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सीएचसी मेंे न डाक्टर न दवा
Ballia
Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
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सिकंदरपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर कर्मचारियों की कमी और दवा की अनुपलब्धता के चलते उपचार के लिए आए मरीजों को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। क्षेत्रीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से कई बार इसकी शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसको लेकर क्षेत्रीय लोगों में काफी आक्रोश है।
करीब दो दशक पहले जब यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बना था तो क्षेत्रीय लोगों में इस बात को लेकर काफी खुशी थी कि उपचार के लिए अब दर-दर की ठोकरें नहीं खानी पड़ेगी। धीरे-धीर सीएचसी की स्थिति बदतर होती चली गई। यहां न तो चिकित्सक ही उपलब्ध रहते हैं न ही दवाओं का कोई ठिकाना है। जो चिकित्सक यहां उपलब्ध मिलते हैं वो सामान्य सी दवा भी बाहर से लेने को कहते हैं। शासन के अनुसार इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर छह चिकित्सक, एक चीफ फार्मासिस्ट, एक फार्मास्टि, एक वरिष्ठ लिपिक, दो लिपिक, एक डेंटल कंपाउंडर, एक नेत्र कंपाउंडर के साथ एक ओटी, एक वार्ड ब्वाय और एक स्वीपर तैनात हैं। प्रतिदिन ओपीडी में मरीजों की संख्या तीन से साढ़े तीन सौ तक होती है। एक साल के आंकड़े पर नजर डालें तो सीएचसी के ओपीडी में करीब 65 हजार लोगों का उपचार होता है। एक साल में भर्ती मरीजों की संख्या चार हजार तक पहुंच जाती है। जबकि एक साल में इमरजेंसी में लगभग साढ़े सात हजार मरीज आते हैं। इस सीएचसी पर आधुनिक एक्सरे मशीन और अन्य जांच की मशीनें लगी हैं। लेकिन रखरखाव के अभाव में यह खराब पड़ी हैं। एक्सरे टेक्निशियन राजकमल वर्मा की मानें तो ट्रांसफार्मर और नियमित बिजली की आपूर्ति नहीं होने से मरीजों को मजबूरी में एक्सरे के लिए बाहर भेजना पड़ता है। इस बाबत सीएचसी अधीक्षक डा. अजय तिवारी ने बताया कि कर्मचारियों की कमी के साथ लोकल कर्मचारी होने के नाते समय से उपस्थित नहीं हो पाते हैं। इसकी लिखित सूचना हर पखवारे कर्मचारी चिकित्सकों को दी जाती है। लेकिन इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है। साथ ही अन्य कमियों को पूरा करने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
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करीब दो दशक पहले जब यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बना था तो क्षेत्रीय लोगों में इस बात को लेकर काफी खुशी थी कि उपचार के लिए अब दर-दर की ठोकरें नहीं खानी पड़ेगी। धीरे-धीर सीएचसी की स्थिति बदतर होती चली गई। यहां न तो चिकित्सक ही उपलब्ध रहते हैं न ही दवाओं का कोई ठिकाना है। जो चिकित्सक यहां उपलब्ध मिलते हैं वो सामान्य सी दवा भी बाहर से लेने को कहते हैं। शासन के अनुसार इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर छह चिकित्सक, एक चीफ फार्मासिस्ट, एक फार्मास्टि, एक वरिष्ठ लिपिक, दो लिपिक, एक डेंटल कंपाउंडर, एक नेत्र कंपाउंडर के साथ एक ओटी, एक वार्ड ब्वाय और एक स्वीपर तैनात हैं। प्रतिदिन ओपीडी में मरीजों की संख्या तीन से साढ़े तीन सौ तक होती है। एक साल के आंकड़े पर नजर डालें तो सीएचसी के ओपीडी में करीब 65 हजार लोगों का उपचार होता है। एक साल में भर्ती मरीजों की संख्या चार हजार तक पहुंच जाती है। जबकि एक साल में इमरजेंसी में लगभग साढ़े सात हजार मरीज आते हैं। इस सीएचसी पर आधुनिक एक्सरे मशीन और अन्य जांच की मशीनें लगी हैं। लेकिन रखरखाव के अभाव में यह खराब पड़ी हैं। एक्सरे टेक्निशियन राजकमल वर्मा की मानें तो ट्रांसफार्मर और नियमित बिजली की आपूर्ति नहीं होने से मरीजों को मजबूरी में एक्सरे के लिए बाहर भेजना पड़ता है। इस बाबत सीएचसी अधीक्षक डा. अजय तिवारी ने बताया कि कर्मचारियों की कमी के साथ लोकल कर्मचारी होने के नाते समय से उपस्थित नहीं हो पाते हैं। इसकी लिखित सूचना हर पखवारे कर्मचारी चिकित्सकों को दी जाती है। लेकिन इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है। साथ ही अन्य कमियों को पूरा करने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
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