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चौबेछपरा में तीन घरों को लील गई गंगा की लहरें
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
Updated Thu, 04 Aug 2016 08:18 PM IST
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गंगा की लहरों में समाता रिहायशी इलाका।
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गंगा की लहरें बुधवार की रात चौबेछपरा गांव की तीन पक्के मकानों को लील गई। अचानक गंगा नदी के बैकरोलिंग धारा में चौबेछपरा के लोगों को रतजगा करने पर मजबूर कर दिया। गंगा के विकराल रूप के चलते चौबेछपरा में अफ रातफरी की स्थिति बनी हुई है। हर कोई अपने घर के सामान को सुरक्षित ठौर देने में लगा हुआ है।
गुरूवार की सुबह गंगा का रूप देखकर चौबे छपरा गांव के सहमे लोग अपने सामानों को सहेज रहे थे। कोई अपने सपनों के घरौदों पर अपने ही हाथों हथौड़े चलाते दिखा। गंगा के बैकरोलिंग धारा का खौफ साफ उनके चेहरे पर दिख रहा था। गांव पहुंची अमर उजाला की टीम ने जब एक पीड़ित से पूछा कि शासन से कोई नुमाइंदा आया था, तो उसने कहा कि हम पीड़ितों की दशा देखने के लिए किसके पास फुर्सत है।
गांव के ही अवधेश पासवान ने कहा कि बाढ़ विभाग की हालत तो यह है कि बाढ़ के दौरान पीड़ितों को सांत्वना देने के लिए कई योजनाएं तो बनती हैं, लेकिन गांवों को बचाने के लिए धरातल पर कोई कार्य नहीं होता है। गंगा की लहरों में बुधवार की रात राजकिशोर मिश्र, राजनारायण मिश्र, रामकेशरी देवी का पक्के मकान विलीन हो गए।
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इसके बाद से चौबेछपरा के लोगों में अपने घरौदों व अस्तित्व बचाने को लेकर हायतौबा मची है। रात से ही गौरीशंकर, अमरनाथ मिश्र, दिनबंधु मिश्र, हीरा मिश्र, राजेन्द्र मिश्र, आत्मा राम, बसंत कुमार मिश्र, सुनील मिश्र, अभिराम राम, अवधेश, शंभू आदि लोग आपने घरौंदे को उजाडने व सामानों को सहेजने में लगे हुए हैं। देर शाम तक कोई जिम्मेदार अधिकारी इन पीड़ितों तक नहीं पहुंच सका है । केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गंगा का जलस्तर 56.60 मीटर दर्ज किया गया जिसमें आधा सेमी प्रतिघंटे की रपतार से बढ़ाव जारी है ।
गंगा के लहरों ने चौबेछपरा में जमकर तबाही मचाई है । पीड़ितों के बीच न तो कोई जिम्मेदार अफसर ने पहुंचकर उनकी हालत जानना मुनासिब नहीं समझा है । पीड़ितों ने ग्रामप्रधान श्याम कैलाश से जनरेटर की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की ।
। गंगा के किनारे बसे लोगों का कहना है कि आखिर गांवों की जलसमाधि कब तक होती रहेगी । शासन प्रशासन व बाढ़ विभाग केवल एनएच-31 बचाने के नाम पर लाखों रुपये के धन को बंदरबाट करने में लगा हुआ है । लेकिन गांवों को बचाने के लिए कोई योजना नहीं है । उधर नदी की बैकरोलिग धार का दबाव स्परों पर बढ़ता जा रहा है ।
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गुरूवार की सुबह गंगा का रूप देखकर चौबे छपरा गांव के सहमे लोग अपने सामानों को सहेज रहे थे। कोई अपने सपनों के घरौदों पर अपने ही हाथों हथौड़े चलाते दिखा। गंगा के बैकरोलिंग धारा का खौफ साफ उनके चेहरे पर दिख रहा था। गांव पहुंची अमर उजाला की टीम ने जब एक पीड़ित से पूछा कि शासन से कोई नुमाइंदा आया था, तो उसने कहा कि हम पीड़ितों की दशा देखने के लिए किसके पास फुर्सत है।
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गांव के ही अवधेश पासवान ने कहा कि बाढ़ विभाग की हालत तो यह है कि बाढ़ के दौरान पीड़ितों को सांत्वना देने के लिए कई योजनाएं तो बनती हैं, लेकिन गांवों को बचाने के लिए धरातल पर कोई कार्य नहीं होता है। गंगा की लहरों में बुधवार की रात राजकिशोर मिश्र, राजनारायण मिश्र, रामकेशरी देवी का पक्के मकान विलीन हो गए।
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इसके बाद से चौबेछपरा के लोगों में अपने घरौदों व अस्तित्व बचाने को लेकर हायतौबा मची है। रात से ही गौरीशंकर, अमरनाथ मिश्र, दिनबंधु मिश्र, हीरा मिश्र, राजेन्द्र मिश्र, आत्मा राम, बसंत कुमार मिश्र, सुनील मिश्र, अभिराम राम, अवधेश, शंभू आदि लोग आपने घरौंदे को उजाडने व सामानों को सहेजने में लगे हुए हैं। देर शाम तक कोई जिम्मेदार अधिकारी इन पीड़ितों तक नहीं पहुंच सका है । केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गंगा का जलस्तर 56.60 मीटर दर्ज किया गया जिसमें आधा सेमी प्रतिघंटे की रपतार से बढ़ाव जारी है ।
गंगा के लहरों ने चौबेछपरा में जमकर तबाही मचाई है । पीड़ितों के बीच न तो कोई जिम्मेदार अफसर ने पहुंचकर उनकी हालत जानना मुनासिब नहीं समझा है । पीड़ितों ने ग्रामप्रधान श्याम कैलाश से जनरेटर की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की ।
। गंगा के किनारे बसे लोगों का कहना है कि आखिर गांवों की जलसमाधि कब तक होती रहेगी । शासन प्रशासन व बाढ़ विभाग केवल एनएच-31 बचाने के नाम पर लाखों रुपये के धन को बंदरबाट करने में लगा हुआ है । लेकिन गांवों को बचाने के लिए कोई योजना नहीं है । उधर नदी की बैकरोलिग धार का दबाव स्परों पर बढ़ता जा रहा है ।