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पीएम आवास के आंवटन में गड़बड़ी की पुष्टि
Updated Sat, 09 Dec 2017 10:53 PM IST
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दुबहड़ ब्लॉक के घोड़हरा गांव में प्रधानमंत्री आवास के आवंटन में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। सीडीओ के निर्देश पर जिला प्रशिक्षण अधिकारी ने जांच रिपोर्ट सौंपी है। अमर उजाला ने सात नवंबर के अंक में जाति बदलकर आवास आवंटन करने का खुलासा किया था और जांच शुरू हुई थी।
वर्ष 2014-15 में भारत सरकार ने इंदिरा आवास के स्थान पर प्रधानमंत्री आवास योजना को लागू किया गया और लाभार्थियों के चयन की कार्रवाई सेक (सोशल इकॉन्मिक कास्ट कैलकुलेशन) डाटा से करने का प्रावधान किया गया। लेकिन जिले में सारी व्यवस्थाओं को दर किनार कर अधिकारियों व कर्मचारियों ने मनमाने तरीके से आवास योजना को लागू करके पात्र लाभार्थियों के स्थान पर अपात्रों को आवास देने का खूब खेल किया। करीब एक माह पहले दुबहड़ ब्लाक के घोड़हरा गांव में जाति बदलकर प्रधानमंत्री आवास देने का सामने आया था। घोड़हरा गांव के भोला राम व हरेराम ने सीडीओ को शिकायती पत्र देकर बताया कि उनका नाम सेक डाटा में था, लेकिन आवास देने के लिए सुविधा शुल्क की मांग की गई। गरीब होने के कारण नहीं दे सका तो उनके नाम पर गांव के पिछड़ी जाति के भोला व हरेराम को आवास आवंटित करते हुए पहली किश्त भी खाते में भेज दी गई है। सीडीओ ने मामले की जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश जिला ग्राम्य विकास संस्थान के जिला प्रशिक्षण अधिकारी सुनील कुमार को दिया था। जांच में सामने आया कि सेक डाटा में शामिल हरेराम को वर्ष 2010-11 में इंदिरा आवास उपलब्ध कराया गया है और इसके लिए उसे 45 हजार की धनराशि भी दी जा चुकी है। इसके बावजूद इस लाभार्थी का पंजीयन प्रधानमंत्री आवास के लिए लिए किया गया जो नहीं होना चाहिए था। इसके स्थान पर गांव के ही दूसरे हरेराम पुत्र रामनाथ तुरहा के खाते में प्रधानमंत्री आवास की धनराशि भेजी गई जो कि गलत है। जांच रिपोर्ट पर सीडीओ ने डीआरडीए के पीडी को कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
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कोट
दुबहड़ ब्लाक के घोड़हरा गांव में जाति बदलकर आवास देने के मामले की जांच में गड़बड़ी सामने आई है। इस मामले में डीआरडीए के पीडी को कार्रवाई का निर्देश दिया गया है।
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= संतोष कुमार, सीडीओ, बलिया।
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वर्ष 2014-15 में भारत सरकार ने इंदिरा आवास के स्थान पर प्रधानमंत्री आवास योजना को लागू किया गया और लाभार्थियों के चयन की कार्रवाई सेक (सोशल इकॉन्मिक कास्ट कैलकुलेशन) डाटा से करने का प्रावधान किया गया। लेकिन जिले में सारी व्यवस्थाओं को दर किनार कर अधिकारियों व कर्मचारियों ने मनमाने तरीके से आवास योजना को लागू करके पात्र लाभार्थियों के स्थान पर अपात्रों को आवास देने का खूब खेल किया। करीब एक माह पहले दुबहड़ ब्लाक के घोड़हरा गांव में जाति बदलकर प्रधानमंत्री आवास देने का सामने आया था। घोड़हरा गांव के भोला राम व हरेराम ने सीडीओ को शिकायती पत्र देकर बताया कि उनका नाम सेक डाटा में था, लेकिन आवास देने के लिए सुविधा शुल्क की मांग की गई। गरीब होने के कारण नहीं दे सका तो उनके नाम पर गांव के पिछड़ी जाति के भोला व हरेराम को आवास आवंटित करते हुए पहली किश्त भी खाते में भेज दी गई है। सीडीओ ने मामले की जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश जिला ग्राम्य विकास संस्थान के जिला प्रशिक्षण अधिकारी सुनील कुमार को दिया था। जांच में सामने आया कि सेक डाटा में शामिल हरेराम को वर्ष 2010-11 में इंदिरा आवास उपलब्ध कराया गया है और इसके लिए उसे 45 हजार की धनराशि भी दी जा चुकी है। इसके बावजूद इस लाभार्थी का पंजीयन प्रधानमंत्री आवास के लिए लिए किया गया जो नहीं होना चाहिए था। इसके स्थान पर गांव के ही दूसरे हरेराम पुत्र रामनाथ तुरहा के खाते में प्रधानमंत्री आवास की धनराशि भेजी गई जो कि गलत है। जांच रिपोर्ट पर सीडीओ ने डीआरडीए के पीडी को कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
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दुबहड़ ब्लाक के घोड़हरा गांव में जाति बदलकर आवास देने के मामले की जांच में गड़बड़ी सामने आई है। इस मामले में डीआरडीए के पीडी को कार्रवाई का निर्देश दिया गया है।
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= संतोष कुमार, सीडीओ, बलिया।