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आर्सेनिकोसिस की चपेट में 31 पंचायतें
ballia
Updated Sun, 17 Dec 2017 09:45 PM IST
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हैंडपंप से पानी निकालती महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
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विकास खंड बेलहरी के भूगर्भ जल में आर्सेनिक की मात्रा अधिक होने के कारण जल स्रोतों की उपयोगिता ही समाप्त होती जा रही है। जिस कारण लोगों को स्वच्छ जल के अभाव में परेशानी का सामना के साथ ही कई बीमारियों से भी जूझना पड़ रहा है। जिसे शासन ने आर्सेनिकोसिस नाम दिया है। इस रोग से अब तक दर्जन भर से अधिक लोगों की मौत हो गई है, जबकि हजारों पीड़ित हैं। आलम यह है कि आर्सेनिक चर्मरोगों के मरीज लगातार बढ़ रहे है।
केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा कई बार सर्वेक्षण टीमों को भेजकर जल स्रोतों की स्थलीय जांच कराई गई। इसके अलावा अन्य समाजसेवी संस्थाओं द्वारा जांच कर रिपोर्ट शासन को भेजा गया। जिसमें कुओं को छोड़ कर इन्डिया मार्का टू व छोटे हैंडपम्पों में निर्धारित मानक से अधिक आर्सेनिक पाया गया। लेकिन आज तक स्वच्छ जल के लिए कोई माकूल इंतजाम नहीं किया जा सका। मालूम हो कि वर्ष 2000 में सबसे पहले गंगापुर के तिवारी टोला व चौबे छपरा में यादवपुर मेडिकल कॉलेज कोलकाता से आई टीम ने जांच कर क्षेत्र में आर्सेनिक होने की पुष्टि की थी।
इसके बाद राजपुर एकौना, बजरहां, नेमछपरा, उदवंतछपरा, बबुरानी, नवकागांव, हल्दी, नन्दपुर, सुल्तानपुर, बहादुपुर, नीरुपुर, पिंडारी, भरसौता, हरिहरपुर, रेपुरा, सुजानीपुर, वादिलपुर, बघौच, भरखोखा आदि 31 ग्राम पंचायतों में आर्सेनिक की मात्रा मानक से अधिक है। आर्सेनिकोसिस को लेकर हजारों लोग तरह-तरह के चर्मरोगों से परेशान हैं। जो देश के विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। लेकिन कहीं उसका विशेष लाभ नहीं मिल रहा है। ;ऐसे में लोग पीने के पानी को लेकर परेशान हैं।
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केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा कई बार सर्वेक्षण टीमों को भेजकर जल स्रोतों की स्थलीय जांच कराई गई। इसके अलावा अन्य समाजसेवी संस्थाओं द्वारा जांच कर रिपोर्ट शासन को भेजा गया। जिसमें कुओं को छोड़ कर इन्डिया मार्का टू व छोटे हैंडपम्पों में निर्धारित मानक से अधिक आर्सेनिक पाया गया। लेकिन आज तक स्वच्छ जल के लिए कोई माकूल इंतजाम नहीं किया जा सका। मालूम हो कि वर्ष 2000 में सबसे पहले गंगापुर के तिवारी टोला व चौबे छपरा में यादवपुर मेडिकल कॉलेज कोलकाता से आई टीम ने जांच कर क्षेत्र में आर्सेनिक होने की पुष्टि की थी।
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इसके बाद राजपुर एकौना, बजरहां, नेमछपरा, उदवंतछपरा, बबुरानी, नवकागांव, हल्दी, नन्दपुर, सुल्तानपुर, बहादुपुर, नीरुपुर, पिंडारी, भरसौता, हरिहरपुर, रेपुरा, सुजानीपुर, वादिलपुर, बघौच, भरखोखा आदि 31 ग्राम पंचायतों में आर्सेनिक की मात्रा मानक से अधिक है। आर्सेनिकोसिस को लेकर हजारों लोग तरह-तरह के चर्मरोगों से परेशान हैं। जो देश के विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। लेकिन कहीं उसका विशेष लाभ नहीं मिल रहा है। ;ऐसे में लोग पीने के पानी को लेकर परेशान हैं।
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