UP: 30 साल पुरानी एंबेसडर पर ढो रहे सवारी, दिमाग घुमा देगा निजी परमिट का ये खेल; परिवहन विभाग दे रहा बढ़ावा
Ballia News: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में 30 साल पुरानी एंबेसडर को सड़क पर दाैड़ाया जा रहा है। उसमें आधा दर्जन सवारी लादकर यात्रियों से मनमानी वसूली की जा रही है। परिवहन विभाग ऐसी गाड़ियों को निजी परमिट जारी कर रहा है।
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यातायात जागरूकता माह की शुरुआत हो गई है। परिवहन व यातायात विभाग जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करने का काम कर रहा हैं। वहीं सड़कों पर बिना फिटनेस वह परमिट के डग्गामार वाहन बेरोक टोक के दौड़ रही है। प्राइवेट वाहन स्टैंड खोरीपाकड़ से बक्सर के बीच 270 से ऊपर एंबेसडर कार निजी परमिट पर सवारी ढोने का काम करती है।
दो से तीन दिन पर नंबर आता है। कुछ का रेलवे स्टेशन से संचालन होता है। प्रशासन की लापरवाही से ये सड़क दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रही है। आए दिन बड़ी दुर्घटनाएं होने के बावजूद भी जिम्मेदारों की नींद नहीं टूट रही है।
जनपद में जनवरी से अब तक 231 से अधिक सड़क दुघर्टना में 180 लोगों की असमय मौत हो चुकी है। चंद पैसा कमाने के लालच में सड़कों पर वाहन मालिकों द्वारा यातायात नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। परिवहन विभाग भी इसका बढ़ावा दे रहा है। 20 से 30 वर्ष पुरानी कार व जीप अनफिट होने के बावजूद परमिट जारी कर दे रहा है। इसकी आड़ में अनफिट वाहन सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं।
जान के साथ खिलवाड़
बलिया-बक्सर रूट में एंबेसडर कार के एक चालक ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि पूरे देश में जो गाड़ी नहीं चलती है, वह बलिया में सड़कों पर चलती हुई दिखाई देगी। एंबेसडर कार की कंपनी कई वर्ष पूर्व बंद हो गई। जिले की सड़कों पर 40 वर्ष पुरानी कार व जीप सवारी लेकर चल रही है।
जिले में पुरानी कार का श्रृंखला होने के बावजूद विभाग ने किसी को विंटेज नंबर जारी नहीं है। 30 से 50 हजार रुपया खर्च कर लोकल मिस्त्री कार को नया रूप दे देते हैं। बिचौलियों के माध्यम से 14 हजार रुपया खर्च करने पर बिना गाड़ी को देखे व जांच किए परिवहन विभाग परमिट जारी कर देता है। निजी परमिट पर सवारी ढोने का काम करती है। पुलिस सबकुछ जानने के बावजूद कार्रवाई नहीं करता है।
शहर में दौड़ती बेरोक टोक डग्गामार वाहन
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की कौन बात करे शहरी क्षेत्र में डग्गामार ओवर लोड गाड़ियां सड़कों पर बेरोकटोक दौड़ रही है। सभी वाहन स्टैंडों से अनफिट जीप, कार, विक्रम टेंपो, बस बेखौफ सवारी ढ़ोने का काम रहे हैं। जांच के नाम पर कभी कभार स्कूल बस की जांच करके खानापूर्ति कर लेते हैं।
परिवहन विभाग के नियम अनुसार गाड़ियों का फिटनेस प्रमाण पत्र रजिस्ट्रेशन के समय दिया जाता है। जो दो साल के लिए मान्य रहता है। इसके बाद प्रति वर्ष गाड़ी का फिटनेस जांच कराना अनिवार्य है। एआरटीओ द्वारा ऐसे वाहनों को जब्त कर कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन स्टॉफ की कमी का बहाना बनाकर औचक निरीक्षण से इंकार करते हैं।
जिले में 20 से 25 कार चलती है। उन्हे कार्यालय से परमिट जारी नहीं होता है। आन लाइन रिनवल शुल्क जमा करते होगें। समय-समय पर चालान किया जाता है। - अरूण राय, एआरटीओ बलिया।