{"_id":"ee3817bf6deeeff36d1ecde7a7a56dc2","slug":"dios-office-picketing-teachers-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"डीआईओएस कार्यालय पर शिक्षकों का धरना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डीआईओएस कार्यालय पर शिक्षकों का धरना
ब्यूरो/अमर उजाला बलिया
Updated Mon, 10 Aug 2015 11:30 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला इकाई ने केंद्रीय नेतृत्व के आह्वान पर सोमवार को डीआईओएस कार्यालय पर धरना किया। मुख्य अतिथि शिक्षक विधायक चेतनारायण सिंह रहे। वक्ताओं ने शिक्षकों की समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद किया।
मुख्य अतिथि ने कहा कि मूल्यांकन बहिष्कार के फलस्वरूप आठ अप्रैल 2015 को मुख्यमंत्री से वार्ता के उपरांत 15 सूत्री मांगों में से जिन चार बिंदुओं पर सहमति बनी थी उसमें केवल उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन दरों में वृद्धि का शासनादेश अभी निर्गत हुआ है।
कहा कि वर्ष 2000 तक नियुक्त तदर्थ अध्यापकों के विनियमितीकीरण पर कैबिनेट की अनुमति हो चुकी है। सहमति के अन्य दो बिंदु जिसमें सीटी ग्रेड से एलटी ग्रेड में संविलियन के फलस्वरूप राजकीय शिक्षकों की भांति वेतन निर्धारण एवं वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय देने संबंधी राजाज्ञा अभी अधर में है।
विज्ञापन
जबकि मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि दो माह में सभी बिंदुओं पर राजाज्ञा जारी कर दिया जाएगा। उन्होंने समूह घ में भर्तियों पर रोक हटाने एवं नई पेंशन योजना समाप्त करने पर सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार की वादाखिलाफी से प्रदेश के सभी शिक्षकों में आक्रोश व्याप्त है।
यदि समय रहते सहमति के सभी बिंदुओं पर राजाज्ञा निर्गत नहीं हुई, तो सात सितंबर से शुरू मंडलीय धरने के बाद संगठन आरपार की लड़ाई के लिए बाध्य होगा। कहा कि नई पेंशन योजना को समाप्त कर पुराने पेंशन योजना को लागू करने के लिए सभी शिक्षक एवं ट्रेड यूनियनों के साथ दो सितंबर को भी आंदोलन में शामिल होंगे।
अंत में प्रदेशीय मांग पत्र से संबंधित ज्ञापन मुख्यमंत्री को एवं जनपदीय समस्याओं से संबंधित ज्ञापन जिलाधिकारी को दिया गया। प्रदेशीय मंत्री नरेंद्र सिंह, विजय बहादुर सिंह, शेषधर मिश्र, राजनाथ सिंह, शैलेश कुमार सिंह, डॉ. राकेश सिंह, शंभुनाथ सिंह, परशुराम द्विवेदी, पारसनाथ सिंह आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
मुख्य अतिथि ने कहा कि मूल्यांकन बहिष्कार के फलस्वरूप आठ अप्रैल 2015 को मुख्यमंत्री से वार्ता के उपरांत 15 सूत्री मांगों में से जिन चार बिंदुओं पर सहमति बनी थी उसमें केवल उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन दरों में वृद्धि का शासनादेश अभी निर्गत हुआ है।
विज्ञापन
कहा कि वर्ष 2000 तक नियुक्त तदर्थ अध्यापकों के विनियमितीकीरण पर कैबिनेट की अनुमति हो चुकी है। सहमति के अन्य दो बिंदु जिसमें सीटी ग्रेड से एलटी ग्रेड में संविलियन के फलस्वरूप राजकीय शिक्षकों की भांति वेतन निर्धारण एवं वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय देने संबंधी राजाज्ञा अभी अधर में है।
विज्ञापन
जबकि मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि दो माह में सभी बिंदुओं पर राजाज्ञा जारी कर दिया जाएगा। उन्होंने समूह घ में भर्तियों पर रोक हटाने एवं नई पेंशन योजना समाप्त करने पर सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार की वादाखिलाफी से प्रदेश के सभी शिक्षकों में आक्रोश व्याप्त है।
यदि समय रहते सहमति के सभी बिंदुओं पर राजाज्ञा निर्गत नहीं हुई, तो सात सितंबर से शुरू मंडलीय धरने के बाद संगठन आरपार की लड़ाई के लिए बाध्य होगा। कहा कि नई पेंशन योजना को समाप्त कर पुराने पेंशन योजना को लागू करने के लिए सभी शिक्षक एवं ट्रेड यूनियनों के साथ दो सितंबर को भी आंदोलन में शामिल होंगे।
अंत में प्रदेशीय मांग पत्र से संबंधित ज्ञापन मुख्यमंत्री को एवं जनपदीय समस्याओं से संबंधित ज्ञापन जिलाधिकारी को दिया गया। प्रदेशीय मंत्री नरेंद्र सिंह, विजय बहादुर सिंह, शेषधर मिश्र, राजनाथ सिंह, शैलेश कुमार सिंह, डॉ. राकेश सिंह, शंभुनाथ सिंह, परशुराम द्विवेदी, पारसनाथ सिंह आदि मौजूद रहे।