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दस साल में गायब हो गए अनुसूचित जनजाति के पौने दो लाख लोग

Sat, 06 Mar 2021 11:10 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 06 Mar 2021 11:10 PM IST
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बलिया। जिले से पिछले 10 सालों में अनुसूचित जनजाति के 173778 लोग गायब हो गए हैं। जनगणना 2011 के अनुसार जिले में अनुसूचित जनजाति के कुल सदस्यों की संख्या 173778 थी, जिसे इन 10 सालों में और बढ़ जाना चाहिए था, लेकिन यहां मामला उलटा दिख रहा है। यह कहां गए, यह बताने वाला कोई नहीं है। तहसील मुख्यालयों से भेजी गई रिपोर्ट में यह जरूर बता दिया गया है कि जिले के किसी भी कोने में अनुसूचित जनजाति का कोई भी परिवार या सदस्य निवास नहीं करता है।
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शासन के निर्देश पर जिला पंचायत राज अधिकारी की ओर से जिले के सभी तहसील मुख्यालयों को पत्र भेजकर वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले में अनुसूचित जनजाति की दिखाई गई जनसंख्या की वास्तविक रिपोर्ट भेजने को कहा गया था। सभी तहसील मुख्यालयों की ओर से डीपीआरओ को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार जिले में अनुसूचित जनजाति का एक भी परिवार या सदस्य नहीं है। अब डीपीआरओ का कहना है कि यह रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। यदि रिपोर्ट मान्य हुई तो जिले में पंचायत चुनाव को लेकर अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटें खतरे में पड़ सकती हैं।
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जनगणना 2011 के अनुसार जिले में अनुसूचित जनजाति के कुल 173778 लोग थे। इनमें गोंड जाति के कुल 138942 और खरवार जाति के 34836 लोग शामिल थे। इनमें गोंड जाति के 39576 पुरुष, 38498 महिला और 60868 बच्चे शामिल थे। इसी प्रकार, खरवार जाति के 9499 पुरुष, 9587 महिला और 15750 बच्चे थे लेकिन अब इन्हें अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में नहीं माना जा रहा है, क्योंकि ये जाति प्रमाणपत्र के लिए शासन के निर्देशों के अनुसार मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। इस बारे में तहसीलदार बैरिया शिवसागर दुबे के अनुसार शासन ने जो गाइड लाइन दी है, उसके अनुसार अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र देने के लिए 1950 से पहले राष्ट्रपति की ओर से जारी शासनादेश जिसमें जाति के कालम में जाति लिखी हो अथवा 1356 व 1359 फसली के साथ टीसी व शैक्षणिक प्रमाणपत्र जिसमें जाति लिखी होनी चाहिए। यदि यह नहीं है तो अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र नहीं दिया जा सकता है।
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बदल सकता है 725 सीटों के आरक्षण का पैमाना
बलिया। तहसीलों की ओर से किए गए सत्यापन में कहीं भी अनुसूचित जनजाति के लोग नहीं मिले हैं। तहसीलों ने इसकी रिपोर्ट जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय को भेजी है जिसे शासन को भेजा जाएगा। अगर रिपोर्ट मान्य हुई तो जिले में पंचायत चुनाव को लेकर अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 725 सीटें खतरे में पड़ सकती हैं और पूरे आरक्षण में हेर-फेर हो सकता है। पंचायत चुनावों में हर बार की तरह इस बार भी अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए सीटों का आरक्षण शासन की ओर से जारी गाइड लाइन के अनुसार किया गया है। बताया जाता है कि नियमानुसार जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख, ग्राम प्रधान, बीडीसी और ग्राम पंचायत सदस्य के पदों पर आरक्षण निर्धारित किया गया है। अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर जिले में अनुसूचित जनजाति के लिए अलग-अलग पदों के लिए आरक्षित कुल 725 सीटों पर चुनाव कौन लड़ेगा। अगर सरकार ने इस रिपोर्ट को स्वीकार किया तो एक बार फिर किए गए आरक्षणों में उलटफेर भी हो सकता है।

ग्राम पंचायत व वार्डों की स्थिति- आरक्षित अनुसूचित जनजाति
ग्राम पंचायत- 940- 53
जिला पंचायत वार्ड- 58- 02
बीडीसी सदस्य - 1441- 72
ग्राम पंचायत सदस्य 12098- 598
सभी तहसीलों की ओर से अनुसूचित जनजाति का वास्तविक अवधारण निर्धारित करते हुए रिपोर्ट भेजी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कहीं भी अनुसूचित जनजाति के लोग सत्यापन में नहीं मिले हैं। रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। शासन के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी। - गुलाब सिंह, एडीपीआरओ, बलिया
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