{"_id":"620000ac0354c73d7052cec0","slug":"border-dispute-has-become-a-problem-for-70-years-ballia-news-vns6373064116","type":"story","status":"publish","title_hn":"70 वर्षों से समस्या बना है सीमा विवाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
70 वर्षों से समस्या बना है सीमा विवाद
विज्ञापन
बैरिया विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और सपा ने अपना प्रत्याशी नहीं घोषित किया है। बावजूद यहां के समीकरण और क्षेत्र के विकास को लेकर चट्टी-चौराहों बाजारों में चर्चा होने लगी है। कोई कहता है कि फलां दल की सरकार बनी तो यहां की इस समस्या का समाधान हो जाएगा, तो कोई कहता है कि फलां दल की सरकार बनी तो उस समस्या का समाधान होगा। अपने-अपने राजनैतिक वफादारी से प्रेरित होकर लोग आपस में बहस कर रहे हैं, लेकिन क्षेत्र में एक समस्या ऐसी है जिसको लेकर सर्वसमाज सभी सरकारों पर उपेक्षात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाता है। यह समस्या है यूपी-बिहार के सीमा विवाद का मामला। यहां पिछले 70 वर्षों से यूपी के किसानों को बिहार के दबंग परेशान करते हैं। फसल बोते हैं यूपी के किसान, काट ले जाते है बिहार के दबंग। लोगों का कहना है कि अगर हमारी सरकारें गंभीर होतीं तो इस समस्या का समाधान हो गया होता। प्रत्येक वर्ष फसल बोने व काटने के समय जवहीं से लेकर दोकटी तक 40 किमी लंबे क्षेत्र में यह समस्या है।
1952 में सीमा विवाद के समाधान के लिए पं. जवाहरलाल नेहरू ने प्रधानमंत्री के रूप में इस समस्या को गम्भीरता से लिया था, समाधान के लिए त्रिवेदी आयोग का गठन किया गया। त्रिवेदी आयोग के रिपोर्ट पर बाद की सरकारों ने लागू करने को गंभीरता से नहीं लिया।
सतन यादव, प्रधान जगदेवा
आजादी के सात दशक के बाद भी सीमा विवाद जैसे का तैसा है। सीमांत क्षेत्र में जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली कहावत चरितार्थ है। जनप्रतिनिधियों ने इस समस्या के समाधान के प्रति तनिक भी रुचि नहीं दिखाई।
विज्ञापन
बड़कन सिंह, किसान
किसानों के विकास उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाने, उनके आमदनी को बढ़ाने को लेकर लभगभ सभी दलों की सरकारों ने जब-जब चुनाव आया है खूब आवाज बुलंद की है। लेकिन 70 वर्षों से इस समस्या को झेल रहे किसानों के मदद में समाधान का कोई पहल नहीं की गई।
सुरेन्द्र ठाकुर, प्रधान नौरंगा
जवहीं, गायघाट, मझौवा, नौरंगा, दोकटी में फसल काटने को लेकर यूपी-बिहार सिमा पर कई बार बंदूकें गरज चुकी हैं। समाधान की बात तो दूर इस क्षेत्र का कोई भी प्रतिनिधि इस समस्या को विधानसभा में भी नहीं उठाया। कैसे कहा जाए कि किसानों के विकास के प्रति कोई भी सरकार गंभीर है। अजित तिवारी, किसान
हर साल यूपी के किसान खेतों में मेहनत करते हैं। महंगा खाद-बीज डालते हैं। व्यवस्था की कमी के कारण उस फसल को कोई और काट ले जाता है। किस-किस जनप्रतिनिधि का नाम लिया जाए। किसी ने भी इसे गम्भीरता से नहीं लिया। किसान मरते हैं तो मर जाए उनकी बला से।
संजय यादव, किसान
इस चुनाव में आने वाले सभी दलों के प्रत्याशियों के सामने यूपी-बिहार सिमा विवाद की समस्या रखी जाएगी। चुनाव जीतने के बाद इस समस्या के समाधान के लिए सार्वजनिक रूप से संकल्प लेने को कहा जाएगा. जो संकल्प लेगा उसके विषय में सोचा जाएगा।
विकास सिंह, किसान
विज्ञापन
1952 में सीमा विवाद के समाधान के लिए पं. जवाहरलाल नेहरू ने प्रधानमंत्री के रूप में इस समस्या को गम्भीरता से लिया था, समाधान के लिए त्रिवेदी आयोग का गठन किया गया। त्रिवेदी आयोग के रिपोर्ट पर बाद की सरकारों ने लागू करने को गंभीरता से नहीं लिया।
विज्ञापन
सतन यादव, प्रधान जगदेवा
आजादी के सात दशक के बाद भी सीमा विवाद जैसे का तैसा है। सीमांत क्षेत्र में जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली कहावत चरितार्थ है। जनप्रतिनिधियों ने इस समस्या के समाधान के प्रति तनिक भी रुचि नहीं दिखाई।
विज्ञापन
बड़कन सिंह, किसान
किसानों के विकास उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाने, उनके आमदनी को बढ़ाने को लेकर लभगभ सभी दलों की सरकारों ने जब-जब चुनाव आया है खूब आवाज बुलंद की है। लेकिन 70 वर्षों से इस समस्या को झेल रहे किसानों के मदद में समाधान का कोई पहल नहीं की गई।
सुरेन्द्र ठाकुर, प्रधान नौरंगा
जवहीं, गायघाट, मझौवा, नौरंगा, दोकटी में फसल काटने को लेकर यूपी-बिहार सिमा पर कई बार बंदूकें गरज चुकी हैं। समाधान की बात तो दूर इस क्षेत्र का कोई भी प्रतिनिधि इस समस्या को विधानसभा में भी नहीं उठाया। कैसे कहा जाए कि किसानों के विकास के प्रति कोई भी सरकार गंभीर है। अजित तिवारी, किसान
हर साल यूपी के किसान खेतों में मेहनत करते हैं। महंगा खाद-बीज डालते हैं। व्यवस्था की कमी के कारण उस फसल को कोई और काट ले जाता है। किस-किस जनप्रतिनिधि का नाम लिया जाए। किसी ने भी इसे गम्भीरता से नहीं लिया। किसान मरते हैं तो मर जाए उनकी बला से।
संजय यादव, किसान
इस चुनाव में आने वाले सभी दलों के प्रत्याशियों के सामने यूपी-बिहार सिमा विवाद की समस्या रखी जाएगी। चुनाव जीतने के बाद इस समस्या के समाधान के लिए सार्वजनिक रूप से संकल्प लेने को कहा जाएगा. जो संकल्प लेगा उसके विषय में सोचा जाएगा।
विकास सिंह, किसान