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698 रोजगार सेवकों का दशहरा गया फीका, अब दीपावली की बारी
Updated Fri, 06 Oct 2017 11:19 PM IST
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बलिया। हर साल की भांति इस साल भी जनपद के 698 रोजगार सेवकों का दशहरा तो फीका गया ही, दीवाली भी दिवालिये की तरह मनाने को मजबूर होंगे। रोजगार सेवकों का 14 महीनों से मानदेय बकाया चल रहा है। जबकि 2008 में नियुक्ति के समय ही तत्कालीन प्रमुख सचिव रोहित नंदन ने फरमान जारी किया था कि रोजगार सेवकों का मानदेय प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में अनिवार्य रूप से उपलब्ध करा दिया जाय। अन्यथा इसकी जिम्मेदारी संबंधित मुख्य विकास अधिकारी की होगी। लेकिन अफसोस नौ सालों में न बसपा, न सपा और अब भाजपा भी इस शासदनादेश को अमलीजामा पहनाने में नाकाम साबित हो रही है। ऐसे में रोजगार सेवक भुखमरी व आर्थिक संकट से जूझ रहे है।
मनरेगा के कार्य में पारदर्शिता लाने के लिए गांव-गांव में वर्ष 2009 में रोजगार सेवकों का नया पद सृजित किया गया। उस दरम्यान पूरे जनपद में कुल 833 रोजगार सेवकों की मात्र दो हजार सामान्य मानदेय पर नियुक्ति हुई। जो धीरे-धीरे बढ़कर सपा सरकार में एक नवंबर 2016 से छह हजार रुपये हो गया। इसबीच कई रोजगार सेवक मानदेय के अभाव में मौत के गले लगा चुके हैं तो कइयों ने रोजीरोटी के लिए दूसरी तलाश कर ली। वर्तमान में 698 रोजगार सेवक तैनात हैं। लेकिन अफसोस छह हजार रुपये मानदेय अभी तक किसी भी रोजगार सेवक को नसीब नहीं हुआ। क्योंकि रोजगार सेवकों का मानदेय पहले से ही 14 महीना बकाया चल रहा है। ऐसे में हर साल की तरह इस साल भी दशहरा फीका हो गया। रोजगार सेवक मनोज कुमार ने बताया कि क्या सपा, क्या भाजपा। सब एक थाली के चट्टे-बट्टे हैं। इनकी नीति बस लालीपॉप देकर अपनी रोटी सेंकना। वहीं सांसद गांव ओझवलिया के रोजगार सेवक लक्ष्मण प्रसाद ने बताया कि बडे़-बड़े अधिकारियों तथा नेताओं को क्या फर्क पड़ता है कि उनकी कारस्तानी के चलते हम गरीब रोजगार सेवकों को भुखमरी का दंश झेलना पड़ रहा है। उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।
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मनरेगा के कार्य में पारदर्शिता लाने के लिए गांव-गांव में वर्ष 2009 में रोजगार सेवकों का नया पद सृजित किया गया। उस दरम्यान पूरे जनपद में कुल 833 रोजगार सेवकों की मात्र दो हजार सामान्य मानदेय पर नियुक्ति हुई। जो धीरे-धीरे बढ़कर सपा सरकार में एक नवंबर 2016 से छह हजार रुपये हो गया। इसबीच कई रोजगार सेवक मानदेय के अभाव में मौत के गले लगा चुके हैं तो कइयों ने रोजीरोटी के लिए दूसरी तलाश कर ली। वर्तमान में 698 रोजगार सेवक तैनात हैं। लेकिन अफसोस छह हजार रुपये मानदेय अभी तक किसी भी रोजगार सेवक को नसीब नहीं हुआ। क्योंकि रोजगार सेवकों का मानदेय पहले से ही 14 महीना बकाया चल रहा है। ऐसे में हर साल की तरह इस साल भी दशहरा फीका हो गया। रोजगार सेवक मनोज कुमार ने बताया कि क्या सपा, क्या भाजपा। सब एक थाली के चट्टे-बट्टे हैं। इनकी नीति बस लालीपॉप देकर अपनी रोटी सेंकना। वहीं सांसद गांव ओझवलिया के रोजगार सेवक लक्ष्मण प्रसाद ने बताया कि बडे़-बड़े अधिकारियों तथा नेताओं को क्या फर्क पड़ता है कि उनकी कारस्तानी के चलते हम गरीब रोजगार सेवकों को भुखमरी का दंश झेलना पड़ रहा है। उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।
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