{"_id":"59e24e084f1c1b9e678b5c78","slug":"41508003336-ballia-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नगर निकाय चुनाव : चेयरमैन सीट रिजर्व होते ही उलटे पड़े दांव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नगर निकाय चुनाव : चेयरमैन सीट रिजर्व होते ही उलटे पड़े दांव
Updated Sat, 14 Oct 2017 11:22 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मनियर। नगर निकाय चुनाव में आरक्षण की स्थिति गुरुवार की देर शाम साफ होने के बाद अटकलों पर भी विराम लग गया। मनियर नगर पंचायत में अध्यक्ष पद के लिए जातिगत वोटों को लेकर सवर्ण तथा पिछड़े वर्ग के नेताओं ने छह माह पहले से ही तैयारी शुरू कर दी थी। लेकिन सवर्ण जाति के उम्मीदवारों ने तो इसे मिशन बनाते हुए चुनावी जीतने के लिए हर प्रकार हथकंडा अपनाने के साथ दावतों का बहाना ढ़ूंढ़ा जा रहा था। लेकिन गुरुवार को यह धरा का धरा रह गया। जबकि नगर पंचायत अध्यक्ष पद का सीट पिछड़ी जाति के लिए सुरक्षित कर दी गई।
महीनों से अपने लिए नगर पंचायत के चेयरमैन पद पर दावेदारी के लिए तैयारी कर रहे युवा नेताओं के साथ बुजुर्ग भी अपनी दावेदारी पेश करने में लगे थे। उनका मानना था कि इस बार भी यह सीट अनारक्षित रहेगी। जिसको लेकर तीन बड़े उम्मीदवार के साथ कई अन्य उम्मीदवार भी चेयरमैन बनने का ख्वाब संजोए थे। जिनके द्वारा अलग-अलग इलाकों में सांस्कृतिक कार्यक्रम के जरिए वोटरों को लुभाने का दौर चल रहा था। इसके लिए उम्मीदवारों ने लाखों रुपये पानी की तरह बहाए। इलाके में बड़े-बड़े होर्डिंग्स के साथ कार्यक्रमों का फीता काटने में जेबे ढीली करते रहे। लेकिन चुनाव आयोग ने आरक्षण नीति के तहत नगर पंचायत मनियर की सीट पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित कर दी। इसकी जानकारी जैसे ही क्षेत्र के सवर्ण उम्मीदवारों को हुई, उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया। वहीं पिछड़े वर्ग के नेता अब नए जोश के साथ घरों से निकलकर मैदान में आ गए हैं। पिछड़े जाति के किस उम्मीदवार को बड़े दल के लोग अपना उम्मीदवार बना रहे हैं। अब इस पर कयास लगाने लगे हैं।
विज्ञापन
महीनों से अपने लिए नगर पंचायत के चेयरमैन पद पर दावेदारी के लिए तैयारी कर रहे युवा नेताओं के साथ बुजुर्ग भी अपनी दावेदारी पेश करने में लगे थे। उनका मानना था कि इस बार भी यह सीट अनारक्षित रहेगी। जिसको लेकर तीन बड़े उम्मीदवार के साथ कई अन्य उम्मीदवार भी चेयरमैन बनने का ख्वाब संजोए थे। जिनके द्वारा अलग-अलग इलाकों में सांस्कृतिक कार्यक्रम के जरिए वोटरों को लुभाने का दौर चल रहा था। इसके लिए उम्मीदवारों ने लाखों रुपये पानी की तरह बहाए। इलाके में बड़े-बड़े होर्डिंग्स के साथ कार्यक्रमों का फीता काटने में जेबे ढीली करते रहे। लेकिन चुनाव आयोग ने आरक्षण नीति के तहत नगर पंचायत मनियर की सीट पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित कर दी। इसकी जानकारी जैसे ही क्षेत्र के सवर्ण उम्मीदवारों को हुई, उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया। वहीं पिछड़े वर्ग के नेता अब नए जोश के साथ घरों से निकलकर मैदान में आ गए हैं। पिछड़े जाति के किस उम्मीदवार को बड़े दल के लोग अपना उम्मीदवार बना रहे हैं। अब इस पर कयास लगाने लगे हैं।
विज्ञापन