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Ballia News: सहालग में दस रुपये की एक गड्डी मिल रही 1400 रुपये की
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नगर के शहीद पार्क चौक स्थित बिक्री के लिए रखा गया नोट का माला।संवाद
बलिया। सहालग का सीजन चल रहा है। इसमें पंडित, पुरोहित तथा पवनी को नेग दिया जाता है। इसके लिए लोग फुटकर में रुपये रखते हैं। लेकिन बैंकों में करेंसी की कमी हालांकि बाजार में आराम से करेंसी मिल रही है। इससे दुकानदार मुनाफा कमा रहे। दस रुपये की एक हजार की गड्डी 1400 रुपये में बेंच रहे।
दुकानदार रुपयों की गड्डी के लिए 20 प्रतिशत तक मुनाफा वसूल रहे हैं। नगर के विभिन्न क्षेत्रों में करेंसी की छह से ज्यादा दुकानें रोज लगती हैं। वहां हर मूल्य वर्ग की करेंसी उपलब्ध रहती है। दुकानों पर नोटों का प्रदर्शन भी किया जाता है। नोट की माला बनाकर दुकान के सामने टांग दिया जाता है। इसमें दस रुपये से लगाकर पांच सौ रुपये की नोटों की माला है। जिनके घर शादी समारोह अथवा अनुष्ठान हैं, वह इन दुकानों से करेंसी खरीदते हैं। लोगों का कहना है कि बाजार की दुकानों से करेंसी खरीदना काफी महंगा सौदा है। दस रुपये की एक गड्डी के लिए यानी एक हजार रुपये के लिए 400 रुपये अतिरिक्त देने पड़ रहे।
वहीं बीस की गड्डी पर 350, पचास की गड्डी पर भी 350 तथा एक सौ की गड्डी पर 300 रुपया अलग से देना पड़ रहा है। इस प्रकार देखा जाए तो करेंसी खरीद पर 20 प्रतिशत से अधिक का कमीशन देना लोगों की मजबूरी बन गई है। नोटों की माला खरीदने पर कमीशन के साथ बनवाई भी देना पड़ता है। इससे ग्राहकों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। बाजार में महंगी करेंसी के कारण लोग बैंकों का भी रूख करते हैं। लेकिन सभी बैंकों से करेंसी उपलब्ध नहीं हो पाती है। जो बैंक करेंसी देते भी हैं तो मांग के सापेक्ष कम ही मिलती है। इसको लेकर बैंक कर्मियों व उपभोक्ताओं में नोकझोंक तक की नौबत भी आ जाती है। इस समय करेंसी के लिए नोकझोंक का होना आम हो गया है।
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दूल्हों को नोटाें की माला पहनना हुआ महंगा
विवाह में दूल्हे को नोटों की माला पहना कर ससुराल भेजना काफी गर्व का विषय माना जाता है। यह रिवाज दूल्हे पक्ष को समृद्ध बताने का एक एक तरीका जैसा होता है। लोग अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार दूल्हे को नोटों की माला पहनाते हैं। धनवान उच्च मूल्य की करेंसी की माला पहनाते हैं। वहीं जिनकी समार्थ्य नहीं है वे अपने बेटे को दस की करेंसी की माला पहना कर ही विदा कर देते हैं। लेकिन आजकल दूल्हे को नोटों की माला पहनना उनके नसीब में नहीं है। क्योंकि करेंसी काफी महंगी हो गई है। जो लोग करेंसी की माला पहना भी रहे हैं तो वह कम मूल्य वर्ग की होती है।
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स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में आरबीआई से करेंसी आती है। आरबीआई अपने स्तर से करेंसी भेजती है। करेंसी स्टेट बैंक से जिले के अन्य बैंकों में वितरित की जाती है। खाता धारकों को करेंसी दी जाती है। लेकिन उनके डिमांड के सापेक्ष उन्हें करेंसी नहीं मिल पाती है। बाजार में करेंसी कहां से पहुंचती है यह पता नहीं है। बैंक से बाजार के किसी भी दुकानदार को करेंसी नहीं दी जाती है।
विनय पाण्डेय
प्रबंधक, स्टेट बैंक, मुख्य शाखा, बलिया।
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दुकानदार रुपयों की गड्डी के लिए 20 प्रतिशत तक मुनाफा वसूल रहे हैं। नगर के विभिन्न क्षेत्रों में करेंसी की छह से ज्यादा दुकानें रोज लगती हैं। वहां हर मूल्य वर्ग की करेंसी उपलब्ध रहती है। दुकानों पर नोटों का प्रदर्शन भी किया जाता है। नोट की माला बनाकर दुकान के सामने टांग दिया जाता है। इसमें दस रुपये से लगाकर पांच सौ रुपये की नोटों की माला है। जिनके घर शादी समारोह अथवा अनुष्ठान हैं, वह इन दुकानों से करेंसी खरीदते हैं। लोगों का कहना है कि बाजार की दुकानों से करेंसी खरीदना काफी महंगा सौदा है। दस रुपये की एक गड्डी के लिए यानी एक हजार रुपये के लिए 400 रुपये अतिरिक्त देने पड़ रहे।
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वहीं बीस की गड्डी पर 350, पचास की गड्डी पर भी 350 तथा एक सौ की गड्डी पर 300 रुपया अलग से देना पड़ रहा है। इस प्रकार देखा जाए तो करेंसी खरीद पर 20 प्रतिशत से अधिक का कमीशन देना लोगों की मजबूरी बन गई है। नोटों की माला खरीदने पर कमीशन के साथ बनवाई भी देना पड़ता है। इससे ग्राहकों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। बाजार में महंगी करेंसी के कारण लोग बैंकों का भी रूख करते हैं। लेकिन सभी बैंकों से करेंसी उपलब्ध नहीं हो पाती है। जो बैंक करेंसी देते भी हैं तो मांग के सापेक्ष कम ही मिलती है। इसको लेकर बैंक कर्मियों व उपभोक्ताओं में नोकझोंक तक की नौबत भी आ जाती है। इस समय करेंसी के लिए नोकझोंक का होना आम हो गया है।
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दूल्हों को नोटाें की माला पहनना हुआ महंगा
विवाह में दूल्हे को नोटों की माला पहना कर ससुराल भेजना काफी गर्व का विषय माना जाता है। यह रिवाज दूल्हे पक्ष को समृद्ध बताने का एक एक तरीका जैसा होता है। लोग अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार दूल्हे को नोटों की माला पहनाते हैं। धनवान उच्च मूल्य की करेंसी की माला पहनाते हैं। वहीं जिनकी समार्थ्य नहीं है वे अपने बेटे को दस की करेंसी की माला पहना कर ही विदा कर देते हैं। लेकिन आजकल दूल्हे को नोटों की माला पहनना उनके नसीब में नहीं है। क्योंकि करेंसी काफी महंगी हो गई है। जो लोग करेंसी की माला पहना भी रहे हैं तो वह कम मूल्य वर्ग की होती है।
स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में आरबीआई से करेंसी आती है। आरबीआई अपने स्तर से करेंसी भेजती है। करेंसी स्टेट बैंक से जिले के अन्य बैंकों में वितरित की जाती है। खाता धारकों को करेंसी दी जाती है। लेकिन उनके डिमांड के सापेक्ष उन्हें करेंसी नहीं मिल पाती है। बाजार में करेंसी कहां से पहुंचती है यह पता नहीं है। बैंक से बाजार के किसी भी दुकानदार को करेंसी नहीं दी जाती है।
विनय पाण्डेय
प्रबंधक, स्टेट बैंक, मुख्य शाखा, बलिया।