फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ballia News ›   Colonies built without layout, think a thousand times before leaving

बिना ले आउट बनी गई कालोनियां, जाने से पहले सोचे हजार बार

Wed, 01 Dec 2021 11:09 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 01 Dec 2021 11:09 PM IST
विज्ञापन
Colonies built without layout, think a thousand times before leaving
जगर के ददन नगर स्थरात कालोनी। - फोटो : BALLIA
बलिया। शहर की सीमाएं अभी 20 वर्ष पुरानी ही है। तबसे अब तक शहर की आबादी और दायरा दोनों की दो गुने हो गए। बिना लेआउट शहर और आसपास के क्षेत्रों में कालोनियों पर कालोनिया बसती गई। नतीजा ये हुआ कि इन् कालोनियों में न रास्तों की सुविधा है और न जल निकासी की। अन्य सुविधाओं की बातही बेमानी है। यहां के वाशिंदों को नपा प्रशासन मानक के अनुरूप नगरीय सुविधा नहीं उपलब्ध करा पा रही है।
विज्ञापन

शहर के इर्द-गिर्द कई कालोनियां बस गई हैं। इन कालोनियों को बसाने में मानकों का खूब उल्लगंन किया गया है। जिसे मन हुआ वो ही कालोनाइजरबन गया और प्लाट काटकर कालोनी बना दी। बच्चों की शिक्षा और शहर की जिंदगी की आस में लाखों रुपये खर्च कर लोगों ने यहां आलिशान मकान को खड़े कर लिए, लेकिन अब समस्याओं के कारण उनकी स्थिति नारकीय हो जाती है। ले आउट पास नहीं होने से उक्त कालोनियों में जल निकासी और रास्तों की समस्या गंभीर है। रास्ते ऐसे हैं कि एक वाहन खड़ा हो जाए तो दूसरा निकल ही नहीं सकता है। बरसात में यहां की स्थिति नारकीय हो जाती है। कई कालोनियां तो ऐसा हैं कि लोगों के लकड़ी के चह बनाकर घरों में प्रवेश करना पड़ता है। यहीं नहीं बाइक और कार धारक अपने वाहनों को पूरी बरसता कहीं और ठिकाना देते हैं।
विज्ञापन

नहीं बढ़ी पालिका की सुविधा
वर्तमान में नगर की आबादी और दायरे के सापेक्ष नगरीय सुविधा मयस्सर नहीं है। शहर की आबादी कई गुना बढ़ चुकी है। नगर पालिका परिषद में वर्तमान में 25 वार्ड है। सफाई व्यवस्था के नाम पर नपा के पास लगभग 450 स्थाई सफाई कर्मी हैं, जो शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने में नाकाफी है। पिछले दो दशकों में शहर का दायरा बढ़ा, शहर में कई गांवों स्वत: शामिल हो गए, लेकिन नगर पालिका यहां सुविधा उपलब्ध नहीं करा पाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

दो बार गया विस्तार का प्रस्ताव
बलिया। नगर पालिका परिषद बलिया के विस्तार का प्रस्ताव कई बार शासन को भेजा गया, लेकिन प्रस्ताव पास नहीं हो सका। इसके पीछे कारण भी नपा प्रशासन ही रहा है। ढाई साल पूर्व नपा प्रशासन लगभग 27 गांव को नपा में शामिल करने का प्रस्ताव बनाया था। लेकिन नपा के विस्तार की कवायद आज तक पूरी नहीं हो सकी।
शहर के कई इलाकों में पानी की आपूर्ति नहीं
बलिया। शहरवासियों को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी नपा के जलकल विभाग की है। जलकल विभाग पूरी तरह से संविदा कर्मियों के भरोसे चल रहा है। बजट नहीं उपलब्ध है, जिसके चलते संविदा कर्मियों का समय से वेतन का भुगतान भी नहीं हो पा रहा है। शहर के कई मुहल्ले ऐसे हैं, जहां नपा प्रशासन अब तक पेयजल की सुविधा ही नहीं उपलब्ध करा सका है। कई मुहल्लों की पेयजल पाइप लाइन महीनों से गड़बड़ है।
फ्लड एरिया में बिना अनुमति बन गई कालोनियां
बलिया शहर के दक्षिणी भाग को प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित कर दिया है। इस इलाके में आवासीय कालोनी बनाना गैर कानूनी है। रसड़ा रोड पर सागरपाली, बैरिया रोड पर सहरसपाली, सिकंदरपुर रोड पर हनुमानगंज, बांसडीह रोड पर शंकरपुर और गड़वार रोड़ पर बावजूद मिड्ढा तक नई कालोनियां बन गई हैं। प्रशासन की मिली भगत से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में इन दिनों आधा दर्जन से अधिक आवासीय कालोनिया अस्तित्व में आ चुकी है। इनमें निहोरा नगर, ददन नगर, धनश्याम नगर आदि शामिल है।
-------
नगर में निर्मित अधिकांश मकानों का नक्शा नहीं है पास
शहरी क्षेत्र में बनें अधिकांश मकानों का नक्शा नगर पालिका और जिला प्रशासन द्वारा स्वीकृत नहीं किया गया है। बावजूद इसके नगर पालिका के अधिकारी कारवाई करने से गुरेज करते है, जिससे लोग बिना नक्श पास कराए ही मनमाने तरीके निर्माण कार्य करा रहे है।
----
शहर काफी बढ़ गया है, उसके अनुरूप नया प्रशासन को न तो बजट मिल रहा है। न ही मैन पावर ही उपलब्ध है। जबकि हमें 20 साल पहले के शहर व आबादी के अनुसार ही बजट व संसाधन मिलता है। बजट की कमी के चलते नपा के सारे काम प्रभावित हो कर रह गए हैं। वर्तमान आबादी व क्षेत्र के अनुरूप सुविधा उपलब्ध करानी पड़ रही है। इसके चलते ही दिक्कत हो रही है। जब तक विस्तार नहीं होगा तब तक व्यवस्था सुधरने की उम्मीद नहीं है।
-दिनेश कुमार विश्वकर्मा, ईओ, नगर पालिका परिषद बलिया।
------
शहर में नागरिक सुविधाओं का टोटा है। कई मोहल्ला में बिना बारिश के ही पानी भरा रहता है। पेयजल की आपूर्ति की बात करना ही बेमानी है। बीते चार वर्षों से नगर मेंअव्यवस्थाएं और बढ़ गई है।

-कृष्णा सिंह, विजयीपुर।
----
सरकार स्वच्छता अभियान पर जोर दे रही है, लेकिन इस क्षेत्र में केवल एक सफाई कर्मी है। ऐसे में सफाई तो दूर यहां का कूड़ा उठना भी मुश्किल हो जाता है।
-अशोक कुमार श्रीवास्तव एडवोकेट, बेदुआं।
---
विकास की आस में शहरवासी छले जा रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शहर की आधी आबादी को पालिका पेयजल आपूर्ति नसीब नहीं है। लकड़ी के खंभों के सहारे झूल रहे विद्युत तार विभागीय उपेक्षा का प्रमाण हैं।
-मनीष कुमार सिंह, हास्पिटल रोड।
----
नगर के विकास के नाम पर अब तक छलावा मिला है। सड़क, नाली, जलनिकासी, शिक्षा, चिकित्सा आदि की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
देवेंद्र कुमार सिंह टिंकू एडवोकेट, ओकडेनगंज।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed