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चिकित्सक अवकाश पर नहीं हुई वैकल्पिक व्यवस्था
Updated Thu, 29 Jun 2017 11:51 PM IST
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बलिया। जिला अस्पताल में रेडियोलाजिस्ट चिकित्सक के अवकाश पर चले जाने के चलते तीन दिनों के लिए अल्ट्रासाउंड बंद कर दिया गया है। ऐसे में मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि अगर चिकित्सक को अवकाश पर जाना ही था तो अस्पताल प्रबंधन को इसकी वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। वहीं दूसरी ओर सीएमएस का कहना है कि उन्होंने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत चिकित्सक की मांग सीएमओ से की थी। लेकिन उनकी तरफ से कोई व्यवस्था नहीं हो पाई। जिसके चलते अल्ट्रासाउंड बंद करने का निर्णय लिया गया। वहीं, सीएमओ ने चिकित्सक नहीं होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया है।
अल्ट्रासाउंड बंद होने से जिला अस्पताल पहुंचे मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं प्राइवेट अल्ट्रासाउंड संचालकाें की चांदी है। मरीजों व उनके तीमारदारों को आर्थिक व मानसिक रूप से परेशान होना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में तैनात रेडियोलाजिस्ट 28 से 30 जून तक के लिए अवकाश पर चले गए हैं। जिसकी नोटिस सीएमएस द्वारा अल्ट्रासाउंड कक्ष के दरवाजे पर चस्पा करा दिया गया है। जिसे देख जिला अस्पताल पहुंचे मरीज व तीमारदार वापस लौट जा रहे थे। अंत में उन्हें मजबूर होकर प्राइवेट अल्ट्रासाउंड संचालकों के यहां जाना पड़ रहा है। जहां 400 से 600 रुपये तक अल्ट्रासाउंड की शुल्क देनी पड़ रही है। जबकि जिला चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड नि:शुल्क है। स्वास्थ्य महकमा की माने तो प्रतिदिन 30 से 35 अल्ट्रासाउंड जिला अस्पताल में हो जाते है। इस बाबत सीएमएस जीसी मौर्या का कहना है कि वैकल्पिक व्यवस्था के लिए मैंने मुख्य चिकित्साधिकारी से एक रेडियोलाजिस्ट की मांग की थी। लेकिन उनके द्वारा कोई व्यवस्था नहीं की गई। जिससे मजबूर होकर तीन दिन के लिए अल्ट्रासाउंड को बंद करना पड़ा है।
स्वास्थ्य महकमे के आपसी खींचतान में पीस रहे मरीज
जिला अस्पताल में तैनात रेडियोलाजिस्ट के तीन दिन अवकाश पर चले जाने के बाद सीएमओ व सीएमएस के बीच रेडियालाजिस्ट की वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर तकरार बढ़ गई। जिसके चलते सीएमएस ने मजबूर होकर अल्ट्रासाउंड कक्ष के दरवाजे पर 28 से 30 जून तक अल्ट्रासाउंड बंद होने का नोटिस चस्पा करवाना पड़ा। इन दोनों अधिकारी द्वय के चक्कर में मरीजों व तीमारदारों को आर्थिक व मानसिक रूप से पीसना पड़ रहा है, जबकि प्राइवेट अल्ट्रासाउंड संचालकों की चांदी रही।
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अल्ट्रासाउंड बंद होने से जिला अस्पताल पहुंचे मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं प्राइवेट अल्ट्रासाउंड संचालकाें की चांदी है। मरीजों व उनके तीमारदारों को आर्थिक व मानसिक रूप से परेशान होना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में तैनात रेडियोलाजिस्ट 28 से 30 जून तक के लिए अवकाश पर चले गए हैं। जिसकी नोटिस सीएमएस द्वारा अल्ट्रासाउंड कक्ष के दरवाजे पर चस्पा करा दिया गया है। जिसे देख जिला अस्पताल पहुंचे मरीज व तीमारदार वापस लौट जा रहे थे। अंत में उन्हें मजबूर होकर प्राइवेट अल्ट्रासाउंड संचालकों के यहां जाना पड़ रहा है। जहां 400 से 600 रुपये तक अल्ट्रासाउंड की शुल्क देनी पड़ रही है। जबकि जिला चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड नि:शुल्क है। स्वास्थ्य महकमा की माने तो प्रतिदिन 30 से 35 अल्ट्रासाउंड जिला अस्पताल में हो जाते है। इस बाबत सीएमएस जीसी मौर्या का कहना है कि वैकल्पिक व्यवस्था के लिए मैंने मुख्य चिकित्साधिकारी से एक रेडियोलाजिस्ट की मांग की थी। लेकिन उनके द्वारा कोई व्यवस्था नहीं की गई। जिससे मजबूर होकर तीन दिन के लिए अल्ट्रासाउंड को बंद करना पड़ा है।
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स्वास्थ्य महकमे के आपसी खींचतान में पीस रहे मरीज
जिला अस्पताल में तैनात रेडियोलाजिस्ट के तीन दिन अवकाश पर चले जाने के बाद सीएमओ व सीएमएस के बीच रेडियालाजिस्ट की वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर तकरार बढ़ गई। जिसके चलते सीएमएस ने मजबूर होकर अल्ट्रासाउंड कक्ष के दरवाजे पर 28 से 30 जून तक अल्ट्रासाउंड बंद होने का नोटिस चस्पा करवाना पड़ा। इन दोनों अधिकारी द्वय के चक्कर में मरीजों व तीमारदारों को आर्थिक व मानसिक रूप से पीसना पड़ रहा है, जबकि प्राइवेट अल्ट्रासाउंड संचालकों की चांदी रही।
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