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युवा, बेरोजगारों की अनदेेखी से मायूसी
ballia
Updated Fri, 02 Feb 2018 12:02 AM IST
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केंद्र सरकार के आम बजट को इलेक्ट्रानिक दुकान में देखते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्र सरकार ने गुरूवार को आमबजट पेश किया। किसी ने बजट को सराहा तो किसी ने इसे महज झुनझुना बताया। जबकि बजट में युवा, बेरोजगार और गरीबों की अनदेखी की गई है। सत्ता पक्षा ने अब तक बेतहरीन बजट कहा तो विपक्षी नेताओं ने इसे पूरी तरह चुनावी करार दिया।
बजट को लेकर लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया रही। लोगों का मानना है कि बजट में युवा, बेरोजगार तथा गृहणियों को कोई खास राहत नहीं दिया गया है। सरकारी कर्मचारियों के आयकर स्लैब में भी कोई बढोत्तरी नहीं की गई है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है। मजदूर वर्ग के लिए बजट में कोई खास प्रावधान नहीं है न ही इस बजट में न्यूनतम मजदूरी की बात की गई है, जिससे बेरोजगार भी काफी नाराज है।
उधर, आम बजट देखने के लिए लोग घरों तथा दुकानों में लगे टीवी से चिपके नजर आए। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पेश किया तो सभी की निगाहें टीवी स्क्रीन पर लगी हुई थी।
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लोग इस उम्मीद से टीवी देख रहे थे कि किस क्षेत्र को क्या मिला। कहां राहत मिली तो कहां उनपर भार लादा गया। घर के बड़े बुजुर्गों के अलावा महिलाओं ने भी सारा काम खत्म कर टीवी पर बजट देखा। इलेक्ट्रानिक दूकानों पर भी बजट देखने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। दोपहर बाद देर शाम तक नगर एवं गांव की चाय चट्टी पर दूकानों पर बैठकर युवा और बुजुर्ग सभी ने बजट पर खुलकर चर्चा की। किसी ने इसे बेहतर बताया तो कोई इसे लोकलुभावना कहा।
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बजट को लेकर लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया रही। लोगों का मानना है कि बजट में युवा, बेरोजगार तथा गृहणियों को कोई खास राहत नहीं दिया गया है। सरकारी कर्मचारियों के आयकर स्लैब में भी कोई बढोत्तरी नहीं की गई है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है। मजदूर वर्ग के लिए बजट में कोई खास प्रावधान नहीं है न ही इस बजट में न्यूनतम मजदूरी की बात की गई है, जिससे बेरोजगार भी काफी नाराज है।
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उधर, आम बजट देखने के लिए लोग घरों तथा दुकानों में लगे टीवी से चिपके नजर आए। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पेश किया तो सभी की निगाहें टीवी स्क्रीन पर लगी हुई थी।
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लोग इस उम्मीद से टीवी देख रहे थे कि किस क्षेत्र को क्या मिला। कहां राहत मिली तो कहां उनपर भार लादा गया। घर के बड़े बुजुर्गों के अलावा महिलाओं ने भी सारा काम खत्म कर टीवी पर बजट देखा। इलेक्ट्रानिक दूकानों पर भी बजट देखने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। दोपहर बाद देर शाम तक नगर एवं गांव की चाय चट्टी पर दूकानों पर बैठकर युवा और बुजुर्ग सभी ने बजट पर खुलकर चर्चा की। किसी ने इसे बेहतर बताया तो कोई इसे लोकलुभावना कहा।