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खाद बीज के लिए जाना पड़ रहा तीन किमी दूर
Updated Fri, 28 Jul 2017 11:18 PM IST
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लालगंज। न्याय पंचायत मुरारपट्टी की सहकारी समिति शिवपुर कपूर दियर दशकों से इस क्षेत्र से तीन किलोमीटर दूर दूसरे सहकारी समिति से अटैच कर चलाई जा रही है। जिससे सहकारी समितियों से मिलने वाली खाद बीज को लेने के लिए किसानों को तीन किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। जबकि वित्तीय वर्ष 2012-2013 में ही लगभग आठ लाख के लागत से पैक्सपैड विभाग को सहकारी समिति का भवन बनाने के लिए पैसा भेज दिया गया था।
दो साल से भवन भी बनकर लगभग तैयार हो गया है। फिर भी विभाग को हैंडओवर नहीं होने के कारण क्षेत्र के किसानों को दूसरे न्याय पंचायत में बनी सहकारी समिति में जाकर खाद लेना पड़ रहा है। जिससे किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। इस संबंध में सहकारी समिति के सचिव जवाहर प्रसाद का कहना है कि भवन निर्माण का काम पूरा नहीं हुआ है, इसलिए हैंड ओवर नहीं हुआ है। वहीं पैक्सपेड के कर्मचारियों की मानें तो सहकारी समिति का भवन पूरी तरह बनकर तैयार है। हैंडओवर नहीं होने के कारण जो भी हो परेशानी क्षेत्र के किसानों का ही है। ज्ञात हो की 1980 के दशक में शिवपुर कपूर दियर सहकारी समिति का निर्माण मुरार पट्टी निवासी रामजी पाठक के द्वारा दी गई दान के जमीन पर बनाई गई थी और कुछ सालों तक सब कुछ ठीक था पर भवन ज्यादा दिन नहीं चला और भवन विभाग के रखरखाव के अभाव में क्षतिग्रस्त हो गया। उसी समय से कभी भगवान पुर तो कभी दोकटी सहकारी समिति से अटैच कर इस सहकारी समिति को चलाया जा रहा है।
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दो साल से भवन भी बनकर लगभग तैयार हो गया है। फिर भी विभाग को हैंडओवर नहीं होने के कारण क्षेत्र के किसानों को दूसरे न्याय पंचायत में बनी सहकारी समिति में जाकर खाद लेना पड़ रहा है। जिससे किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। इस संबंध में सहकारी समिति के सचिव जवाहर प्रसाद का कहना है कि भवन निर्माण का काम पूरा नहीं हुआ है, इसलिए हैंड ओवर नहीं हुआ है। वहीं पैक्सपेड के कर्मचारियों की मानें तो सहकारी समिति का भवन पूरी तरह बनकर तैयार है। हैंडओवर नहीं होने के कारण जो भी हो परेशानी क्षेत्र के किसानों का ही है। ज्ञात हो की 1980 के दशक में शिवपुर कपूर दियर सहकारी समिति का निर्माण मुरार पट्टी निवासी रामजी पाठक के द्वारा दी गई दान के जमीन पर बनाई गई थी और कुछ सालों तक सब कुछ ठीक था पर भवन ज्यादा दिन नहीं चला और भवन विभाग के रखरखाव के अभाव में क्षतिग्रस्त हो गया। उसी समय से कभी भगवान पुर तो कभी दोकटी सहकारी समिति से अटैच कर इस सहकारी समिति को चलाया जा रहा है।
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