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जिला स्तरीय जांच रिपोर्ट को डेढ़ माह से दबाए हैं अधिकारी
Updated Thu, 14 Dec 2017 11:34 PM IST
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हल्दी। विकास खंड बेलहरी के जवहीं गांव में जून महीने में मनरेगा योजना के तहत तीन सड़कों का निर्माण जेसीबी व ट्रेक्टर ट्राली से किया गया था। इस मामले में शिकायत के बाद विभागीय अधिकारियों के आदेश पर ब्लाक स्तरीय जांच समिति व जिला स्तरीय जांच समिति ने पड़ताल की। दोनों जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि ग्राम प्रधान, सचिव व तकनीकी सहायक ने मिलकर बड़े पैमाने पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया। यह जांच रिपोर्ट डेढ़ माह से उच्चाधिकारियों के टेबल पर है, लेकिन कार्रवाई की जगह इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
जवहीं गांव के ग्राम प्रधान, सचिव व तकनीकी सहायक के मिली भगत से मनरेगा योजना की सड़क को जाबकार्ड धारक मजदूरों से कार्य न कराकर ट्रैक्टर ट्राली व जेसीबी मशीन के जरिए तीन सड़कों का निर्माण कार्य करवाया गया था। जिसकी कुल स्वीकृति धन राशि पांच लाख 72 हजार दो सौ तीन रुपये थी। इस मामले में गांव के रोजगार सेवक जगत नारायण यादव, संदीप ओझा सहित अन्य ग्रामीणों ने इसकी शिकायत की थी। जिसके बाद तत्कालीन बीडीओ बेलहरी संजेश श्रीवास्तव द्वारा तीन जुलाई को कार्य का श्रम दान घोषित कर दिया गया था। खंड विकास अधिकारी बेलहरी द्वारा जांच कराने के बाद पाया गया था कि मजदूरों की जगह जेसीबी मशीन व ट्रेक्टर ट्राली से कार्य कराया गया था। बीडीओ ने उक्त धनराशि को निरस्त कर दिया था। इसके बाद बीडीओ ने तीनों आरोपियों से स्पष्टीकरण मांगा था। ग्राम प्रधान ने स्पष्टीकरण देने के बजाय जांच रिपोर्ट पर ही उंगली उठाई थी और उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। जिस पर मुख्य विकास अधिकारी ने जनपद स्तरीय जांच टीम गठित की थी। जिसमें जिला प्रोवेशन अधिकारी अनिल कुमार सोनकर, अवर अभियंता नलकूप दुर्गेश कुमार व अवर अभियंता पीडब्लूडी आशुतोष शुक्ला रहे, इन अधिकारियों ने भी जांच में पाया कि मजदूरों की जगह ट्रेक्टर ट्राली व जेसीबी मशीन से कार्य हुआ है। इतना ही नहीं जांच अधिकारियों ने रोजगार सेवक सहित 21 ग्रामीणों का लिखित बयान भी लिया है। जांच समिति ने पिछले माह मुख्य विकास अधिकारी को रिपोर्ट सौंप दिया था। मुख्य विकास अधिकारी ने सात नवंबर को ग्राम प्रधान जवहीं को पत्र देकर अवगत करा दिया। लेकिन अधिकारियों के उदासीनता के कारण डेढ़ माह से जांच रिपोर्ट का पता नहीं।
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जवहीं गांव के ग्राम प्रधान, सचिव व तकनीकी सहायक के मिली भगत से मनरेगा योजना की सड़क को जाबकार्ड धारक मजदूरों से कार्य न कराकर ट्रैक्टर ट्राली व जेसीबी मशीन के जरिए तीन सड़कों का निर्माण कार्य करवाया गया था। जिसकी कुल स्वीकृति धन राशि पांच लाख 72 हजार दो सौ तीन रुपये थी। इस मामले में गांव के रोजगार सेवक जगत नारायण यादव, संदीप ओझा सहित अन्य ग्रामीणों ने इसकी शिकायत की थी। जिसके बाद तत्कालीन बीडीओ बेलहरी संजेश श्रीवास्तव द्वारा तीन जुलाई को कार्य का श्रम दान घोषित कर दिया गया था। खंड विकास अधिकारी बेलहरी द्वारा जांच कराने के बाद पाया गया था कि मजदूरों की जगह जेसीबी मशीन व ट्रेक्टर ट्राली से कार्य कराया गया था। बीडीओ ने उक्त धनराशि को निरस्त कर दिया था। इसके बाद बीडीओ ने तीनों आरोपियों से स्पष्टीकरण मांगा था। ग्राम प्रधान ने स्पष्टीकरण देने के बजाय जांच रिपोर्ट पर ही उंगली उठाई थी और उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। जिस पर मुख्य विकास अधिकारी ने जनपद स्तरीय जांच टीम गठित की थी। जिसमें जिला प्रोवेशन अधिकारी अनिल कुमार सोनकर, अवर अभियंता नलकूप दुर्गेश कुमार व अवर अभियंता पीडब्लूडी आशुतोष शुक्ला रहे, इन अधिकारियों ने भी जांच में पाया कि मजदूरों की जगह ट्रेक्टर ट्राली व जेसीबी मशीन से कार्य हुआ है। इतना ही नहीं जांच अधिकारियों ने रोजगार सेवक सहित 21 ग्रामीणों का लिखित बयान भी लिया है। जांच समिति ने पिछले माह मुख्य विकास अधिकारी को रिपोर्ट सौंप दिया था। मुख्य विकास अधिकारी ने सात नवंबर को ग्राम प्रधान जवहीं को पत्र देकर अवगत करा दिया। लेकिन अधिकारियों के उदासीनता के कारण डेढ़ माह से जांच रिपोर्ट का पता नहीं।
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