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सांस्कारिक लोगों की सृजनशील भाषा है भोजपुरी
Updated Sun, 08 Oct 2017 11:39 PM IST
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ूर। भोजपुरी गंवारो की भाषा नहीं , सांस्कारिक लोगों की सृजनशील भाषा है । इसकी मिठास और अभिव्यक्ति की भाषाई क्षमता का कहीं और सानी नहीं है। इसके आकर्षण का आलम यह है कि एक बार जिसके कानों में आवाज जाती है ,वह भोजपुरी की मुरीद हो जाता है।
यह विचार गोष्ठी क्षेत्र की श्री हरिवंश बाबा इंटर कॉलेज पूर के प्रांगण में प्रगतिशील भोजपुरी समाज द्वारा आयोजित भोजपुरी भाषा दशा व दिशा विषयक विचार गोष्ठी में पर चर्चा के दौरान उभर कर सामने आया। मुख्य वक्ता रविंद्र यादव ने कहा कि किसी समाज और समुदाय की भाषा व संस्कृति को कुचल देना, उस समाज को जहर देने के समान होता है । उन्होंने कहा कि यह विडंबना नहीं तो और क्या है की आध्यात्मिकता से सराबोर भोजपुरी क्षेत्र की महान परंपरा और गौरव की प्रतीक भोजपुरी को आज तक संवैधानिक मान्यता तक नहीं मिली। प्राचार्य विनोद तिवारी ने कहा कि भोजपुरी भाषा हमारी काशी संस्कृति की देन है, जो दुनिया को दिशा ना देकर उपेक्षा के कारण खुद दिशाहीन है। इस मौके पर ओम प्रकाश ने कहा कि भोजपुरी क्षेत्र के गौरव की वापसी के लिए मातृभाषा भोजपुरी को सही मौका मिले इसके लिए सबको प्रयास करने की जरूरत है। गोष्ठी को संबोधित करने वालों में मुख्य रुप से हृदयानंद तिवारी, उमेश तिवारी ,रविंद्र प्रताप सिंह, दिलीप सिंह ,तेज बहादुर सिंह रमाकांत यादव ,आदि रहे। इस गोष्ठी की अध्यक्षता असीम कुमार सिंह ने किया और संचालन विनोद कुमार तिवारी ने।
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यह विचार गोष्ठी क्षेत्र की श्री हरिवंश बाबा इंटर कॉलेज पूर के प्रांगण में प्रगतिशील भोजपुरी समाज द्वारा आयोजित भोजपुरी भाषा दशा व दिशा विषयक विचार गोष्ठी में पर चर्चा के दौरान उभर कर सामने आया। मुख्य वक्ता रविंद्र यादव ने कहा कि किसी समाज और समुदाय की भाषा व संस्कृति को कुचल देना, उस समाज को जहर देने के समान होता है । उन्होंने कहा कि यह विडंबना नहीं तो और क्या है की आध्यात्मिकता से सराबोर भोजपुरी क्षेत्र की महान परंपरा और गौरव की प्रतीक भोजपुरी को आज तक संवैधानिक मान्यता तक नहीं मिली। प्राचार्य विनोद तिवारी ने कहा कि भोजपुरी भाषा हमारी काशी संस्कृति की देन है, जो दुनिया को दिशा ना देकर उपेक्षा के कारण खुद दिशाहीन है। इस मौके पर ओम प्रकाश ने कहा कि भोजपुरी क्षेत्र के गौरव की वापसी के लिए मातृभाषा भोजपुरी को सही मौका मिले इसके लिए सबको प्रयास करने की जरूरत है। गोष्ठी को संबोधित करने वालों में मुख्य रुप से हृदयानंद तिवारी, उमेश तिवारी ,रविंद्र प्रताप सिंह, दिलीप सिंह ,तेज बहादुर सिंह रमाकांत यादव ,आदि रहे। इस गोष्ठी की अध्यक्षता असीम कुमार सिंह ने किया और संचालन विनोद कुमार तिवारी ने।
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