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घाघरा की पानी से घिरे 10 पूरवे
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जयप्रकाशनगर। घाघरा नदी के जलस्तर में हुई बढ़ोतरी से विकास खंड मुरली छपरा क्षेत्र के चांददीयर पंचायत के कई पूरवे बाढ़ की चपेट में आने शुरू हो गए हैं। आवागमन बाधित हो गया है। सरकारी अमला ने अभी तक इस तरफ ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा है। इन पूरवे के लोग खुद के साथ ही मवेशियों के जीवन को भी भगवान भरोसे छोड़ चुके हैं।
चांददीयर पंचायत के टोला फतेह राय के बकुल्हा, चक्की चांददीयर, पलटू नगर, श्रीपालपुर के डेरा, बैजनाथ के डेरा, चांददीयर नई बस्ती, लोहा टोला, पियारी के डेरा गांव शनिवार से ही घाघरा के पानी से घिरे हुए हैं। इन पूरवों के किसानों की करीब दो सौ एकड़ मक्का, धान,परवल आदि की फसलें भी डूब चुकी हैं। पंचायत के किसान व प्रधान प्रतिनिधि वीरेंद्र यादव, सूचित यादव, सुरेंद्र यादव, मुन्ना पासवान, सुनेश्वर पासवान, अमित शर्मा, सुनील चौधरी आदि की मानें तो घाघरा नदी के तांडव के तीन दिन बीत चुके हैं लेकिन शासन प्रशासन का कोई नुमाइंदा बाढ़ पीड़ितों का हाल जानना भी मुनासिब नहीं समझ रहा है। आलम यह है कि किसान सरकार से नाव की मांग कर रहे हैं कि नाव उपलब्ध हो ताकि मवेशियों के आहार जुटाने का काम हो सके लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। बाढ़ ने ग्रामीणों के जीवन को अस्तव्यस्त कर दिया है। बुधवार को नदी का उग्र रूप देखकर अपने मवेशियों को गांव के संपर्क मार्गों पर पहुंचाना शुुरू कर दिया है।
रिंग बंधा टूटने के बाद गांवों में घुसने लगा पानी
दया छपरा। दुबेछपरा में बंधा टूटने के बाद गंगा का पानी अब गांवों में घुसना शुरू कर दिया है। जबकि प्रशासन के लोग केवल दुबेछपरा पर ही ध्यान केंद्रित किए हुए हैं। गंगा का पानी अब प्रसाद छपरा, आलम राय के टोला, बड़का बुधनचक, बुधनचक, मुरली छपरा, ग्राम सभा जगदेवा के पाण्डेयपुर, चिन्तामणि राय के टोला, रामपुर, मठिया, मिश्र के हाता, तिवारी टोला, गुदरी सिंह के टोला, बंसगोपाल छपरा आदि गांवों को अपने चपेट में ले लिया है। बाढ़ का पानी अब लोगों के घरों में जाना शुरू हो गया है। इन गांवों के लोग अपने समानों व मवेशियों के साथ एनएच 31 पर शरण लेने लगे हैं। पांडेयपुर ढाला के समीप बन्धा पर शरण लिए गोरख साह, तुमड़ी राम, मैनेजर पासवान, गंगासागर पासवान, राधा गोंड आदि का कहना है कि हमलोगों को कोई पूछने वाला नहीं है। छात्रनेता मैनेजर सिंह ने कहा कि चिन्तामणि राय के टोला व मुरली छपरा में ग्रामीणों के घरों में चला गया है। ग्रामीणों को बाहर निकालने के लिए नाव अत्यंत कम है।
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नौरंगा व भुवाल छपरा गांव के लोग करने लगे पलायन
दयाछपरा। गंगा उस पार बसे नौरंगा, भुवाल छपरा में गंगा की कटान से ग्रामीणों में दहशत है। भुवाल छपरा निवासी रामाकांत ठाकुर ने बताया कि अब तो चारों तरफ पानी हो गया है। बताया कि पानी के भीतर हो रहा कटान समझ में भी नहीं आता पानी का बुलबुला देख कर अंदाजा लगाया जा रहा है। जिसके भय से अब तक लल्लन यादव, भुनेश्वर ठाकुर आदि कई लोग अपना सामान निकाल कर घर खाली कर रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि अगर इसी तरह कटान बढ़ता रहा तो दो दिन के अन्दर बस्ती के कई घर कटान की भेंट चढ़ जाएगा।
