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तीन दशक में निष्क्रिय हो गईं 77 सहकारी समितियां

Wed, 19 Jan 2022 11:30 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 19 Jan 2022 11:30 PM IST
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77 cooperatives became dormant in three decades
बलिया। जिले में करीब ढाई दशक से सहकारी समितियां बेदमपड़ी हैं। हालांकि समय-समय पर सरकार की ओर से इन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने का प्रयास किया गया लेकिन वह भी कारगर नहीं हो सका। शुरुआत में प्रत्येक न्याय पंचायत में एक सहकारी समिति का गठन किया गया। वर्ष 1990 तक जिले में कुल 223 सहकारी समितियों का संचालन होता था, लेकिन अब यह 146 पर आकर सिमट गई हैं। वह भी सरकार की कवायद के कारण किसी तरह चल रही हैं।
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सहकारिता विभाग एक नियामक और सहकारी आंदोलन में कार्यरत सहकारी संस्थाओं को प्रोत्साहित करने का काम करते हैं। सहकारिता विभाग जनता के बीच के लोगों को मिलाकर एक संस्था बनाते हैं। यह किसी लक्ष्य के लिए काम करते हैं या यह कहें कि यह लोगों से पैसा इकट्ठा करते हैं और फिर उस पैसे को अच्छे कार्यो में लगाते हैं। जैसे बैंकिंग, खेती, चीनी मिल, डेरी फार्म, आदि उद्योग में उपयोग करते हैं ऐसे बहुत सारी को-ऑपरेटिव सोसाइटी चल रही हैं जिसे हम सहकारिता विभाग कह सकते हैं। बताया जाता है कि वर्ष 1965 में सहकारिता का अलग ही क्रेज था। किसानों को सुविधा देने के लिए जगह-जगह सहकारी समितियों का गठन किया गया। सहकारिता विभाग की मानें तो वर्ष 1990 तक जिले में कुल 223 सहकारी समितियों का संचालन होता था। लेकिन बीते तीन दशक में सहकारी समितियां कंगाली की दशा में पहुंच गई। करीब पांच साल पहले सहकारी समितियों की आर्थिक दशा सुधारने के लिए सरकार की ओर से जिले के 146 समितियों को प्रति समिति पांच-पांच लाख रूपये पूंजी मुहैया कराया गया जो संजीवनी साबित हुआ। यह समितियां इन्ही पैसों से खाद-बीज आदि का उठान कर किसानों को मुहैया कराती हैं। शेष समितियां केवल कागजों तक ही सिमट कर रह गई हैं।
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ढाई दशक बाद दोबारा शुरु हुआ संचालन
वर्ष 1994 में गंगापुर में स्थित सहकारी समिति डिफाल्टर होने के बाद बंद हो गयी। इसके बाद क्षेत्र के किसानों को खाद-बीज के लिये दर-दर भटकना पड़ रहा था। दो वर्ष पहले कांग्रेस नेता विनोद सिंह ने इसके संचालन के लिए अधिकारियों से गुहार लगाई। काफी मशक्कत के बाद इस समिति का संचालन शुरु हो सका।
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जिले में कई समितियां डिफाल्टर होकर बंद हैं। करीब पांच साल पहले सरकार की ओर से 146 समितियों केे पूंजी मुहैया कराया गया था, वह अभी चल रही हैं। सरकार की नजर समितियों पर जल्द ही दशा सुधरने की उम्मीद है।
- नीरज कुमार, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, बलिया
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