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पशु अस्पताल खुद पड़ गए बीमार
Updated Sat, 09 Dec 2017 10:57 PM IST
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सुखपुरा। कस्बा स्थित पशु अस्पताल इन दिनों खुद बीमार हो गया है। जुलाई में यहा के चिकित्सक का स्थानांतरण हुआ, उसके बाद नियमित तैनाती किसी चिकित्सक की नहीं की गई। हनुमानगंज के पशुचिकित्सक को यहां का भी प्रभार दिया गया है, जो सप्ताह मे एक या दो दिन आ जाए वह काफी हैं।
जहां सरकार द्वारा पशुपालन के लिए तरह तरह का प्रोत्साहन किसानों को दिया जा रहा है, वहीं उचित चिकित्सा के अभाव मे लोग पशुपालन नहीं करना चाहते। बताते चले कि सुखपुरा का पशु अस्पताल दर्जनों गांव के बीच अकेला अस्पताल है। लेकिन यह अस्पताल एक फार्मासिस्ट व चपरासी के बदौलत चल रहा है। यहां दवा के नाम पर कुछ भी नहीं मिलती। फार्मासिस्ट से लगायत दोनो कर्मचारी मोबाइल ड्यूटी ही करते हैं। लोगों के दरवाजे पर जाकर इनके द्वारा इलाज किया जाता है। भरखरा निवासी अशोक मिश्र ने बताया कि छह माह के अंतराल में हजारों रुपए खर्च करने के बाद भी उनकी चार पशु मर गए। मरने का कारण कोई चिकित्सक नहीं होना है, मजबूरी में जो झोला छाप चिकित्सक है उन्हीं से इलाज कराना पड़ता है।
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जहां सरकार द्वारा पशुपालन के लिए तरह तरह का प्रोत्साहन किसानों को दिया जा रहा है, वहीं उचित चिकित्सा के अभाव मे लोग पशुपालन नहीं करना चाहते। बताते चले कि सुखपुरा का पशु अस्पताल दर्जनों गांव के बीच अकेला अस्पताल है। लेकिन यह अस्पताल एक फार्मासिस्ट व चपरासी के बदौलत चल रहा है। यहां दवा के नाम पर कुछ भी नहीं मिलती। फार्मासिस्ट से लगायत दोनो कर्मचारी मोबाइल ड्यूटी ही करते हैं। लोगों के दरवाजे पर जाकर इनके द्वारा इलाज किया जाता है। भरखरा निवासी अशोक मिश्र ने बताया कि छह माह के अंतराल में हजारों रुपए खर्च करने के बाद भी उनकी चार पशु मर गए। मरने का कारण कोई चिकित्सक नहीं होना है, मजबूरी में जो झोला छाप चिकित्सक है उन्हीं से इलाज कराना पड़ता है।
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