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75 हजार मतदाताओं के पास नहीं है सही मतदाता पहचान पत्र!
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बलिया। जिले के 75 हजार मतदाता ऐसे हैं जिन्हें संशोधित मतदाता पहचान पत्र नहीं उपलब्ध कराया गया है। इसकी वजह से वे अपने मतदाता पहचान पत्र का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। 1995 में इन मतदाताओं को छह अंकों के नंबर के पहचान पत्र दिए गए थे। बाद में इन पहचान पत्रों को नंबर सात डिजीट का कर दिया गया। इसकी वजह से बैंक समेत अन्य स्थानों पर ऐसे मतदाता पहचानपत्रों को इनवैलिड घोषित कर दिया जा रहा है। ऐसे मतदाता निर्वाचन आयोग के ओर से तय विकल्पों के सहारे मतदान करते हैं।
निर्वाचन विभाग की ओर से नए मतदाताओं को मतदाता पहचान पत्र उपलब्ध कराया गया लेकिन 1995 में जारी छह नंबरों वाले पहचान पत्रों की जगह संशोधित सात डिजीट के नंबर वाले मतदाता पहचान पत्र नहीं जारी किए गए। वर्ष 1995 में जिले में कुल 75 हजार मतदाताओं के पहचान पत्र जारी किए गए। इसके बाद से हर साल सूची में नए मतदाताओं के नाम होते हुए मतदाताओं को पहचान पत्र देने का काम भी चलता रहा। वर्ष 2007 में किसी कारणवश निवार्चन कार्यालय की ओर से मतदाता पहचान पत्र के पर अंकित नंबरों के पहले शून्य लगा कर छह के स्थान पर सात अंक कर दिए गए लेकिन किसी भी मतदाता को बदले नंबर का मतदाता पहचान पत्र जारी नहीं किया गया। आलम यह है कि यह पहचान पत्र बैंकों आदि संस्थानों में सत्यापन के दौरान इनवैलिड हो जा रहे हैं। इतना ही नहीं मतदाता इस पहचान पत्र के आधार पर वोट भी नहीं देते हैं ताकि उन्हें बूथ पर किसी दिक्कत का सामना न करना पड़े।
फेफना विस क्षेत्र के भरौली निवासी गिरिजा को यूपी/43/428/753294 जारी किया गया लेकिन इसके अंतिम छह अंकों को सात अंक करने के लिए 0753294 कर दिया गया। इसी तरह इसी गांव के जैगुन को यूपी/43/428/753300 जारी किया गया और बाद अंतिम अंकों के पहले शून्य लगाकर सात अंकों का कर दिया गया। रामनारायण भी जब बैंक में किसी काम के लिए गए और पहचान पत्र को दिया तो सत्यापन में इनवैलिड बताया गया। इनको भी यूपी/43/428/753295 शुरु में जारी किया गया और बाद में इनके अंतिम छह अंकों के पहले शून्य लगाकर सात अंकों का कर दिया गया। यह तो महज उदाहरण भर है, इस साल जारी 75 हजार मतदाताओं के अंक बदलने के बावजूद मतदाता पहचान पत्र जारी नहीं किया गया। हालांकि आयोग की ओर से निर्धारित अन्य विकल्पों के सहारे यह मतदान करते हैं।
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कोट
यह काफी पहले का मामला है और नियमानुसार मतदाता पहचान बदलने की स्थिति में नए नंबरों के साथ जारी होना चाहिए। फिलहाल चुनाव चल रहा है और संबंधित मतदाता पहचान पत्र के तौर पर आयोग की ओर से निर्धारित विकल्पों का प्रयोग कर सकते हैं। चुनाव बाद इस मामले की पड़ताल कर कार्रवाई की जाएगी।-रामआसरे, एडीएम व उप जिला निर्वाचन अधिकारी, बलिया
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निर्वाचन विभाग की ओर से नए मतदाताओं को मतदाता पहचान पत्र उपलब्ध कराया गया लेकिन 1995 में जारी छह नंबरों वाले पहचान पत्रों की जगह संशोधित सात डिजीट के नंबर वाले मतदाता पहचान पत्र नहीं जारी किए गए। वर्ष 1995 में जिले में कुल 75 हजार मतदाताओं के पहचान पत्र जारी किए गए। इसके बाद से हर साल सूची में नए मतदाताओं के नाम होते हुए मतदाताओं को पहचान पत्र देने का काम भी चलता रहा। वर्ष 2007 में किसी कारणवश निवार्चन कार्यालय की ओर से मतदाता पहचान पत्र के पर अंकित नंबरों के पहले शून्य लगा कर छह के स्थान पर सात अंक कर दिए गए लेकिन किसी भी मतदाता को बदले नंबर का मतदाता पहचान पत्र जारी नहीं किया गया। आलम यह है कि यह पहचान पत्र बैंकों आदि संस्थानों में सत्यापन के दौरान इनवैलिड हो जा रहे हैं। इतना ही नहीं मतदाता इस पहचान पत्र के आधार पर वोट भी नहीं देते हैं ताकि उन्हें बूथ पर किसी दिक्कत का सामना न करना पड़े।
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फेफना विस क्षेत्र के भरौली निवासी गिरिजा को यूपी/43/428/753294 जारी किया गया लेकिन इसके अंतिम छह अंकों को सात अंक करने के लिए 0753294 कर दिया गया। इसी तरह इसी गांव के जैगुन को यूपी/43/428/753300 जारी किया गया और बाद अंतिम अंकों के पहले शून्य लगाकर सात अंकों का कर दिया गया। रामनारायण भी जब बैंक में किसी काम के लिए गए और पहचान पत्र को दिया तो सत्यापन में इनवैलिड बताया गया। इनको भी यूपी/43/428/753295 शुरु में जारी किया गया और बाद में इनके अंतिम छह अंकों के पहले शून्य लगाकर सात अंकों का कर दिया गया। यह तो महज उदाहरण भर है, इस साल जारी 75 हजार मतदाताओं के अंक बदलने के बावजूद मतदाता पहचान पत्र जारी नहीं किया गया। हालांकि आयोग की ओर से निर्धारित अन्य विकल्पों के सहारे यह मतदान करते हैं।
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यह काफी पहले का मामला है और नियमानुसार मतदाता पहचान बदलने की स्थिति में नए नंबरों के साथ जारी होना चाहिए। फिलहाल चुनाव चल रहा है और संबंधित मतदाता पहचान पत्र के तौर पर आयोग की ओर से निर्धारित विकल्पों का प्रयोग कर सकते हैं। चुनाव बाद इस मामले की पड़ताल कर कार्रवाई की जाएगी।-रामआसरे, एडीएम व उप जिला निर्वाचन अधिकारी, बलिया