फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ballia News ›   'Do this to us, Sir, only return the old days'

‘हमें ऐसा करो साहेब पुराने दिन ही लौटा दो’

Thu, 26 Oct 2017 01:01 AM IST
ballia
ballia Updated Thu, 26 Oct 2017 01:01 AM IST
विज्ञापन
'Do this to us, Sir, only return the old days'
कविता
नगरा। नगरांचल महोत्सव के तत्वावधान में मंगलवार की रात आयोजित कवि सम्मेलन में देर रात तक कवियों और शायरों ने अपने कलाम से श्रोताओं को बांधे रखा। कवि सम्मेलन में फ़िल्म अभिनेता शाहबाज खान, चर्चित हास्य कलाकार एहसान कुरैशी और इमरान प्रतापगढ़ी श्रोताओं खासकर युवाओं के आकर्षण का केंद्र विंदु बने रहे।
विज्ञापन


कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रधान आयकर आयुक्त इलाहाबाद सुबचन राम एवं विशिष्ट अतिथि आचार्य स्वामी केशवानंद जी सत्य सनातन सेवा आश्रम द्वारिका गुजरात ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित एवं फीता काटकर किया। कार्यक्रम में जहां प्यार, मोहब्बत की बात हुई वहीं हंसी की फब्बारे भी फूटे, देश भक्ति की भी बात हुई। वहीं सियासत पर भी व्यंगबाण छोड़े गए।
विज्ञापन


 कवि सम्मेलन का आग़ाज इलाहाबाद के शायर डॉ असलम इलाहाबादी हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, सब मेरी इंसान, मैं हूं हिंदुस्तान से कर हिंदू मुस्लिम एकता का पैगाम दिया। फैजाबाद से आए फारूक आदिल अपनी रचना मेरा दिल ऐसा तोड़ा है किसी ने, कही का भी न छोड़ा है किसी ने सुनाकर युवाओं से खूब वाहवाही लूटी।
विज्ञापन
विज्ञापन


शायरा समीम कौसर ने अपनी रचना चैन दिन को नहीं ना सकूं रात को, जाने क्या हो गया एक मुलाकात में... सुनाकर रसिक मिजाजों का दिल जीत लिया। उद्घोषक के आवाज पर मंच पर पहुंचे डॉ. श्याम मनोहर सिसोदिया मप्र ने तुमने अपने प्यार का यू बांधा तावीज, लांघ सका न दूसरा इस दिल की दहलिज... अनवर जमाल ने ये जान वतन की है मेरी जान नही है, फिर कोई भी हिन्दू मुसलमान नहीं है से देश की एकता अखंडता का पैगाम दिया।

मंच पर पहुंची कवयित्री चांदनी पांडेय ने बुलंदियों का नया रास्ता बनाते हुए, मैं खुद को देख रही हूं पलक से जाते हुए, मोहब्बतों ने तुम्हारी भी साथ छोड़ दिया, वक्त कितना लगेगा जमीन पर आने के लिए सुनाकर खूब तालियां बटोरी। इसके बाद श्रोताओं के मांग पर मंच पर पहुँचे इमरान प्रतापगढ़ी ने अपने कलाम से श्रोताओं का दिल जीत लिया।

उन्होंने अच्छे दिन पर कटाक्ष करते हुए मोहब्बत भाईचारे के दीवाने दिन ये लौटा दो, ये अच्छे दिन तो अंबानी अडानी को मुबारक हो, हमें ऐसा करो साहेब पुराने दिन ही लौटा दो... सुनाकर दर्शकों के दिल में जगह बनाई।

श्रोताओं के मांग पर इमरान ने तमाम रचनाएं सुनाकर महफ़िल लूट ली। इसके बाद, मंच पर पहुंचे ख्यातिलब्ध हास्य कलाकार एहसान कुरैशी ने अपनी हास्य व्यंग्य से श्रोताओं को हँसा हँसा कर लोट पोट कर दिया।

श्री कुरैशी ने कुकर बोला कढ़ाही से तू तो तवे की काली है, अंदर से भी काली है बाहर से भी काली है।इतना सुनते ही कढ़ाही कुकर से बोली तू अपने गोरे पर इतना क्यो इतराता है, यदि मैं काली हूं तो देख के सिटी क्यों बजाता है सुनाकर खूब ताली बटोरी।

उन्होंने आगे कहा कि मां प्यार से हाथ फेरती है तो बाल आने लगता है, पत्नी हाथ फेरती है तो बाल जाने लगता है सुनाकर खूब महफ़िल लूटी। इसके अलावा, नौशाद फतेहपुरी, मु कैफ मऊवी, अजीज फतेहपुरी, जीनत परवीन, तस्लीम ताबिस लखनऊ ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।


शफीक अहमद एडवोकेट, डॉ. रमाशंकर, रिजवान अहमद, अरविंद नारायण सिंह, अवध विहारी मितवा, मनोज सिंह, अब्दुल्लाह शाह आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता ब्लाक प्रमुख अनिल सिंह एवं संचालन मुख्तार मासूम, राजकुमार यादव ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed