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आठ किमी लंबी नहर, जो सिमट गई है डेढ़ किमी में
बलिया, उत्तर प्रदेश
Updated Wed, 20 Apr 2016 12:23 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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जिले के सोहांव विकास खंड में स्थित कोरंटाडीह पंप कैनाल की सुधि लेने वाला कोई नहीं है। 1972 में आठ किलोमीटर में स्थापित इस पंप कैनाल से हजारों किसान लाभ पाते हैं लेकिन अब यह पंप कैनाल की नहर वर्तमान में सिकुड़कर डेढ़ किलोमीटर में सिमट गई है।
गंगा किनारे स्थापित कोरंटाडीह पंप कैनाल का उद्घज्ञटन स्वतंत्रता की रजत जयंती पर सूबे के सिंचाई राज्यमंत्री राजबिहारी सिंह ने 1972 में किया था। इससे गड़हांचल के किसानों को सबसे अधिक लाभ मिलता था। वर्तमान में इसकी देख-रेख भगवान भरोसे है। पंप कैनाल की क्षमता 30 क्यूसेक और नहर की लंबाई आठ किलोमीटर थी। जबकि वर्तमान समय में केवल डेढ़ किलोमीटर तक के किसानों को ही पानी मिल पा रहा है।
पूर्व में पंप कैनाल से सरायकोटा, नसीरपुर, पखनपुरा, कटफारी, विशंभरपुर, उजियार सहित अन्य गांव-मौजा के किसान इससे लाभान्वित होते थे। लेकिन नहर में जगह-जगह बने फाटकों तथा साइफनों के जर्जर होने और टूट जाने से क्षेत्र के किसान इसका लाभ नहीं उठा पा रहे। हालांकि विभाग इसकी साफ-सफाई और मरम्मत के नाम पर समय-समय पर पैसे का भुगतान जरूर करता है।
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इस दिशा में न तो विभाग के कोई अधिकारी ने ही पहल की है और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने। आए दिन पंप कैनाल का मोटर जला रहता है। जिसे दुरुस्त कराने में विभाग पंद्रह दिन से एक माह तक समय लगा देता है।
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गंगा किनारे स्थापित कोरंटाडीह पंप कैनाल का उद्घज्ञटन स्वतंत्रता की रजत जयंती पर सूबे के सिंचाई राज्यमंत्री राजबिहारी सिंह ने 1972 में किया था। इससे गड़हांचल के किसानों को सबसे अधिक लाभ मिलता था। वर्तमान में इसकी देख-रेख भगवान भरोसे है। पंप कैनाल की क्षमता 30 क्यूसेक और नहर की लंबाई आठ किलोमीटर थी। जबकि वर्तमान समय में केवल डेढ़ किलोमीटर तक के किसानों को ही पानी मिल पा रहा है।
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पूर्व में पंप कैनाल से सरायकोटा, नसीरपुर, पखनपुरा, कटफारी, विशंभरपुर, उजियार सहित अन्य गांव-मौजा के किसान इससे लाभान्वित होते थे। लेकिन नहर में जगह-जगह बने फाटकों तथा साइफनों के जर्जर होने और टूट जाने से क्षेत्र के किसान इसका लाभ नहीं उठा पा रहे। हालांकि विभाग इसकी साफ-सफाई और मरम्मत के नाम पर समय-समय पर पैसे का भुगतान जरूर करता है।
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इस दिशा में न तो विभाग के कोई अधिकारी ने ही पहल की है और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने। आए दिन पंप कैनाल का मोटर जला रहता है। जिसे दुरुस्त कराने में विभाग पंद्रह दिन से एक माह तक समय लगा देता है।