका पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचा वैसे ही भारत माता की जय के गगनभेदी नारे गूंजने लगे।
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थाना क्षेत्र के अंजोरपुर निवासी बब्बन यादव के छोटे पुत्र जय प्रकाश यादव 2014 में सेना में भर्ती हुए थे। वह वर्तमान में वह पुणे में सप्लाई कोर में तैनात थे। शुक्रवार की देर शाम खबर मिली कि ड्यूटी के दौरान छत से गिरकर घायल हो गए हैं। शनिवार को बटालियन से फोन आया कि उनका निधन हो गया है। यह सुन परिवार में कोहराम मच गया। रविवार को उनके बटालियन के सूबेदार मेजर चंद्रशेखर पांडेय तिरंगा में लिपटा हुआ पार्थिव शरीर लेकर उनके पैतृतक गांव में आए, जहां बनारसी रेजिमेंट के जवानों ने अंतिम विदाई दी।
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अंजोरपुर के गंगा घाट पर जब बब्बन यादव ने अपने जवान और अविवाहित पुत्र को मुखाग्नि दी तो बंधे पर खड़ी हजारों की भीड़ की आंखें नम हो गई। वहीं छोटी बहन तराना व मां विमला देवी का रोते-रोते बुराहाल था। अंतिम विदाई देने के लिए पूरा दियरांचल उमड़ पड़ा था। हर कोई उसकी एक झलक पाने के लिए बेताब था। तीन दिन से तीन ग्राम पंचायतों ( कोट, अंजोरपुर व मझरिया) के लोग सिर्फ उसके आने की इंतजार कर रहे थे। जैैसे ही उसका पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचा वैसे ही भारत माता की जय के गगनभेदी नारे गूंजने लगे।
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