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जिलेभर में आपूर्ति व्यवस्था चरमराई, 212 दुकानें चल रही संबद्धता पर
Updated Mon, 10 Sep 2018 12:33 AM IST
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बलिया। जिले में आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जिले के 107 कोटे की दुकानों को संबद्ध करके महीनों से चलाया जा रहा है। 70 दुकानें रिक्त पड़ी हैं। 35 दुकानें महीनों से निरस्त हैं।
लाख प्रयास के बावजूद जिले में आपूर्ति की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो रहा है और पूरी तरह चरमरा गई है। आलम यह है कि आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु रुप से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 1335 व नगरीय क्षेत्रों में कुल 145 कोटे की दुकानों का संचालन के करने की व्यवस्था की गई है। लेकिन जिले 15 फीसदी से अधिक दुकानों को जुगाड़ पर चलाया जा रहा है। इसके चलते कार्डधारकों को जहां परेशानी का सामना करना पड़ता है वहीं दूसरे गांव के कोटेदारों की ओर से वितरण में लापरवाही भी खूब बरती जाती है। जिले में पिछले छह माह के आंकड़ों पर गौर करें तो शिकायतों की जांच के दौरान वितरण में अनियमियता पाए जाने पर अधिकारियों की ओर से कुल 107 कोटे की दुकानों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे दूसरे गांव के कोटे की दुकान से संबद्ध कर दिया गया है। इससे 107 गांव के कार्डधारकों को दूसरे गांव में जाकर अनाज आदि को लेना पड़ता है। इसी तरह जिले 35 कोटे की दुकानें पिछले तीन माह से अधिक समय निलंबित हैं और यह दुकानें भी गांव के ही दूसरे कोटे की दुकान पर संचालित हो रही हैं। जिले में 70 कोटे की दुकानों के आवंटन को लेकर अधिकारी इस कदर उदासीन हैं कि करीब एक साल से अधिक समय यह दुकानें रिक्त चल रही हैं और इसका संचालन आसपास के गांवों के कोटे की दुकान से संबद्ध हैं। बताया जाता है कि इन दुकानों को लेकर अधिकारियों की ओर से ठोस नहीं की जाती है और इसका दंश संबंधित गांवों के कार्डधारकों को झेलना पड़ता है।
इस बाबत डीएसओ केजी पांडेय ने कहा कि रिक्त दुकानों को आवंटित करने की प्रक्रिया की जाती है लेकिन कई मामलों में न्यायालय के आदेश के चलते कार्रवाई नहीं हो पाती है। संबद्ध कोटेदारों को संबंधित गांव में अस्थाई रुप से कैंप कर वितरण करने का निर्देश दिया गया है और ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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लाख प्रयास के बावजूद जिले में आपूर्ति की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो रहा है और पूरी तरह चरमरा गई है। आलम यह है कि आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु रुप से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 1335 व नगरीय क्षेत्रों में कुल 145 कोटे की दुकानों का संचालन के करने की व्यवस्था की गई है। लेकिन जिले 15 फीसदी से अधिक दुकानों को जुगाड़ पर चलाया जा रहा है। इसके चलते कार्डधारकों को जहां परेशानी का सामना करना पड़ता है वहीं दूसरे गांव के कोटेदारों की ओर से वितरण में लापरवाही भी खूब बरती जाती है। जिले में पिछले छह माह के आंकड़ों पर गौर करें तो शिकायतों की जांच के दौरान वितरण में अनियमियता पाए जाने पर अधिकारियों की ओर से कुल 107 कोटे की दुकानों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे दूसरे गांव के कोटे की दुकान से संबद्ध कर दिया गया है। इससे 107 गांव के कार्डधारकों को दूसरे गांव में जाकर अनाज आदि को लेना पड़ता है। इसी तरह जिले 35 कोटे की दुकानें पिछले तीन माह से अधिक समय निलंबित हैं और यह दुकानें भी गांव के ही दूसरे कोटे की दुकान पर संचालित हो रही हैं। जिले में 70 कोटे की दुकानों के आवंटन को लेकर अधिकारी इस कदर उदासीन हैं कि करीब एक साल से अधिक समय यह दुकानें रिक्त चल रही हैं और इसका संचालन आसपास के गांवों के कोटे की दुकान से संबद्ध हैं। बताया जाता है कि इन दुकानों को लेकर अधिकारियों की ओर से ठोस नहीं की जाती है और इसका दंश संबंधित गांवों के कार्डधारकों को झेलना पड़ता है।
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इस बाबत डीएसओ केजी पांडेय ने कहा कि रिक्त दुकानों को आवंटित करने की प्रक्रिया की जाती है लेकिन कई मामलों में न्यायालय के आदेश के चलते कार्रवाई नहीं हो पाती है। संबद्ध कोटेदारों को संबंधित गांव में अस्थाई रुप से कैंप कर वितरण करने का निर्देश दिया गया है और ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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