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राइट टू एजुकेशन का उड़ रहा माखौल
Updated Tue, 14 Aug 2018 12:28 AM IST
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बलिया। अनिवार्य एवं मुुफ्त शिक्षा अधिनियम 2009 के तहत सीबीएसई, आईसीएससी पैटर्न के निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटों पर नि:शुल्क प्रवेश लेना अनिवार्य है। लेकिन जनपद के 95 प्रतिशत विद्यालय इस अधिनियम का माखौल उड़ा रहे हैं। राइट टू एजूकेशन का आलम यह है कि दूसरे चरण की कुल 860 फाइलें अभी भी टेबल दर टेबल घूम रहा है। जबकि पहले चरण में 141 बच्चों में मात्र 56 बच्चों का ही नि:शुल्क प्रवेश हुआ है। ऐसे में कुल 945 नि:शुल्क प्रवेश अभी भी अपनी बारी का इंतजार कर रहा है।
गरीब के बच्चों का भी निजी विद्यालय में दाखिला हो, इसके लिए वर्ष 2009 में अनिवार्य एवं मुफ्त शिक्षा अधिनियम बनाया गया। वर्ष 2011 में इसको सख्ती से लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने समूचे भारत के समस्त राज्य सरकारों को हिदायत दी कि अधिनियम का पालन किया जाय, न मानने पर उसके उपर कार्रवाई की जाय। पहले चरण में जिलाधिकारी तथा सीडीओ ने 141 फाइलें स्वीकृत की। जिसमें से अब तक 56 बच्चों का ही नि:शुल्क प्रवेश हुआ है। जबकि ये आंकड़ा बीते मई महीने तक 41 था। अर्थात तीन महीने में प्रगति सिर्फ 15 है। जबकि दूसरे चरण की 860 फाइलें अभी भी टेबुल दर टेबुल घूम रहा है। इन फाइलों का निस्तारण कब तक होगा, सटीक जवाब किसी के पास नहीं है।
केंद्रीय विद्यालय तक नहीं कर रहा पालन
बलिया। निजी विद्यालय तो राइट टू एजूकेशन का पालन नहीं कर रहे हैं, लेकिन हैरत की बात यह है कि केंद्रीय विद्यालय में भी अभी तक इस अधिनियम के तहत एक भी एडमिशन नहीं हुआ है। वहीं जनपद के एक मात्र आईसीएससीई स्कूल भी इस अधिनियम की धज्जियां उड़ा रही है।
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कार्रवाई के मामले में बीएसए का दावा खोखला
बलिया। गौरतलब हो कि राइट टू एजूकेशन के मामले में बीते मई महीने में बीएसए संतोष कुमार ने बताया था कि 15 मई के बाद से विद्यालयों की सूची तैयार कर सख्ती से इसका पालन कराया जाएगा। लेकिन अभी तक सूची तैयार नहीं हो सकी है। बीएसए ने बताया कि सूची तैयार हो रही है।
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गरीब के बच्चों का भी निजी विद्यालय में दाखिला हो, इसके लिए वर्ष 2009 में अनिवार्य एवं मुफ्त शिक्षा अधिनियम बनाया गया। वर्ष 2011 में इसको सख्ती से लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने समूचे भारत के समस्त राज्य सरकारों को हिदायत दी कि अधिनियम का पालन किया जाय, न मानने पर उसके उपर कार्रवाई की जाय। पहले चरण में जिलाधिकारी तथा सीडीओ ने 141 फाइलें स्वीकृत की। जिसमें से अब तक 56 बच्चों का ही नि:शुल्क प्रवेश हुआ है। जबकि ये आंकड़ा बीते मई महीने तक 41 था। अर्थात तीन महीने में प्रगति सिर्फ 15 है। जबकि दूसरे चरण की 860 फाइलें अभी भी टेबुल दर टेबुल घूम रहा है। इन फाइलों का निस्तारण कब तक होगा, सटीक जवाब किसी के पास नहीं है।
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केंद्रीय विद्यालय तक नहीं कर रहा पालन
बलिया। निजी विद्यालय तो राइट टू एजूकेशन का पालन नहीं कर रहे हैं, लेकिन हैरत की बात यह है कि केंद्रीय विद्यालय में भी अभी तक इस अधिनियम के तहत एक भी एडमिशन नहीं हुआ है। वहीं जनपद के एक मात्र आईसीएससीई स्कूल भी इस अधिनियम की धज्जियां उड़ा रही है।
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कार्रवाई के मामले में बीएसए का दावा खोखला
बलिया। गौरतलब हो कि राइट टू एजूकेशन के मामले में बीते मई महीने में बीएसए संतोष कुमार ने बताया था कि 15 मई के बाद से विद्यालयों की सूची तैयार कर सख्ती से इसका पालन कराया जाएगा। लेकिन अभी तक सूची तैयार नहीं हो सकी है। बीएसए ने बताया कि सूची तैयार हो रही है।