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जातिगत-दलगत वोटों पर है भरोसा
Ballia
Updated Sun, 27 Apr 2014 05:30 AM IST
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बलिया। बलिया संसदीय सीट पर छिड़े चुनावी संग्राम में उम्मीदवार वोटों की जोड़ तोड़ में जुट गए हैं। इसके लिए वही पुराने तरीके अपनाए जा रहे हैं, जो हमेशा से सियासतदार अपनाते रहे हैं। कहीं जाति व धर्म की बात की जा रही है, तो कहीं धनबल व बाहुबल के आधार पर मत बटोरने की कोशिश जारी है। सभी दल इसके लिए गांव-गांव में सियासी गोटी बिछाने में जुटे हैं।
समाजवादी पार्टी के मौजूदा सांसद व उम्मीदवार नीरज शेखर के वोट का जनाधार मुख्य रूप से मुस्लिम व यादव मतदाता माने जा रहे हैं। साथ ही क्षत्रिय मतदाताओं में भी उनकी घुसपैठ है। उधर बसपा उम्मीदवार इंजीनियर वीरेंद्र पाठक उर्फ टुन जी का जनाधार मुख्य रूप से दलित व अन्य पिछड़ी जातियां हैं। इनकी थोड़ी बहुत घुसपैठ ब्राह्मण मतदाताओं में भी है। भाजपा उम्मीदवार भरत सिंह के पास वैश्य बिरादरी व अगड़ों का मुख्य रूप से वोट माना जा रहा है। पहली बार आधी आबादी से कांग्रेस की उम्मीदवार बनी डा. सुधा राय को महिला मतदाता व भूमिहार मतों पर भरोसा है। इसके साथ चुनाव मैदान में उतरे कौमी एकता दल के उम्मीदवार व पूर्व सांसद अफजाल अंसारी को मुसलमान तथा राजभर वोटों के साथ ही अन्य बिरादरी के मतों में सेंधमारी करने की बात कही जा रही है।
बलिया लोकसभा की बात करें तो इसमें मुख्य रूप से बैरिया, बलिया, फेफना, मुहम्मदाबाद व जहूराबाद विधानसभाएं आती हैं। इन विधानसभाओं में चार सीटों पर सपा का पहले से ही कब्जा है। सपा इस सीट को अपनी प्रतिष्ठा बना कर लड़ रही है।
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खास यह भी है कि इस सीट पर चुनाव लड़ रहे पूर्व
प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर दो बार चुनाव जीत
चुके हैं। पूर्व में चंद्रशेखर भी इस सीट से आठ बार सांसद चुने जा चुके हैं। उधर इस सीट पर जीत से कुछ फलांग दूर रही
भाजपा व बसपा भी इसे हथियाने में जुटी हैं। उधर आधी आबादी से पहली बार उम्मीदवार बनी विकास पुरुष स्व. कल्पनाथ राय की पत्नी डा. सुधा राय भी इस सीट पर पंजा का मुहर लगाना चाह रही हैं। अब देखना है कि सियासी ऊंट किस करवट बैठ रहा है। अभी से मतदाताओं की कयासबाजी शुरू है।
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समाजवादी पार्टी के मौजूदा सांसद व उम्मीदवार नीरज शेखर के वोट का जनाधार मुख्य रूप से मुस्लिम व यादव मतदाता माने जा रहे हैं। साथ ही क्षत्रिय मतदाताओं में भी उनकी घुसपैठ है। उधर बसपा उम्मीदवार इंजीनियर वीरेंद्र पाठक उर्फ टुन जी का जनाधार मुख्य रूप से दलित व अन्य पिछड़ी जातियां हैं। इनकी थोड़ी बहुत घुसपैठ ब्राह्मण मतदाताओं में भी है। भाजपा उम्मीदवार भरत सिंह के पास वैश्य बिरादरी व अगड़ों का मुख्य रूप से वोट माना जा रहा है। पहली बार आधी आबादी से कांग्रेस की उम्मीदवार बनी डा. सुधा राय को महिला मतदाता व भूमिहार मतों पर भरोसा है। इसके साथ चुनाव मैदान में उतरे कौमी एकता दल के उम्मीदवार व पूर्व सांसद अफजाल अंसारी को मुसलमान तथा राजभर वोटों के साथ ही अन्य बिरादरी के मतों में सेंधमारी करने की बात कही जा रही है।
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बलिया लोकसभा की बात करें तो इसमें मुख्य रूप से बैरिया, बलिया, फेफना, मुहम्मदाबाद व जहूराबाद विधानसभाएं आती हैं। इन विधानसभाओं में चार सीटों पर सपा का पहले से ही कब्जा है। सपा इस सीट को अपनी प्रतिष्ठा बना कर लड़ रही है।
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खास यह भी है कि इस सीट पर चुनाव लड़ रहे पूर्व
प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर दो बार चुनाव जीत
चुके हैं। पूर्व में चंद्रशेखर भी इस सीट से आठ बार सांसद चुने जा चुके हैं। उधर इस सीट पर जीत से कुछ फलांग दूर रही
भाजपा व बसपा भी इसे हथियाने में जुटी हैं। उधर आधी आबादी से पहली बार उम्मीदवार बनी विकास पुरुष स्व. कल्पनाथ राय की पत्नी डा. सुधा राय भी इस सीट पर पंजा का मुहर लगाना चाह रही हैं। अब देखना है कि सियासी ऊंट किस करवट बैठ रहा है। अभी से मतदाताओं की कयासबाजी शुरू है।