{"_id":"5c59c217bdec224ca3490be8","slug":"61549386263-ballia-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"परवान नहीं चढ़ सका स्वच्छता अभियान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
परवान नहीं चढ़ सका स्वच्छता अभियान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलिया। जिले में स्वच्छता अभियान परवान नहीं चढ़ सका है। जिले के कुल 1843 राजस्व गांवों को ओडीएफ करने के लिए तीन लाख 18 हजार 552 शौचालयों का निर्माण कराया जाना था। वर्ष 15-16 से 17-18 तक जहां कुल 92 हजार 686 शौचालयों का निर्माण किया गया, वहीं केवल वर्ष 2018-19 में दो लाख 25 हजार 866 शौचालयों का निर्माण हुआ। आलम यह है कि पूर्व के सालों में ओडीएफ गांवों में आज भी शौचालयों का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। बताया जाता है कि विभागीय अधिकारियों ने शौचालयों की धनराशि को खाते में भेजकर गांवों को ओडीएफ घोषित कर दिया जबकि धरातल पर आज भी शौचालयों का निर्माण अधूरा है।
जिले में वर्ष 2015-16 से ही स्वच्छ भारत मिशन लागू है और इसके तहत सभी गांवों को ओडीएफ करने के लिए जिले के 1843 राजस्व गांवों में कुल तीन लाख 18 हजार 552 शौचालयों का निर्माण कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इसके लिए शासन की ओर से प्रति शौचालय 12 हजार की धनराशि भी उपलब्ध कराई गई। लेकिन पंचायती राज विभाग ने इस योजना को धरातल पर उतारने में कभी भी पूरी तरह रुचि नहीं दिखाई। गांवों को ओडीएफ करने के लिए कई बार शासन की ओर समय सीमा में इजाफा किया गया और अंतिम समय सीमा 30 नवंबर 2018 को अधिकारियों ने कागजी कोरम कर आनन-फानन में सभी गांवों को ओडीएफ घोषित कर दिया। लेकिन धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है। आलम यह है कि अधिकांश ओडीएफ गांवों में आज भी शौचालय निर्माण का कार्य चल रहा है।
जिले के कुल 1843 राजस्व गांवों को ओडीएफ करने के लिए कुल तीन लाख 18 हजार 552 शौचालयों का निर्माण कराया जाना था। वर्ष 15-16 से 17-18 तक जहां कुल 92 हजार 686 शौचालयों का आवंटन किया गया, वहीं केवल वर्ष 2018-19 में दो लाख 25 हजार 866 शौचालयों का आवंटन कर धनराशि लाभार्थियों के खाते में भेज दिया गया और एमआईएस कर उसे शौचालय निर्माण मान लिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में वर्ष 2015-16 से ही स्वच्छ भारत मिशन लागू है और इसके तहत सभी गांवों को ओडीएफ करने के लिए जिले के 1843 राजस्व गांवों में कुल तीन लाख 18 हजार 552 शौचालयों का निर्माण कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इसके लिए शासन की ओर से प्रति शौचालय 12 हजार की धनराशि भी उपलब्ध कराई गई। लेकिन पंचायती राज विभाग ने इस योजना को धरातल पर उतारने में कभी भी पूरी तरह रुचि नहीं दिखाई। गांवों को ओडीएफ करने के लिए कई बार शासन की ओर समय सीमा में इजाफा किया गया और अंतिम समय सीमा 30 नवंबर 2018 को अधिकारियों ने कागजी कोरम कर आनन-फानन में सभी गांवों को ओडीएफ घोषित कर दिया। लेकिन धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है। आलम यह है कि अधिकांश ओडीएफ गांवों में आज भी शौचालय निर्माण का कार्य चल रहा है।
विज्ञापन
जिले के कुल 1843 राजस्व गांवों को ओडीएफ करने के लिए कुल तीन लाख 18 हजार 552 शौचालयों का निर्माण कराया जाना था। वर्ष 15-16 से 17-18 तक जहां कुल 92 हजार 686 शौचालयों का आवंटन किया गया, वहीं केवल वर्ष 2018-19 में दो लाख 25 हजार 866 शौचालयों का आवंटन कर धनराशि लाभार्थियों के खाते में भेज दिया गया और एमआईएस कर उसे शौचालय निर्माण मान लिया गया।
विज्ञापन