बलिया में गंगा का कहर: पिछले साल 135 लोगों के डूबे थे मकान, इस बार भी बह न जाए प्रशासन की व्यवस्था का बांध
Ballia News: बलिया जिले के गांवों में हर साल बाढ़ के कहर से कई लोगों को बेघर होना पड़ता है। इस बार भी गंगा की बढ़ती रफ्तार से गांवों में तबाही का खतरा गहरा गया है।
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बाढ़ के दिनों में बलिया जिले के दक्षिणी छोर पर गंगा के साथ तमसा व टोंस नदी हर साल जमकर तबाही मचाती हैं। पिछले साल नौरंगा, भुआल छपरा व दूबेछरा में गंगा नदी के कारण भारी नुकसान हुआ था।
गंगा नदी दूबेछपरा गांव के करीब पहुंच गई है। जसोदा देवी कन्या विद्यालय दूबेछपरा से 8 मीटर की दूरी रह गई है। इस साल काटन हुई तो जसोदा देवी इंटर कॉलेज समेत उदई छपरा के 50 घर गंगा में विलीन हो जाएंगे। पूर्व प्रधान चंद्रकांत तिवारी का कहना है कि शासन की तरफ से तो हर साल कटानरोधी कार्य कराया जा रहा है, परंतु यहां के अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से कोई भी कार्य कटान रोकने में सक्षम नहीं है।
2016 की बाढ़ में कटे लोग अभी भी बंधे पर जीवन बसर कर रहे हैं। पिछले वर्ष भी नौरंगा में बाढ़ से बेघर हुए लोग बिहार बंधे पर शरण लिए हुए हैं। प्रशासन की तरफ से इन्हें अभी तक भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई है पिछले वर्ष 135 लोगों का मकान नदी में बह गए। यह लोग आज भी बिहार के बक्सर बंधे पर शरण लिए हुए हैं। बाढ़ इस क्षेत्र के लोगों के लिए नियति बन गई है। बाढ़ से हर साल क्षेत्र के लोग जूझते हैं लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं मिल सका है। गंगा नदी गाजीपुर की सीमा कोटवा नारायणपुर से लेकर सिताबदीयरा तक तबाही मचाती है।
शहर से सटे महावीर घाट व माल्देपुर में नदी साल दर साल आबादी के करीब आती जा रही है। माल्देपुर में कटानरोधी कार्य चल रहे हैं लेकिन महावीर घाट के सामने अभी कोई बचाव के उपाय नहीं किए जा रहे।
केवल 15 से 20 घर बचे
दया छपरा। बैरिया तहसील क्षेत्र के गंगा उस पार भगवानपुरा व चक्की नौरंगा 1970 में आबाद हुए। भगवानपुर मौजा के 500 एकड़ जमीन पर चक्की नौरंगा स्थापित हुआ। 2025 तक गंगा की बाढ़ में भगवानपुर मौजा समेत चक्की नौरंगा गांव विलिन हो चुका है। अब केवल 15 से 20 घर चक्की नौरंगा में बचे हुए है। चक्की नौरंगा में करीब 250 अधिक घर थे। पिछले साल आई बाढ़ में 75 प्रतिशत आबादी और जमीन नदी में समा गई।
2003, 2013, 2016 व 2019 में गंगा ने सबसे ज्यादा नुकसान किया
गंगा नदी ने 2003, 2013, 2016 व 2019 में सबसे ज्यादा नुकसान तटवर्ती इलाकों में पहुंचाया। जिसमें एनएच-31 पर भी खतरा बना है। मझौवां से लेकर दुबेछपरा तक 30 गांवों पर खतरा बना हुआ है। 2013 की बाढ़ में एनएच-31 के ऊपर से पानी गुजरने लगा था। उस समय मार्ग पर यातायात बंद हो गया था। 2016 में गीता प्रेस का बंधा कटने पर गोपालपुर गांव के दुबेछपरा व उदईपुर में नुकसान पहुंचाया था।
- नदियों से प्रभारित कुल गांव- 379
- कुल बाढ़ चौकी- 61
- कुल शरणालय- 72
एनएच-31 पर दस वर्षों से शरण लिए हुए हैं। लेकिन प्रशासन ने अब तक सुध नहीं ली। हर पल खतरा बना रहता है। बाढ़ के समय नींद भी हराम हो जाती है। जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारी केवल आश्वासन देते हैं। -राजन पासवान, दुबेछपरा
बाढ़ का सीजन आते ही रूह कांप जाती है। बंजारों से जिंदगी हो गई है। गांव कटने के बाद से अब बेटे-बेटियों की शादी भी इसी झोपड़ी से करनी मजबूरी है। शौच व नहाने में दिक्कत होती है। कोई सुनने वाला नहीं है। -प्रभावती देवी, दुबेछपरा
गांव में अच्छी खासी जिंदगी चल रही थी लेकिन बाढ़ ने सड़क पर लाकर छोड़ दिया। प्रशासनिक अमला दस वर्षों से केवल आश्वासन ही दे रहा है। इसी झोपड़ी में अपनी जिंदगी चल रही है। -लाल मुनि देवी
कटानरोधी परियोजनाओं की प्रगति
- सरयू तट पर मझवलिया-सोनबरसा तटबंध किमी 1.250 से 1.950 के मध्य 9.78 करोड़ से 51 प्रतिशत काम हुआ है।
- ग्राम समूह दूबेछपरा में 9.85 करोड़ से हो रहा काम 76 प्रतिशत हुआ है।
- गंगा नदी के बाएं किनारे सेमरिया, शिवपुर कपूर दियर, सेमरिया डेरा नारायण राय का डेरा व लगन टोला में 9.97 करोड़ से 80 प्रतिशत काम हुआ है।
- ग्राम समूह चक्की नौरंगा व जवैनिया में 9.98 करोड़ से 77 प्रतिशत काम हुआ है।
- नौरंगा व भगवानपुर में 24.97 करो़ड़ से 77 प्रतिशत काम हुआ।
क्या कहते हैं अधिकारी
गंगा व सरयू की कटान से गांवों को बचाने के लिए शासन की तरफ से परियोजनाओं पर काम तेजी से चल रहा है। अतिशीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। इसकी प्रतिदिन समीक्षा की जा रही है। कटान व बाढ़ के सुरक्षात्मक अन्य कार्य भी किए जा रहे हैं। बंधों की निगरानी के लिए कर्मचारियों की तैनाती की गई है।
-इं. संजय कुमार मिश्रा, एक्सईएन बाढ़ खंड