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किसी भी सीट पर नही जीता भासपा प्रत्याशी
Updated Sat, 02 Dec 2017 12:05 AM IST
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बलिया। विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने निकाय चुनाव में अपनी अलग राह चुनी थी। भासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने विद्रोही तेवर अख्तियार करते हुए जनपद के आधा दर्जन से अधिक सीटों पर भासपा के प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन उनका विद्रोह काम नहीं आया और किसी सीट पर पार्टी प्रत्याशी को जीत हासिल नहीं हो सकी।
निकाय चुनाव में भाजपा से सीटों को लेकर तालमेल नहीं बनने से खफा भासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा को सहयोग की बजाय अपनी पार्टी के प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा था। इसके लिए ओमप्रकाश राजभर ने जनपद के सभी प्रमुख निकायों में पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में जाकर जनसभाएं भी की थी। लेकिन सहतवार को छोड़ दिया जाए तो किसी भी निकाय में भासपा प्रत्याशी लड़ाई में नजर नहीं आए। राजभर मतों को सहेजने में सफल नहीं हो सके। निकाय चुनाव में किसी प्रत्याशी के सिर ताज सजने का सपना पूरा नहीं हो सका। ऐसे में चुनाव संपन्न होने के बाद ओमप्रकाश राजभर को लेकर भाजपा के आलाकमान के रुख पर सभी की निगाहें टिक गई हैं।
मालूम हो कि वर्तमान में ओ्मप्रकाश राजभर प्रदेश की भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। लेकिन निकाय चुनाव संपन्न होने के बाद विद्रोही तेवर का उन्हें खामियाजा उठाना पड़ सकता है। इसकी चर्चाएं अब जोरों पर होने लगी हैं।
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निकाय चुनाव में भाजपा से सीटों को लेकर तालमेल नहीं बनने से खफा भासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा को सहयोग की बजाय अपनी पार्टी के प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा था। इसके लिए ओमप्रकाश राजभर ने जनपद के सभी प्रमुख निकायों में पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में जाकर जनसभाएं भी की थी। लेकिन सहतवार को छोड़ दिया जाए तो किसी भी निकाय में भासपा प्रत्याशी लड़ाई में नजर नहीं आए। राजभर मतों को सहेजने में सफल नहीं हो सके। निकाय चुनाव में किसी प्रत्याशी के सिर ताज सजने का सपना पूरा नहीं हो सका। ऐसे में चुनाव संपन्न होने के बाद ओमप्रकाश राजभर को लेकर भाजपा के आलाकमान के रुख पर सभी की निगाहें टिक गई हैं।
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मालूम हो कि वर्तमान में ओ्मप्रकाश राजभर प्रदेश की भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। लेकिन निकाय चुनाव संपन्न होने के बाद विद्रोही तेवर का उन्हें खामियाजा उठाना पड़ सकता है। इसकी चर्चाएं अब जोरों पर होने लगी हैं।
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