बलिया। एनएच 31 पर आवाजाही को सुगम बनाने के लिए सड़क के किनारे पटरी का निर्माण कराया गया है। हालांकि वर्तमान में कई जगह तो पटरी का अस्तित्व ही समाप्त हो चुका है। लेकिन इन पटरियों को ही ठेकेदार, कारोबारी, ग्रामीणों की ओर से जगह जगह डंपिंग ग्राउंड बना दिया गया है। कहीं अगल-बगल सड़क निर्माण के लिए ठेकेदार की ओर से बड़ी मात्रा गिट्टी गिराया गया है तो कहीं कारोबारी पटरियों पर ही बालू, गिट्टी आदि रखकर बेच रहे हैं। इसके अलावा विभिन्न गांवों के सामने ग्रामीणों की ओर से पटरियों पर ही उपले आदि रखने का काम किया जा रहा है। इसके चलते आए दिन हादसे भी होते हैं। लेकिन हाईवे की पटरियों को सुरक्षित करने को लेकर कोई कवायद नहीं की जाती।
जिले में कोटवां नारायनपुर से लेकर मांझी तक करीब 75 किमी लंबा एनएच 31 है। इन दिनों एनएच पर गाजीपुर से लेकर मांझी घाट तक 115 किमी की दूूरी में कुल 117 करोड़ की लागत से मरम्मत का कार्य चल रहा है। इसके लिए एनएचएआई की ओर से कार्य को तीन भागों में विभाजित कर तीन एजेंसियों को आवंटित किया है। इस दौरान सड़क किनारे पटरियों का निर्माण भी किया जा रहा है। लेकिन दूसरी ओर पटरियों को ही लोग डंपिंग ग्राउंड बना चुके हैं। जिले में स्थित 75 किमी की दूरी में गांवों के सामने जहां ग्रामीणों की ओर से पटरियों को अतिक्रमित कर उपले, कबाड़ आदि रखने का काम किया जाता है वहीं ग्रामीण इलाकों में सड़कों के निर्माण के लिए गिट्टी आदि को डंप करने का काम किया जाता है। इतना ही नहीं शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक खासकर भवन सामग्रियों के दुकानदार पटरियों ही बालू, गिट्टी आदि डंप कर बेचने का काम करते हैं। कई जगह तो इस कदर गिट्टी आदि रखा गया है कि पटरियों से लेकर सड़क तक फैला हुआ है। एनएच 31 चौड़ी सड़क होने के कारण वाहनों की रफ्तार भी तेज रहती है लेकिन विशेष परिस्थितियों में वाहनों के लिए जगह नहीं मिलता और इसके चलते हादसे भी होते रहते हैं। लेकिन इस पर अंकुश लगाने को लेकर कभी भी कोई कवायद नहीं होती है।