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कटान रोकने को बनी योजना परवान नहीं चढ़ी
Updated Sun, 02 Jul 2017 11:59 PM IST
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बेल्थरारोड। घाघरा नदी के जल स्तर में वृद्धि शुरू हो गई है । जलस्तर में धीमी गति के बढ़ाव से तटवर्ती दर्जनों ग्रामों के हजारों लोगों के दिलों की धड़कनें तेज हो गई है । उधर, कटान रोकने के लिए बनी योजना परवान नहीं चढ़ सकी है।
खासतौर पर तटवर्ती चैनपुर, गुलौरा, मठिया, महुआतर , टगुंनियां, हाहानाला आदि स्थानों के लोग कटान से भयभीत हैं। बाढ़ और कटान रोकने की स्थाई व्यवस्था नहीं किए जाने से हर साल सैकड़ों एकड़ कृषि योग्य उपजाऊ भूमि नदी की जलधारा में समाहित होती रहती है । बाढ़ के समय शासन- प्रशासन के लोगों का दौरा शुरू हो जाता है , लेकिन बाढ़ और कटान पीड़ितों को राहत दिलाना दूर की कौड़ी हो जाती है। जिसके परिणाम स्वरुप कटान पीड़ितों की समस्या जस की तस बनी रहती है। बाढ़ और कटान की त्रासदी झेल चुके लोग सरकारी व्यवस्था के प्रति संतुष्ट नहीं है।
कटान रोकने के लिए स्थाई व्यवस्था किए जाने के संबंध में एक कार्य योजना तैयार की गई। जिसके तहत टगुनियां में घोसी सांसद हरिनारायण राजभर के घर के सामने ठोकर बनाया जाना जरूरी समझा गया। उसके साथ ही चैनपुर, गुलौरा ,मठिया शिव मंदिर आदि स्थानों पर नदी का कटान रोकने के लिए ठोकर बनाने की बात भी थी ताकि कटान की समस्या से निजात मिले।
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जानकार सूत्रों की माने तो यह मामला शासन स्तर पर पहुंच गया है ,लेकिन प्रभावी राजनैतिक हस्तक्षेप के अभाव में तटवर्ती आधा दर्जन स्थानों पर ठोकर बनाने का कार्य अभी तक शुरु नहीं किया गया। जिससे इस बार भी बाढ़ के दिनों में तटवर्ती वाशिंदों को कटान की स्थिति का सामना करना पड़ेगा।
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खासतौर पर तटवर्ती चैनपुर, गुलौरा, मठिया, महुआतर , टगुंनियां, हाहानाला आदि स्थानों के लोग कटान से भयभीत हैं। बाढ़ और कटान रोकने की स्थाई व्यवस्था नहीं किए जाने से हर साल सैकड़ों एकड़ कृषि योग्य उपजाऊ भूमि नदी की जलधारा में समाहित होती रहती है । बाढ़ के समय शासन- प्रशासन के लोगों का दौरा शुरू हो जाता है , लेकिन बाढ़ और कटान पीड़ितों को राहत दिलाना दूर की कौड़ी हो जाती है। जिसके परिणाम स्वरुप कटान पीड़ितों की समस्या जस की तस बनी रहती है। बाढ़ और कटान की त्रासदी झेल चुके लोग सरकारी व्यवस्था के प्रति संतुष्ट नहीं है।
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कटान रोकने के लिए स्थाई व्यवस्था किए जाने के संबंध में एक कार्य योजना तैयार की गई। जिसके तहत टगुनियां में घोसी सांसद हरिनारायण राजभर के घर के सामने ठोकर बनाया जाना जरूरी समझा गया। उसके साथ ही चैनपुर, गुलौरा ,मठिया शिव मंदिर आदि स्थानों पर नदी का कटान रोकने के लिए ठोकर बनाने की बात भी थी ताकि कटान की समस्या से निजात मिले।
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जानकार सूत्रों की माने तो यह मामला शासन स्तर पर पहुंच गया है ,लेकिन प्रभावी राजनैतिक हस्तक्षेप के अभाव में तटवर्ती आधा दर्जन स्थानों पर ठोकर बनाने का कार्य अभी तक शुरु नहीं किया गया। जिससे इस बार भी बाढ़ के दिनों में तटवर्ती वाशिंदों को कटान की स्थिति का सामना करना पड़ेगा।