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चांददीयर पंचायत के टोला फतेह राय के बकुल्हा, चक्की चांददीयर, पलटू नगर, श्रीपालपुर के डेरा, बैजनाथ के डेरा, चांददीयर नई बस्ती, लोहा टोला, पियारी के डेरा गांव शनिवार से ही घाघरा के पानी से घिरे हुए हैं। इन पूरवों के किसानों की करीब दो सौ एकड़ मक्का, धान,परवल आदि की फसलें भी डूब चुकी हैं। पंचायत के किसान व प्रधान प्रतिनिधि वीरेंद्र यादव, सूचित यादव, सुरेंद्र यादव, मुन्ना पासवान, सुनेश्वर पासवान, अमित शर्मा, सुनील चौधरी आदि की मानें तो घाघरा नदी के तांडव के तीन दिन बीत चुके हैं लेकिन शासन प्रशासन का कोई नुमाइंदा बाढ़ पीड़ितों का हाल जानना भी मुनासिब नहीं समझ रहा है। आलम यह है कि किसान सरकार से नाव की मांग कर रहे हैं कि नाव उपलब्ध हो ताकि मवेशियों के आहार जुटाने का काम हो सके लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। बाढ़ ने ग्रामीणों के जीवन को अस्तव्यस्त कर दिया है। बुधवार को नदी का उग्र रूप देखकर अपने मवेशियों को गांव के संपर्क मार्गों पर पहुंचाना शुुरू कर दिया है।
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रिंग बंधा टूटने के बाद गांवों में घुसने लगा पानी
दया छपरा। दुबेछपरा में बंधा टूटने के बाद गंगा का पानी अब गांवों में घुसना शुरू कर दिया है। जबकि प्रशासन के लोग केवल दुबेछपरा पर ही ध्यान केंद्रित किए हुए हैं। गंगा का पानी अब प्रसाद छपरा, आलम राय के टोला, बड़का बुधनचक, बुधनचक, मुरली छपरा, ग्राम सभा जगदेवा के पाण्डेयपुर, चिन्तामणि राय के टोला, रामपुर, मठिया, मिश्र के हाता, तिवारी टोला, गुदरी सिंह के टोला, बंसगोपाल छपरा आदि गांवों को अपने चपेट में ले लिया है। बाढ़ का पानी अब लोगों के घरों में जाना शुरू हो गया है। इन गांवों के लोग अपने समानों व मवेशियों के साथ एनएच 31 पर शरण लेने लगे हैं। पांडेयपुर ढाला के समीप बन्धा पर शरण लिए गोरख साह, तुमड़ी राम, मैनेजर पासवान, गंगासागर पासवान, राधा गोंड आदि का कहना है कि हमलोगों को कोई पूछने वाला नहीं है। छात्रनेता मैनेजर सिंह ने कहा कि चिन्तामणि राय के टोला व मुरली छपरा में ग्रामीणों के घरों में चला गया है। ग्रामीणों को बाहर निकालने के लिए नाव अत्यंत कम है।
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नौरंगा व भुवाल छपरा गांव के लोग करने लगे पलायन
दयाछपरा। गंगा उस पार बसे नौरंगा, भुवाल छपरा में गंगा की कटान से ग्रामीणों में दहशत है। भुवाल छपरा निवासी रामाकांत ठाकुर ने बताया कि अब तो चारों तरफ पानी हो गया है। बताया कि पानी के भीतर हो रहा कटान समझ में भी नहीं आता पानी का बुलबुला देख कर अंदाजा लगाया जा रहा है। जिसके भय से अब तक लल्लन यादव, भुनेश्वर ठाकुर आदि कई लोग अपना सामान निकाल कर घर खाली कर रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि अगर इसी तरह कटान बढ़ता रहा तो दो दिन के अन्दर बस्ती के कई घर कटान की भेंट चढ़ जाएगा।