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Ballia News: 7 साल में 586 करोड़ खर्च करने के बाद भी गंगा व सरयू की कटान से नहीं मिली राहत

Fri, 08 May 2026 11:57 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2026 11:57 PM IST
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Despite spending Rs 586 crore in 7 years, there is no relief from the erosion of Ganga and Saryu rivers.
नौरंगा गांव में मकान के बचे अवशेष भाग को ठोकर मारती गंगा नदी की लहरें। फाइल फोटो
बलिया। सात साल में 586 करोड़ खर्च करने के बाद भी गंगा व सरयू की कटान से तटवर्ती लोगों को बाढ़ से निजात नहीं मिली है। इस बार भी बारिश का मौसम यानी मानसून में डेढ़ महीने से कम का समय बचा है। अब भी बाढ़ से बचाने के लिए चल रहीं योजनाएं अधूरी हैं।
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यूपी के अंतिम छोर पर बसे जिले में हर साल दो बड़ी नदियां तबाही मचाती हैं। हर साल करोड़ों खर्च के बाद भी गांवों का अस्तित्व तक खत्म हो जाता है।
बाढ़ के समय तटवर्ती इलाके के लोग बेघर हो जाते हैं। शासन की तरफ से गांवों को बचाने के लिए हर साल गंगा व सरयू के किनारे कटानरोधी कार्य कराए जाते हैं लेकिन उसके बाद भी नदी एक जगह छोड़ दूसरे गांव के सामने अपना रौद्र रूप दिखाने लगती है। सात साल के आंकड़ों पर गौर करें तो करीब 586 करोड़ रुपये खर्च हो गए लेकिन दोनों नदियों के कटान से निजात नहीं मिल सकी है।
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इस बार भी 15 जून से बारिश का मौसम शुरू हो जाएगा लेकिन बाढ़ के कहर से बचने के उपाय नहीं हुए। पिछले वर्ष गंगा नदी ने चक्की नौरंगा गांव में जमकर तबाही मचाई थी।
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लगभग 135 से अधिक मकान कटान की जद में आने के बाद नदी में समाहित हो गए। वहीं, हजारों एकड़ भूमि भी कटान की जद में आ गई थी। इससे कृषि का दायरा घटता चला जा रहा है और परिवार के परिवार बेघर हो जा रहे हैं। कटान रोकने के लिए हर शासन की तरफ से हर साल कटानरोधी कार्य भी कराए जाते है लेकिन नदी के विकराल रूप के आगे सब ध्वस्त हो जा रहे हैं।

कटानरोधी कार्य के बाद भी गंगा नदी से दुबेछपरा, सुघरछपरा, रामगढ़ व चक्की नौरंगा में कटान होती है। वहीं, सरयू नदी से गोपालनगर, जेपी नगर में लगातार कटान होती है। तटवर्ती लोगों का कहना है कि शासन से जितने धनराशि प्राप्त हो चुकी है, इतने में पक्का घाट बन जाते।
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