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Ballia News: कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज करने की निंदा
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इंदरपुर। भाजपा के पूर्व विधायक रामइकबाल सिंह ने बाराबंकी के विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार के विरुद्ध शांति पूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज करने की निंदा की है। अपने फेसबुक वॉल पर पूर्व विधायक ने लिखा कि निरंकुश अधिकारी विपक्ष की भूमिका में खेल खेल रहे हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने का परिणाम लाठी खाना है। भ्रष्टाचार के विरुद्ध यदि बोलना है तो लाठी-गोली खाने के लिए तैयार रहिए। लाठीचार्ज की घटना की जितनी भी निंदा की जाए, वह कम है। बुलडोजर तो रुका लेकिन अब सरकार के शुभचिंतकों को भी तोड़ने का अभियान शुरू हो गया है। विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं पर लाठी चलाना अधिकारियों को मंहगा पड़ेगा। लाठी गोली से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं की आवाज को दबाना सरकार के ताबूत में कील ठोकने जैसा है। पूर्व विधायक ने फेसबुक पर घटना की वीडियो भी शेयर किया है।
ऐसी बर्बरता पहले नहीं देखी : शांभवी
इंदरपुर। काली सेना प्रमुख एवं शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि आरएसएस के अनुषांगिक छात्र संगठन एबीवीपी के कार्यकर्ता बाराबंकी में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। पहले बलिया और अब बाराबंकी में पुलिस ने जो बर्बरता की है, मैंने अपने जीवन में कभी नहीं देखी। ये बिल्कुल लखनऊ के बगल में हैं। पीठाधीश्वर ने अपने फेसबुक वाॅल पर लिखा है कि पुलिस के अत्याचार में छात्रों को पीटा ही नहीं गया, छात्राओं के भी हाथ तोड़ दिए गए। प्रांत संगठन मंत्री अंशुल सहित सैकड़ों कार्यकर्ता अभी हॉस्पिटल में हैं। ये कोई छोटा मामला नहीं है। आखिर पुलिस संघ के लोगों और उनके अनुषांगिक संगठनों से इतनी चिढ़ी क्यों है। मैं सीधे मुख्यमंत्री को इसके लिए दोषी मानता हूं और उनके इस्तीफे की मांग करता हूं।
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ऐसी बर्बरता पहले नहीं देखी : शांभवी
इंदरपुर। काली सेना प्रमुख एवं शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि आरएसएस के अनुषांगिक छात्र संगठन एबीवीपी के कार्यकर्ता बाराबंकी में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। पहले बलिया और अब बाराबंकी में पुलिस ने जो बर्बरता की है, मैंने अपने जीवन में कभी नहीं देखी। ये बिल्कुल लखनऊ के बगल में हैं। पीठाधीश्वर ने अपने फेसबुक वाॅल पर लिखा है कि पुलिस के अत्याचार में छात्रों को पीटा ही नहीं गया, छात्राओं के भी हाथ तोड़ दिए गए। प्रांत संगठन मंत्री अंशुल सहित सैकड़ों कार्यकर्ता अभी हॉस्पिटल में हैं। ये कोई छोटा मामला नहीं है। आखिर पुलिस संघ के लोगों और उनके अनुषांगिक संगठनों से इतनी चिढ़ी क्यों है। मैं सीधे मुख्यमंत्री को इसके लिए दोषी मानता हूं और उनके इस्तीफे की मांग करता हूं।
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