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Ballia News: महाकंुभ से आए, अब आगे के लिए ट्रेन नहीं मिल रही
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बलिया। महाकुंभ हादसे के बाद स्थिति सामान्य होने लगी है लेकिन वहां से आने वालों के चेहरे पर एक भय साफ दिखता है। स्नान कर लौटे लोगों ने बताया कि 8 से 10 किमी तक पैदल चलना पड़ा। रेल व बस स्टेशन पर इधर-उधर भटकना पड़ा। बलिया रेलवे स्टेशन पर बिहार छपरा के काफी लोग फंस गए। उन्हें आगे की ट्रेन ही नहीं मिल रही।
बिहार छपरा के मदनपुर निवासी आनंदी सिंह ने बताया कि भीड़ में चलते स्नान करना चुनौती है। इसके बाद भी हम लोगों ने संगम तट पर डुबकी लगाई। उसके बाद बस ट्रेन पकड़ने की चिंता शुरू हुई। प्रयागराज से जो ट्रेन मिली बलिया में के बाद आगे नहीं गई। अब घर कैसे जाएं।
छपरा के ताजपुर फूलवरिया निवासी योगेंद्र सिंह ने बताया कि हादसे के वक्त प्रयागराज में ही था। खबर लगते ही नैनी में ठहरे स्थान पर ही रुक गए। अगले दिन स्थिति को भांपते हुए नैनी में गंगा में स्नान किया। अब ट्रेन के लिए काफी दिक्कत हो रही। प्रयागराज से किसी तरह से वाराणसी पहुंचा। वहां से बलिया में आकर फंस गया हूं। यहां से छपरा के लिए ट्रेन नहीं मिल रही है।
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अनीता देवी निवासी फुलवरिया ने बताया कि बड़े आयोजनों में थोड़ी दिक्कत होती है लेकिन महाकुंभ में स्नान कर हम धन्य हो गइनी। पुलिस वाले बाबू लोग मदद करत रहलहा। दाउदपुर निवासी कृष्णावती देवी ने बताया कि भीड़ में भूलइला के डर हमेशा रहल। संगम पर कई गो रास्ता रहल। हादसे के बाद भी उन्होंने संगम में स्नान की बात कही।
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बिहार छपरा के मदनपुर निवासी आनंदी सिंह ने बताया कि भीड़ में चलते स्नान करना चुनौती है। इसके बाद भी हम लोगों ने संगम तट पर डुबकी लगाई। उसके बाद बस ट्रेन पकड़ने की चिंता शुरू हुई। प्रयागराज से जो ट्रेन मिली बलिया में के बाद आगे नहीं गई। अब घर कैसे जाएं।
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छपरा के ताजपुर फूलवरिया निवासी योगेंद्र सिंह ने बताया कि हादसे के वक्त प्रयागराज में ही था। खबर लगते ही नैनी में ठहरे स्थान पर ही रुक गए। अगले दिन स्थिति को भांपते हुए नैनी में गंगा में स्नान किया। अब ट्रेन के लिए काफी दिक्कत हो रही। प्रयागराज से किसी तरह से वाराणसी पहुंचा। वहां से बलिया में आकर फंस गया हूं। यहां से छपरा के लिए ट्रेन नहीं मिल रही है।
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अनीता देवी निवासी फुलवरिया ने बताया कि बड़े आयोजनों में थोड़ी दिक्कत होती है लेकिन महाकुंभ में स्नान कर हम धन्य हो गइनी। पुलिस वाले बाबू लोग मदद करत रहलहा। दाउदपुर निवासी कृष्णावती देवी ने बताया कि भीड़ में भूलइला के डर हमेशा रहल। संगम पर कई गो रास्ता रहल। हादसे के बाद भी उन्होंने संगम में स्नान की बात कही।