बलिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट यूपी को औद्योगिक प्रदेश बनाने और युवाओं को स्वरोजगार देने के सरकारी अभियान को बैंकों की मनमानी ग्रहण लगा रही है। कौशल विकास का प्रशिक्षण भी बेजा साबित हो रहा है। जिले में युवाओं को रोजगार मुहैया कराने के लिए चार योजनाओं में सात ट्रेडों के तहत बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षित करके उन्हें स्वरोजगार की ओर प्रेरित करने का अभियान उद्यमिता विकास व प्रोत्साहन विभाग के द्वारा चलाया जा रहा है, जो प्रशिक्षित युवाओं को मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, एक जिला एक उत्पाद योजना और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना ऋण मुहैया कराए कराने की व्यवस्था करता है। उद्यमिता विकास एवं प्रोत्साहन विभाग के जिला उपायुक्त राजीव कुमार पाठक बताते हैं कि बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार की ओर प्रेरित करने के लिए उन्हें बकायदा कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके उपरांत उन्हें विभिन्न राष्ट्रीय बैंकों से ऋण मुहैया कराया जाता है। बताया कि बीते पांच वर्षो के दौरान जिले में विभिन्न योजनाओं के तहत करीब 4925 लोगों को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें करीब 1450 महिलाएं है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के लिए अब तक 286 युवाओं ने आवेदन किया है, जिनमें 29 आवेदकों का ऋण स्वीकृत हुआ है। जबकि 13 लोगों में ऋण वितरित कर दिया गया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत 242 आवेदकों ने आवेदन किया, जिनमें 16 स्वीकृत हुआ है। बताया कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत 15 लोगों ने आवेदन किया है, जिनमें पांच का लोन स्वीकृत हुआ है। साथ ही ओडीओपी के तहत विभिन्न बैंकों में 42 आवेदन भेजे गए, जिनमें महज दो ही स्वीकृत हुए हैं उपायुक्त ने बताया कि बैंकों द्वारा ऋण स्वीकृत करने की प्रक्रिया में हिला हवाली करना करने से स्वरोजगार के विकास की प्रक्रिया को चपत लग रही है।